पदक से चूकने वालों को टीस दे गया बीजिंग

बीजिंग (वार्ता)| वार्ता|
बीजिंगजब पदक की बात होती है तो चौथे स्थान पर रहना ज्यादा चुभता है। इस बार भारत ने 108 वर्षों के अपने ओल‍िम्पिक इतिहास का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए बीजिंओलिम्पिखेलोमें एक स्वर्ण और दो काँस्य समेत तीन पदक जीते, लेकिन भारी मन से स्वदेश लौट रहे कई खिलाड़ी ऐसे भी हैं जो मामूली अंतर से पदक से चूक गए।

एक ओर जहाँ निशानेबाज अभिनव बिंद्रा, मुक्केबाज विजेंद्र कुमार और पहलवान सुशील कुमार ने पदक जीतकर अपना नाम भारत के खेल इतिहास में दर्ज करा लिया, वहीं साइना नेहवाल, अखिल कुमार, जितेंद्र कुमार और टेनिस जोड़ी महेश भूपति एवं लिएंडर पेस जैसे अन्य नाम भी हैं जो मामूली अंतर से पदक हासिल करने से चूक गए।

देश के लिए पदक उम्मीद और अपना पहला ओलिम्पिक खेल रही राष्ट्रीय बैडमिंटन चैंपियन साइना नेहवाल की उम्मीदों पर क्वार्टर फाइनल मुकाबले में इंडोनेशिया की मारिया क्रिस्टिन यूलियांटी ने पानी फेर दिया। विश्व रैंकिंग में साइना से तीन पायदान नीचे इंडोनेशियाई खिलाड़ी के खिलाफ मिलने वाली जीत भारतीय खिलाड़ी को काँस्य पदक दिला सकती थी।
साइना ने तो स्पर्धा में अंतिम आठ में पहुँचने के क्रम में विश्व की नंबर चार खिलाड़ी तक को रौंद दिया था। क्वार्टर फाइनल का मुकाबला हारने तक उनके भीतर जीत का जज्बा देखने लायक था। महिला तीरंदाजी टीम ने भी क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय किया।

इस बीच एक लंबे अंतराल के बाद साथ-साथ खेलने उतरे भारतीय टेनिस सितारे भूपति और लिएंडर भी पदक हासिल करने से चूक गए जब क्वार्टर फाइनल में रोजर फेडरर और स्टेनिसलास वावरिन्का की जोड़ी ने उन्हें चलता कर दिया। इस भारतीय जोड़ी से बहुतेरों की आस बँधी थी लेकिन एक बार फिर उन्हें निराशा हाथ लगी।
यदि भारतवासी बीजिंग ओलिम्पिक में बिंद्रा के स्वर्ण पदक को याद करेंगे तो इस आयोजन में भारतीय मुक्केबाजों के शानदार प्रदर्शन को भी नहीं भूला जाएगा। इस अभियान की पटकथा लिखने वाले अखिल कुमार ने प्री क्वार्टर फाइनल मुकाबले में विश्व चैंपियन सर्गेई वोदोप्यानोव को धूल चटाते हुए पदक की ओर एक सुनहरा कदम बढ़ाया था।

हालाँकि अखिल के अभियान का सबसे बड़ा रोड़ा बने माल्दोवा के वेसेस्लाव गोंजा, जिन्होंने क्वार्टर फाइनल में भारतीय मुक्केबाज की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। अखिल की हार के बाद उनके शिष्य जितेंद्र भी कुछ खास नहीं कर पाए और क्वार्टर फाइनल मुकाबले हारकर पोडियम पर खड़े होने से चूक गए।
इस बीच खेलों के इस महाकुंभ में एक दिन ऐसा भी आया जब हरियाणा के दो खिलाडियों सुशील और विजेंद्र ने व्यक्तिगत स्पर्धाओं में दो काँस्य पदक जीते। इस दिन यदि जितेंद्र भी क्वार्टर फाइनल की बाधा तोड़ पाते तो एक दिन में तीन पदक भारत की झोली में आ गिरते।

बीजिंग ओलिम्पिक में शामिल 56 सदस्यीय भारतीय दल में बहुतेरे चेहरे ऐसे भी थे जो खेलगाँव में बड़ी उम्मीदों के साथ आए, लेकिन पदक पाना तो दूर इसके करीब भी नहीं पहुँच सके। (वार्ता)



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