Daily Horoscope
✕

Rukmini Ashtami 2025: सौभाग्य और समृद्धि का दिव्य पर्व रुक्मिणी अष्टमी व्रत क्यों रखा जाता है, जानें धार्मिक महत्व, मान्यताएं और कारण

Written By WD Feature Desk
Updated: शुक्रवार, 12 दिसंबर 2025 (09:20 IST)
Rukmini Ashtami Festival: रुक्मिणी अष्टमी व्रत एक प्रमुख हिंदू पर्व है, जिसे विशेष रूप से महाराष्ट्र, कर्नाटका, उत्तर भारत और अन्य कुछ स्थानों पर श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। यह पर्व भगवान श्री कृष्ण और रुक्मिणी जी के मिलन का प्रतीक माना जाता है और रुक्मिणी जी के पूजन का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यतानुसार हिंदू धर्म में अष्टमी तिथि को बहुत ही शुभ माना गया है, क्योंकि जहां राधा और भगवान श्री कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि को हुआ है, वहीं रुक्मिणी का जन्म भी अष्टमी तिथि को हुआ है।ALSO READ: Rukmini Ashtami 2025: रुक्मिणी अष्टमी व्रत क्यों रखा जाता है, जानें महत्व और पूजा विधि
 
2025 में रुक्मिणी अष्टमी का पर्व 12 दिसंबर को मनाया जाएगा। यह दिन विशेष रूप से विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी जीवन की कामना करती हैं, जबकि कन्याएं अपने भविष्य के लिए अच्छे वर की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं।
 
यह व्रत मुख्य रूप से देवी रुक्मिणी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इसके कारण निम्न है:
 
सौभाग्य और समृद्धि: देवी रुक्मिणी को माता लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। इसलिए, यह व्रत रखने से साधकों को सौभाग्य, धन, समृद्धि और स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
 
अखंड सौभाग्य: महिलाएं यह व्रत अखंड सौभाग्य और अपने पति की लंबी आयु के लिए रखती हैं।
 
मनचाहा जीवनसाथी: ऐसी मान्यता है कि यदि अविवाहित कन्याएं सच्चे मन से यह व्रत रखती हैं, तो उन्हें भगवान कृष्ण जैसे आदर्श और मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति होती है।
 
संतान सुख: निःसंतान दंपत्ति संतान सुख की प्राप्ति के लिए भी यह व्रत रखते हैं, क्योंकि रुक्मिणी और कृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न को कामदेव का अवतार माना जाता है।
 
प्रेम संबंध: यह व्रत वैवाहिक जीवन में प्रेम और मधुरता बनाए रखने में सहायक माना जाता है।ALSO READ: Saphala Ekadashi Benefits: सफला एकादशी व्रत का महत्व और 5 फायदे
 
रुक्मिणी अष्टमी व्रत का महत्व:
 
* भगवान श्री कृष्ण और रुक्मिणी जी की पूजा: रुक्मिणी अष्टमी का दिन भगवान श्री कृष्ण और रुक्मिणी के रिश्ते के सम्मान में मनाया जाता है। यह व्रत उनके सम्मान में रखा जाता है, जो दाम्पत्य जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य लाता है।
 
* सौभाग्य और समृद्धि की प्राप्ति: यह व्रत विशेष रूप से सौभाग्यवती स्त्रियों द्वारा किया जाता है, ताकि उनका दाम्पत्य जीवन सुखमय और समृद्ध रहे। यह व्रत महिलाओं को पति की लंबी उम्र और परिवार में खुशहाली की कामना करने का अवसर देता है।
 
* व्रत विधि: व्रत की शुरुआत सुबह स्नान से होती है, फिर रुक्मिणी जी की पूजा की जाती है। पूजा में फल, मिठाइयाi , फूल, और प्रसाद चढ़ाए जाते हैं। इस दिन व्रति उपवास रखते हैं और भगवान श्री कृष्ण और रुक्मिणी जी का ध्यान और उनके मंत्रों का जाप करते हैं।
 
* भक्ति और श्रद्धा का पर्व: यह व्रत विशेष रूप से भक्ति और श्रद्धा का पर्व होता है, जिसमें श्रद्धालु भगवान श्री कृष्ण के साथ रुक्मिणी जी की पूजा करके अपना जीवन खुशहाल बनाने की इच्छा रखते हैं।
 
रुक्मिणी अष्टमी का त्योहार और उसके साथ जुड़ी मान्यताएं:
 
* रुक्मिणी अष्टमी को शुभ मुहूर्त में पूजा करना चाहिए।
 
* यह दिन विशेष रूप से महिलाओं के लिए है, लेकिन पुरुष भी इस दिन व्रत रख सकते हैं।
 
* व्रत में उपवास रखना और दिनभर भगवान कृष्ण की पूजा करना मुख्य होता है। 
 
* इस दिन कामदेव के अवतार प्रद्युम्न, श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र थे। इनका पूजन करना भी अतिशुभ माना जाता है। 
 
इस दिन को लेकर मंदिरों में विशेष आयोजन होते हैं, जहां भक्त बड़ी संख्या में इकट्ठा होकर भगवान श्री कृष्ण और रुक्मिणी जी की पूजा करते हैं।
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे योग धर्म ज्योतिष इतिहास पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: रुक्मिणी अष्टमी पर जानिए श्रीकृष्‍ण की पहली पत्नी के संबंध में दिलचस्प जानकारी

लेखक के बारे में
WD Feature Desk
अनुभवी लेखक, पत्रकार, संपादक और विषय-विशेषज्ञों द्वारा लिखे गए गहन और विचारोत्तेजक आलेखों का प्रकाशन किया जाता है।.... और पढ़ें

Show comments

सभी देखें

Annual Numerology 2027 : मूलांक 2 के लिए खास रहेगा नया साल, जानें पूरे वर्ष का भविष्यफल

30 October Birthday: आपको 30 अक्‍टूबर, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj Ka Rashifal: आज 30 अक्‍टूबर, 2026 का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का भविष्यफल

अंक भविष्यफल 2027 : मूलांक 1 वालों के लिए कैसा रहेगा नया साल? जानें करियर, धन और रिश्तों का हाल

धनतेरस पर क्या खरीदना माना जाता है शुभ? जानें 8 चीजों का धार्मिक महत्व

सभी देखें

01 नवंबर को महासंयोग: दिवाली से पहले रवि पुष्य योग, जानें खरीदारी का शुभ मुहूर्त और क्या खरीदना दिलाएगा धन-समृद्धि?

शुक्र का स्वयं की राशि में उदय, इन 7 राशियों को मिलेगा माता लक्ष्मी का आशीर्वाद, हो जाएंगे मालामाल

धनतेरस पर आखिर क्यों खरीदी जाती है झाड़ू? जानिए धार्मिक महत्व

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 30 अक्‍टूबर 2026: शुक्रवार का पंचांग और शुभ समय

धनतेरस पर क्यों होती है भगवान धन्वंतरि की पूजा? जानिए समुद्र मंथन की कथा

अगला लेख