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चैत्र नवरात्रि 2021 : घटस्थापना के चौघड़िया अनुसार शुभ मुहूर्त

रविवार,अप्रैल 11, 2021
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इस माह की दिनांक 13 अप्रैल, दिन मंगलवार से चैत्र नवरात्र प्रारंभ होने जा रही है। हमारे सनातन धर्म में नवरात्रि का पर्व बड़े ही श्रद्धाभाव से मनाया जाता है। हिन्दू वर्ष में चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ, मासों में 4 बार नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है ...
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नवरात्रि में देवी दुर्गा की पूजा करने का अधिक महत्व है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रत्येक वर्ष में जब भी नवरात्रि आते हैं, देवी दुर्गा मां विभिन्न वाहनों पर सवार होकर आती हैं। इस बार 13 अप्रैल, मंगलवार से माता की आराधना का यह पर्व आरंभ हो जाएगा... ...
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देवी पुराण के अनुसार एक वर्ष में चार नवरात्र आती है। वर्ष के प्रथम महीने अर्थात चैत्र में प्रथम नवरात्रि होती है जिसे चैत्र नवरात्रि या बड़ी नवरात्रि कहते हैं। चौथे माह आषाढ़ में दूसरी नवरात्रि होती है जिसे गुप्त नवरात्रि कहते हैं। इसके बाद अश्विन ...
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देवी पुराण के अनुसार एक वर्ष में चार माह नवरात्र के लिए निश्चित हैं। वर्ष के प्रथम महीने अर्थात चैत्र में प्रथम नवरात्रि होती है जिसे चैत्र नवरात्रि या बड़ी नवरात्रि कहते हैं। चौथे माह आषाढ़ में दूसरी नवरात्रि होती है जिसे गुप्त नवरात्रि कहते हैं। ...
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नवरात्रि की अष्टमी को आठम या अठमी भी कहते हैं। नवरात्रि की अष्टमी को महाष्टमी या दुर्गाष्टमी कहते हैं जो कि बहुत ही महत्वपूर्ण होती है। इस दिन माता के आठवें रूप महागौरी की पूजा और आराधना की जाती है। कलावती नाम की यह तिथि जया संज्ञक है। मंगलवार की ...
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इस वर्ष 12 फरवरी 2021 दिन शुक्रवार से गुप्त नवरात्रि प्रारंभ होने जा रही है। नवरात्रि के यह नौ दिन मां दुर्गा की पूजा-उपासना के दिन होते हैं।
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इस वर्ष 12 फरवरी 2021 दिन शुक्रवार से गुप्त नवरात्रि प्रारंभ होने जा रही है। आइए जानते हैं कि नवरात्रि में कलश स्थापना का मुहूर्त क्या है और राशि अनुसार कैसे करें पूजन....
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गुप्त नवरात्रि केनौ दिन माता भगवती को अपराजिता का फूल अर्पित कर बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करें। आइए जानें इन 9 दिनों में क्या करें, क्या न करें...
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शुक्रवार, 12 फरवरी से माघ मास की गुप्त नवरात्रि प्रारंभ हो रही है। वर्ष में चार बार आती है नवरा‍त्रि- माघ, चैत्र, आषाढ और अश्विन माह। चैत्र माह की नवरात्रि को बसंत नवरात्रि और अश्विन माह की नवरात्रि को शारदीय नवरात्रि कहते हैं। बाकी बची दो आषाढ़ और ...
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शुक्रवार, 12 फरवरी से माघ मास की गुप्त नवरात्रि प्रारंभ हो रही है। अगर आप किसी तरह की तंत्र विद्या में न जाकर सामान्य पूजा से मनोवांछित
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मां दुर्गाजी की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री हैं। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व- ये आठ सिद्धियां होती हैं
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नवरात्रि के अंतिम दिन माता के सभी रूपों की पूजा करके हवन किया जाता है। अच्छा से मुहूर्त देखकर हवन करने से मिलेगा माता का भरपूर आशीर्वाद और लाभ।
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दुर्गा का नवम रूप सिद्धिदात्री है। जिसे नारायणी या शतावरी कहते हैं।शतावरी बुद्धि, बल एवं वीर्य के लिए उत्तम औषधि है। रक्त विकार एवं वात पित्त शोध नाशक है। हृदय को बल देने वाली महा औषधि है।
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नवरात्रि के आखिरी दिन यानी नवमी को मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती हैं। यह मां दुर्गा का नौंवा रूप हैं। कमल पर विराजमान चार भुजाओं वाली मां सिद्धिदात्री लाल साड़ी में विराजित हैं।
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मां दुर्गा का नौंवा रूप हैं सिद्धिदात्री। नवरात्रि के आखिरी दिन यानी नवमी तिथि को देवी सिद्धिदात्री की पूजा की जाती हैं। पढ़ें आरती-
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नवमी तिथि पर साधारणतया माता दुर्गा का पूजन, अर्चन, हवन किया जाता है। लेकिन इस‍ तिथि की अधिष्ठात्री देवी माता सिद्धिदात्री हैं। सभी सिद्धियों को देने वाली माता कृपालु, दयालु तथा भक्त वत्सल हैं।
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दुर्गा दुखों का नाश करने वाली देवी है। इसलिए नवरात्रि में जब उनकी पूजा आस्था, श्रद्धा से की जाती है तो उनकी नवों शक्तियां जागृत होकर नौ ग्रहों को नियंत्रित कर देती हैं। फलस्वरूप प्राणियों का कोई अनिष्ट नहीं हो पाता।
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नवरात्रि में वैसे तो नौ दिन ही हवन किया जाता है परंतु सप्तमी, अष्टमी और नवमी के दिन कई घरों में हवन करके ही व्रत का पारण किया जाता है। इसलिए यहां प्रस्तुत है महाष्टमी के दिन किए जाने वाले हवन का शुभ मुहूर्त।
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नवरात्रि में वैसे तो नौ दिन ही हवन किया जाता है परंतु सप्तमी, अष्टमी और नवमी के दिन कई घरों में हवन करके ही व्रत का पारण किया जाता है। इसलिए यहां प्रस्तुत है महानवमी के दिन किए जाने वाले हवन और पूजन का शुभ मुहूर्त।
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