sawan somwar

क्यों रखा जाता है अहोई अष्टमी का व्रत?

Updated: शनिवार, 4 नवंबर 2023 (15:17 IST)
Ahoi Ashtami 2023 Date : धार्मिक मान्यता के अनुसार अहोई अष्टमी व्रत प्रतिवर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रखते हैं। इस व्रत में शाम को तारों को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है। कैलेंडर के अनुसार इस वर्ष यह व्रत, 5 नवंबर 2023, दिन रविवार को मनाया जाएगा। 
 
क्यों रखा जाता है यह व्रत- मान्यता के अनुसार जिनके बच्चों की गर्भ में ही मृत्यु हो जाती है और उन्हें संतान सुख नहीं मिल पाता है। ऐसी महिलाएं अहोई अष्टमी पर निर्जला व्रत रखकर अहाई माता की पूजा करती हैं और सायंकाल के समय तारों को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है। 
 
कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि ही अहोई अष्‍टमी अथवा आठें कहलाती है। उत्तर भारत में अहोई अष्टमी व्रत बहुत ज्यादा प्रसिद्ध है। इस दिन माताएं अपने बच्चों की भलाई के लिए उपवास रखती हैं। मान्यतानुसार कुछ स्थानों पर सायंकाल के समय आकाश में तारों को देखने के बाद ही यह व्रत खोला जाता है, तथा कुछ महिलाएं चंद्रमा दर्शन के पश्चात ही व्रत को खोलती है। बता दें कि अहोई अष्टमी के दिन रात में चंद्रोदय बहुत देर से होता है।
 
हिन्दू धर्म के अनुसार करवा चौथ और अहोई अष्टमी महिलाओं के दो विशेष पर्व माने गए हैं और इन दोनों त्योहारों में परिवार के कल्याण की भावना होती है तथा सासू मां के चरणों को तीर्थ मानकर उनसे आशीर्वाद लेने की प्राचीन परंपरा आज भी चली आ रही है।
 
आज भी भारतीय महिलाएं जहां पौराणिक रीतिपूर्वक अहोई अष्‍टमी पर्व को मनाते हुए व्रत-उपवास करती हैं, वहीं सांस्कृतिक उमंग द्वारा उत्सव का रूप भी प्रदान करती हैं। अहोई माता का यह व्रत दीपावली से ठीक एक सप्ताह पूर्व आता है। इस दिन विशेष तौर पर मां पार्वती और अहोई माता का पूजन किया जाता हैं।

कहा जाता है इस व्रत को संतान वाली स्त्रियां करती हैं। दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि अहोई अष्टमी का व्रत छोटे बच्चों के कल्याण के लिए किया जाता है, जिसमें अहोई देवी के चित्र के साथ सेई और सेई के बच्चों के चित्र भी बनाकर पूजे जाते हैं। तथा संतान की लंबी आयु और अच्छे, सुखी जीवन की प्रार्थना की जाती है। 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं। इनसे संबंधित किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

ALSO READ: तमिल दीपावली : दक्षिण भारत में कैसे मनाया जाता है दिवाली का त्योहार

ALSO READ: November Horoscope 2023: कैसा रहेगा 12 राशियों के लिए नवंबर का महीना, पढ़ें मासिक राशिफल

Show comments

सभी देखें

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान

Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म

मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव

Rakhi 2026: कब है रक्षा बंधन का त्योहार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त?

चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय

सभी देखें

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 22 अगस्‍त 2026: शनिवार का पंचांग और शुभ समय

श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, पारण और पूर्ण पूजन विधान

शिव जी की मूर्ति से भी ज़्यादा क्यों पूजा जाता है शिवलिंग? जानिए इसके 5 गूढ़ रहस्य

रक्षाबंधन 2026: 5 त्योहार, 1 अंतरराष्ट्रीय दिवस और चंद्र ग्रहण का महासंयोग; चमकेगा इन 5 राशियों का भाग्य

मोदी चालीसा, क्या जीवित लोगों की पूजा-पाठ और कर्मकांड उचित है? जानिए हिंदु धर्म के नियम

अगला लेख