मोदी से मिले अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ, रक्षामंत्री मार्क टी एस्पर

Last Updated: मंगलवार, 27 अक्टूबर 2020 (22:06 IST)
नई दिल्ली। अमेरिकी विदेश मंत्री और रक्षामंत्री ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और उन्हें बताया कि दोनों देशों को रिश्तों को मजबूत करने के लिए लगातार मिलकर काम कर रही है। इस दौरान दोनों देशों के नेताओं के बीच क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और भारत में अमेरिका के राजदूत केन जस्टर भी इस दौरान उपस्थित थे। प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी एक बयान में कहा गया कि इस मुलाकात के दौरान अतिथि देशों के नेताओं ने अमेरिकी राष्ट्रपति का अभिवादन प्रधानमंत्री मोदी तक पहुंचाया।

बयान में कहा गया, प्रधानमंत्री ने भी फरवरी 2020 में अमेरिकी राष्ट्रपति की सफल भारत यात्रा को याद करते हुए, अपना अभिवादन अमेरिकी राष्ट्रपति को अमेरिकी प्रतिनिधियों से देने को कहा है। इससे पहले जयशंकर और सिंह ने पोम्पिओ और एस्पर के साथ तीसरे चरण की ‘टू प्लस टू’ वार्ता की।

बयान में कहा गया कि पोम्पिओ और एस्पर ने मोदी को दोनों देशों के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक और तीसरी टू+टू वार्ता के बारे में भी जानकारी दी। बयान के मुताबिक, पोम्पिओ और एस्पर ने कहा कि अमेरिकी सरकार लगातार रिश्तों को मजबूत करने के लिए भारत के साथ मिलकर काम कर रही है, जिससे कि दोनों देश अपने विजन और लक्ष्य को हकीकत में बदल सकें।

प्रधानमंत्री ने भी टू+टू वार्ता के तीसरे सफल आयोजन की प्रशंसा करते हुए हाल के वर्षों में दोनों देश के बीच विकास के लिए बढ़ रही वैश्विक रणनीतिक साझेदारी पर काफी संतोष जताया। बयान में कहा गया कि इस दौरान प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच मजबूत भरोसे, साझा मूल्य और नागरिकों के आपसी सहयोग का भी उल्लेख किया।

मालूम हो कि आज भारत और अमेरिका ने एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौता किया जिससे अत्याधुनिक सैन्य प्रौद्योगिकी, उपग्रह के गोपनीय डाटा और दोनों देशों के बीच अहम सूचना साझा करने की अनुमति होगी।

‘टू प्लस टू’ वार्ता के दौरान ‘बेसिक एक्सचेंज एंड को-ऑपरेशन एग्रीमेंट’(बीईसीए) पर दोनों रणनीतिक भागीदारों के बीच संधि ने द्विपक्षीय रक्षा और सैन्य संबंधों को आगे और प्रगाढ़ करने का संकेत दिया है। यह समझौता ऐसे वक्त हुआ है, जब पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ भारत का गतिरोध चल रहा है।

‘टू प्लस टू’ वार्ता में दोनों पक्षों ने दोनों देशों के बीच पहले से कायम करीबी संबंधों को आगे और घनिष्ठ करने तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आपसी हितों के व्यापक मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।

चीन के खिलाफ भारत का साथ : अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने कहा कि अपनी संप्रभुता और स्वतंत्रता की सुरक्षा के भारत के प्रयासों में अमेरिका उसके साथ खड़ा है। यह बातचीत मुख्य रूप से पूर्वी लद्दाख, हिंद-प्रशांत और दुनिया के अन्य हिस्सों में चीन के आक्रामक सैन्य व्यवहार से निपटने पर केंद्रित थी। चीन की कटु आलोचना करते हुए पोम्पिओ ने चीनी सेना के साथ पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में संघर्ष में भारतीय सैन्य कर्मियों के मारे जाने का उल्लेख किया और कहा कि अमेरिका और भारत न सिर्फ सीसीपी द्वारा उत्पन्न बल्कि सभी तरह के खतरों से निपटने के लिये सहयोग बढ़ाने के लिये कदम उठा रहे हैं।
पाकिस्तान को चेतावनी : भारत और अमेरिका ने मंगलवार को सीमा पार से आतंकवाद के हर प्रारूप का कड़ा विरोध किया और पाकिस्तान से कहा कि ‘‘त्वरित, स्थायी अपरिवर्तनीय’’ कार्रवाई करे ताकि सुनिश्चित हो सके कि उसके नियंत्रण के क्षेत्र का इस्तेमाल आतंकवादी हमले के लिए नहीं हो।

भारत-अमेरिका के ‘टू प्लस टू’ मंत्री स्तरीय वार्ता के तीसरे संस्करण में सीमा पार से आतंकवाद का मुद्दा उठा। वार्ता में भारत के पड़ोस और उसके पार के भी तमात सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा हुई। वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि दोनों पक्षों ने आतंकवाद की कड़ी आलोचना की और सीमा पार से आतंकवाद के हर प्रारूप की कड़ी निंदा की।

साथ ही हिज्बुल मुजाहिद्दीन, अल-कायदा और आईएसआईएस सहित सभी आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ समन्वित कार्रवाई पर बल दिया। संयुक्त बयान में कहा गया कि मंत्रियों ने पाकिस्तान से कहा कि वह त्वरित, स्थायी एवं अपरिवर्तनीय कार्रवाई करे ताकि सुनिश्चित हो सके कि उसके नियंत्रण वाले क्षेत्र का इस्तेमाल आतंकवादी हमले करने में नहीं हो और इस तरह के हमले करने वालों पर तेजी से कार्रवाई करे जिनमें 26...11 मुंबई, उरी और पठानकोट हमले के साजिशकर्ता शामिल हैं।



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