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हिन्दी कविता : प्यारे दोस्त

Updated: मंगलवार, 11 अगस्त 2020 (19:35 IST)
कड़कती धूप में गन्ने का रस जैसे
सर्दियों में चाय की गरम सेंक जैसे
जैसे रसमलाई नरम जैसे पकौड़े करारे है
दोस्त मेरे बड़े प्यारे हैं, दोस्त मेरे बड़े प्यारे हैं
 
दनदनाती बारिश में छाते की तरह
उबड़-खाबड़ रास्तों में जूतों की तरह
सफ़ेदी पर जैसे रंगों की फुहारे है
दोस्त मेरे बड़े प्यारे हैं, दोस्त मेरे बड़े प्यारे हैं
 
कमियां मेरी काले धन सा छिपाते हैं
और खूबियों के तिल को ताड़ बना इतराते हैं
जिंदगी के अलबम की खूबसूरत तस्वीरें हैं
दोस्त मेरे बड़े प्यारे हैं
किस्मत की मुबारक लकीरें हैं
जमीन पर उतरे आसमां के तारे हैं...
दोस्त मेरे बड़े प्यारे हैं, दोस्त मेरे बड़े प्यारे हैं
 
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लेखक के बारे में
देवयानी एस.के.
लेखिका हिन्दी साहित्य, इतिहास, शायरी तथा सिनेमा में ख़ास रूचि रखती हैं।.... और पढ़ें

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