ramcharitmanas

कविता : चुप ही रहते हैं अक्सर

Updated: शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2020 (10:11 IST)
शोर में रहकर भी आज हम चुप्पी साधे हैं
चुप ही रहते हैं अक्सर समाचारों में क्या रखा
रोज की वही झिकझिक फिर कोई नया कांड
नेताओं के चमचे ले झंडे खड़े हो जाते चौराहे !
 
आज किसी किसान ने कर ली आत्महत्या
किसी बेटी की अस्मिता लूटी गई सामूहिक
दाह संस्कार किया गया चुपचाप फिर शोर कैसा
प्रवासी मजदूर प्रवासी हैं हक़ क्या है उनका !
 
नेताओं को अपने हक़ की लड़ाई है लड़नी
अफसरों के हक़ भी मार लिए जाते हैं
सड़कों पर भूखा मीडिया मुंह फाड़े खड़ा
घर में ही अभी सुरक्षित हैं सारे वायरसों से !
 
घुटन फ़ैल रही है भय निराशा की मानस मन में
नभ को निहारने भर से क्या चांद-तारे मिल जाएंगे
सत्य, अहिंसा के उपदेश क्या खोखले विचार हैं
परास्त समाज नारी विरुद्ध हिंसा रोकने में नाकाम !
 
किनारे खड़े हो सीमाएं तोड़ने की बात करते हैं
किस्मत को दोष दे, बेबात बेबाक पीछे हटते हैं
भय का पलड़ा ताकत पर भारी जिसे गलत आंकते
अंधकार में निशाना साध कौन काबिल बना है !
 
अथक प्रयासों से ही क्या हर जीत निश्चित है
जीत गए तो ज़ाम और हार गए तो भी ज़ाम
खुशियां जो हासिल हो जाती, होती क्षणभंगुर
नदी झरने का उफान ले भूल जाती बहने की गरिमा !
 
प्रशंसाओं के दौर में परिपक्त बन गए हैं कितने
नई तकनीकी की वायरल मिथ्या से झूठ सच में बदलता
चुप्पी साधे गवाह बन सुरक्षित हैं, हलचल दिमाग में
हचचल क्यों है, क्या चुप्पी और मौन व्रत में फर्क हैं भूले !
लेखक के बारे में
रेखा भाटिया

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

15 अगस्त विशेष: शहीदों के सपनों का भारत नारों से नहीं, हमारे चरित्र और कर्म से बनेगा

जब उम्मीद थक जाए, तब साहस काम आता है

असली पनीर और Analog Paneer में क्या है फर्क? खरीदने से पहले ऐसे करें पहचान

लोकतंत्र की पहली पाठशाला: छात्रसंघ चुनावों की वापसी क्यों जरूरी? जानें युवाओं की बड़ी जिम्मेदारी

गरीबी चुराने कोई नहीं आता!

अगला लेख