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Vrishabha Sankranti 2024: वृषभ संक्रांति की पूजा कैसे करते हैं?

Written By WD Feature Desk
Updated: मंगलवार, 14 मई 2024 (12:15 IST)
Vrishabha sankranti : सूर्य देव 14 मई 2024 मंगलवार के दिन शाम को 06:04 पर वृषभ में गोचर करेंगे। सूर्य के वृषभ में गोचर को वृषभ संक्रांति कहते हैं। शास्त्रों में वृषभ संक्रांति को मकर संक्रांति के समान ही माना गया है। वृषभ संक्रांति के दिन पूजा, जप, तप और दान करने से अमोघ फल की प्राप्ति होती है।
 
वृषभ संक्रान्ति पुण्य काल- सुबह 10:50 से शाम 06:04 तक।
वृषभ संक्रान्ति महा पुण्य काल- दोपहर 03:49 से शाम 06:04 तक।
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वृषभ संक्रांति के दिन भगवान शिव के ऋषभ रूद्र स्वरूप और भगवान सूर्य की पूजा किए जाने की परंपरा है।
वृषभ संक्रांति के दिन सूर्य पूजा करने से कुंडली में सूर्य मजबूत होता है। इसलिए सूर्य को अर्घ्‍य भी देना चाहिए।
इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से सुख और समृद्ध जीवन के साथ ही जातक पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति होकर मोक्ष प्राप्त करता है।
 
वृषभ संक्रांति की विधि: 
वृषभ संक्रांति पर प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व स्नान करके भगवान् शिव का पूजन किया जाता है। इस दिन भगवान शिव के रिषभरूद्र स्वरुप को पूजा जाता है। वृषभ संक्रांति में व्रत रखने वाले व्यक्ति को रात्रि में जमीन पर सोना होता है। संक्रांति मुहूर्त के पहले आने वाली 16 घड़ियों को बहुत शुभ माना जाता है। इस समय में दान, मंत्रोच्चारण, पितृ तर्पण और शांति पूजा करवाना भी बहुत शुभ माना जाता है।
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भगवान शिव के वाहक नंदी भी एक बैल हैं जो भगवान शिव के सबसे प्रिय भक्त है इसलिए इस दिन पर भगवान शिव की अराधना करने से शुभ फल प्राप्त होता है। भगवान ब्रह्मा ब्रह्मांड के निर्माता हैं, भगवान विष्णु देखभाल करने के लिए ज़िम्मेदार है और भगवान शिव (जिसे महेश भी कहा जाता है) इसे समाप्त करने के लिए जिम्मेदार है।
 
इस प्रकार ब्रह्मांड में संतुलन बनाए रखने के लिए तीनों का होना आवश्यक है। जीवन का यह चक्र इन्हीं तीनों के कराण चलता है। वृषभ संक्राति पर इनकी आराधना मोक्ष दिलाती है।

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