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rashi mantra for gupt navratri : गुप्त नवरात्रि में पढ़ें ये विशेष मंत्र (जानिए अपनी राशिनुसार)

बुधवार,जून 24, 2020
Gupt Navratri Devi Mantra
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हिन्दू धर्म में नवरात्रि का पर्व बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, चाहे वो गुप्त नवरात्रि हो या फिर चैत्र या शारदीय नवरात्रि। इन दिनों मां दुर्गा की उपासना के महत्वपूर्ण दिन माने जाते हैं।
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लौकी और खोया का जायकेदार हलवा बनाने के लिए सबसे पहले एक कड़ाही में घी डालकर किसी हुई लौकी को हल्का भूनकर अलग रख लें। अब कड़ाही में थोड़ा-सा पानी डालें, फिर चीनी डालें।
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इडली बनाने से 1 घंटे पूर्व समा के चावल को भिगोकर रखें। तत्पश्चात उसमें आलू, हरी मिर्च व अदरक डालकर मिक्सी में पीस लें। नमक, दही डालकर घोल को 1-2 घंटे धूप में रख दें।
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दस महाविद्याओं में से एक है माता ललिता। इन्हें राज राजेश्वरी और त्रिपुर सुंदरी भी कहा जाता है। षोडशी माहेश्वरी शक्ति की विग्रह वाली शक्ति है। इनकी चार भुजा और तीन नेत्र हैं। इनमें षोडश कलाएं पूर्ण है
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गुप्त नवरात्रि तुरंत फलदायक पर्व है। कोई व्यक्ति यदि महाविद्याओं के मंत्रों को अपने शुभ गुप्त उद्देश्यों या इच्छाओं की प्राप्ति के लिए सच्चे मन से जप करता है तो उसकी सभी मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होती है।
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गुप्त नवरात्रि से जुड़ी प्रामाणिक एवं प्राचीन कथा यह है। इस कथा के अनुसार एक समय ऋषि श्रृंगी भक्तजनों को दर्शन दे रहे थे।
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सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ परम मंगलकारी है। मां दुर्गा के इस पाठ का जो मनुष्य विषम परिस्थितियों में वाचन करता है उसके समस्त कष्टों का अंत होता है।
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गुप्त नवरात्रि के दूसरे दिन मां तारा देवी की पूजा होगी। यह गुप्त नवरात्रि की दूसरी शक्ति हैं। आद्य शक्ति हैं। महाविद्या हैं। महादेवी हैं। मां के अमृतमयी दूध की शक्ति हैं।
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गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हो गई है। आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि 22 जून से शुरू होकर 29 जून 2020 तक जारी रहेगी। ज्ञात हो कि वर्ष में आदि शक्ति मां भगवती की उपासना के लिए चार नवरात्रि आती है।
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हिन्दू माह के अनुसार नवरात्रि वर्ष में चार बार आती है। यह चार माह है:- माघ, चैत्र, आषाढ और अश्विन। चैत्र माह की नवरात्रि को बड़ी नवरात्रि और अश्विन माह की नवरात्रि को छोटी नवरात्रि कहते हैं। तुलजा भवानी बड़ी माता है तो चामुण्डा माता छोटी माता है। ...
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जय अम्बे गौरी मैया जय मंगल मूर्ति। तुमको निशिदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिव री ॥टेक॥ मांग सिंदूर बिराजत टीको मृगमद को। उज्ज्वल से दोउ नैना चंद्रबदन नीको ॥जय॥ कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजै। रक्तपुष्प गल माला कंठन पर साजै ॥जय॥
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गुप्त नवरात्रि के पावन पर्व पर यहां सभी पाठकों के लिए प्रस्तुत हैं पवित्र श्री दुर्गा चालीसा। 22 जून से 29 जून तक है गुप्त नवरात्रि चलेगी, 9 बार पाठ करने से होगी हर इच्छा पूरी...
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प्रतिदिन देवी सहस्रनामावली यानी दुर्गा के 1000 नाम का जाप करना बहुत लाभदायी है। मां दुर्गा के 1000 दुर्लभ नामों का जप हमें संसार की हर आपदा से, हर संकट और विघ्नों से बचाते हैं। जीवन को वैभवशाली और ऐश्वर्यशाली बनाते हैं। श्री देवी सहस्रनामावली के इन ...
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दुर्गा नवमी पर माता को खास तरह के भोग अर्पित करके उनकी पूजा आरती करें और हो सके तो हवन करें। माता प्रसन्न होकर आपकी मनोकामना पूर्ण करेंगी। यहां माता दुर्गा को अर्पित किए जाने वाले भोग के नाम। नवरात्रि के मौके पर उन्हें प्रतिदिन इसका भोग लगाने से हर ...
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या देवी सर्वभू‍तेषु मां सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। हे मां! सर्वत्र विराजमान और मां सिद्धिदात्री के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूं। हे मां, मुझे अपनी ...
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चैत्र नवरात्रि में कई घरों में नवमी को दुर्गा माता की पूजा होती है। इस दिन राम नवमी भी होती हैं। आओ जानते हैं कि नवमी तिथि का ज्योतिष में क्या महत्व है।
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नवरात्रि के आखिरी दिन यानी नवमी को मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती हैं। यह मां दुर्गा का नौंवा रूप हैं। कमल पर विराजमान चार भुजाओं वाली मां सिद्धिदात्री लाल साड़ी में विराजित हैं।
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नवमी तिथि पर साधारणतया माता दुर्गा का पूजन, अर्चन, हवन किया जाता है। लेकिन इस‍ तिथि की अधिष्ठात्री देवी माता सिद्धिदात्री हैं।
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मां दुर्गा का नौंवा रूप हैं सिद्धिदात्री। नवरात्रि के आखिरी दिन यानी नवमी तिथि को देवी सिद्धिदात्री की पूजा की जाती हैं। पढ़ें आरती-
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