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प्रवासी कविता : रिश्ते पीड़ा भोगते हैं

Updated: सोमवार, 7 फ़रवरी 2022 (14:19 IST)
जब सहन करते हैं
जब मर्यादा उलांघते हैं
जब आकांक्षाएं ऊंची रखते हैं
 
जब उम्मीदों को ठुकराते हैं
जब चाल चल जाते हैं
जब ईमानदारी की चाल भूलते हैं
 
आंसू तो दे देते हैं
आंसू पोंछना भूल जाते हैं
शायद बाहर धूप में छोड़ दिए गए
और छांव में रख सहलाना भूल गए !
 
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लेखक के बारे में
रेखा भाटिया

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