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नवरात्रि की आठवीं देवी महागौरी की पूजा विधि, भोग, मंत्र, स्वरूप और आरती

Written By WD Feature Desk
Updated: शुक्रवार, 4 अप्रैल 2025 (14:07 IST)
Maa Mahagauri Puja Vidhi : चैत्र नवरात्रि या नवदुर्गा में आठवें दिन अष्टमी की देवी मां महागौरी का पूजन किया जाता है। इसके बाद माता की पौराणिक कथा या कहानी पढ़ी अथवा सुनी जाती है। यहां जानते हैं माता महागौरी की पूजा विधि, आरती, मंत्र, भोग तथा स्वरूप सहित सबकुछ।ALSO READ: नवरात्रि में भूल कर भी ना करें ये गलतियां, माता के कोप से अनिष्ट का बनती हैं कारण
 
महागौरी का स्वरूप: नाम से प्रकट है कि इनका रूप पूर्णतः गौर वर्ण है। इनकी उपमा शंख, चंद्र और कुंद के फूल से दी गई है। अष्टवर्षा भवेद् गौरी यानी इनकी आयु आठ साल की मानी गई है। इनके सभी आभूषण और वस्त्र सफेद हैं।

इसीलिए उन्हें श्वेताम्बरधरा कहा गया है। 4 भुजाएं हैं और वाहन वृषभ है इसीलिए वृषारूढ़ा भी कहा गया है इनको। इनके ऊपर वाला दाहिना हाथ अभय मुद्रा है तथा नीचे वाला हाथ त्रिशूल धारण किया हुआ है। ऊपर वाले बाँये हाथ में डमरू धारण कर रखा है और नीचे वाले हाथ में वर मुद्रा है।
 
महागौरी की पूजा विधि:
- नवरात्रि के आठवें दिन, शक्ति स्वरूपा महागौरी का दिन होता है।
- मां की आराधना हेतु सर्वप्रथम देवी महागौरी का ध्यान करें।
- हाथ जोड़कर इस मंत्र का उच्चारण करें-
'सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यामाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥'
- इस दिन कन्या पूजन और उन्हें प्रेमपूर्वक भोजन कराने का अत्यंत महत्व है।
- सौभाग्य प्राप्‍ति और सुहाग की मंगल कामना लेकर मां को चुनरी भेंट करने का भी इस दिन विशेष महत्व है।
- इस मंत्र के उच्चारण के पश्चात महागौरी देवी के विशेष मंत्रों का जाप करें और मां का ध्यान कर उनसे सुख, सौभाग्य हेतु प्रार्थना करें।ALSO READ: चैत्र नवरात्रि में महानिशा पूजा क्या होती है, कैसे करते हैं पूजन, जानिए शुभ मुहूर्त
 
महागौरी का भोग/प्रसाद: नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी को नारियल का भोग लगाकर ब्राह्मण को दान देना चाहिए।
 
देवी महागौरी के मंत्र-
ॐ देवी महागौर्यै नमः॥
 
- श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।
 
- या देवी सर्वभू‍तेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
 
महागौरी माता की आरती: 
जय महागौरी जगत की माया।
जया उमा भवानी जय महामाया।।
हरिद्वार कनखल के पासा।
महागौरी तेरा वहां निवासा।।
चंद्रकली और ममता अंबे।
जय शक्ति जय जय मां जगदंबे।।
भीमा देवी विमला माता।
कौशिकी देवी जग विख्याता।।
हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा।
महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा।।
सती ‘सत’ हवन कुंड में था जलाया।
उसी धुएं ने रूप काली बनाया।।
बना धर्म सिंह जो सवारी में आया।
तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया।।
तभी मां ने महागौरी नाम पाया।
शरण आनेवाले का संकट मिटाया।।
शनिवार को तेरी पूजा जो करता।
मां बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता।।
भक्त बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो।
महागौरी मां तेरी हरदम ही जय हो।।
 
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