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यूसुफ पठान समेत 3 मुस्लिम सांसदों का NDA से दूरी का ऐलान: जानें 20 दिनों का पूरा सियासी गणित!

Yusuf Pathan
Yusuf Pathan NDA Meeting: पश्चिम बंगाल की राजनीति में आए हालिया उबाल और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी गुट नेशनल प्रोग्रेसिव सिटीजन्स इनिशिएटिव (NCPI) के गठन के बाद दिल्ली के सियासी गलियारों में एक नई हलचल पैदा हो गई है। टीएमसी से अलग होकर बने 20 सांसदों के समूह में शामिल तीन प्रमुख मुस्लिम सांसदों—यूसुफ पठान (बहरामपुर), अबू ताहेर खान (मुर्शिदाबाद), और खलीलुर रहमान (जंगीपुर) ने सार्वजनिक तौर पर स्पष्ट कर दिया है कि वे सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा नहीं हैं। 
 
मंगलवार को संसद परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में आयोजित एनडीए संसदीय दल की 'मंगल मिलन' बैठक से इन तीनों सांसदों ने लगातार दूसरी बार दूरी बनाई। इससे पहले 21 जुलाई को हुई पहली बैठक में भी ये तीनों अनुपस्थित रहे थे।

कुछ ही दिनों के भीतर क्या बदला?

जब टीएमसी से 20 सांसदों का समूह अलग होकर NCPI बना, तो यह माना जा रहा था कि यह पूरा गुट एनडीए के साथ मिलकर अपनी स्थिति मजबूत करेगा। हालांकि, तीन मुस्लिम सांसदों के रुख में आए इस बदलाव के पीछे मुख्य रूप से 3 बड़े कारण देखे जा रहे हैं:
  • संसदीय क्षेत्र और मतदाताओं का दबाव : तीनों सांसद (बहरामपुर, मुर्शिदाबाद और जंगीपुर) पश्चिम बंगाल के मुस्लिम बहुल इलाकों का प्रतिनिधित्व करते हैं। सूत्रों के मुताबिक, बागी गुट के एनडीए के निकट जाने की खबरों के बाद स्थानीय मतदाताओं में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली, जिसके बाद सांसदों को अपना रुख स्पष्ट करना पड़ा। 
  • मुस्लिम समुदाय के हितों की बात : सांसद अबू ताहेर खान ने मीडिया के सामने स्पष्ट किया, "हम एनडीए के साथ नहीं हैं और न ही भाजपा में शामिल होने जा रहे हैं। हम ऐसा कोई कदम नहीं उठाएंगे या समर्थन करेंगे जो मुस्लिम समुदाय के खिलाफ हो। 
  • दल-बदल विरोधी कानून का पेंच : टीएमसी के मूल 28 लोकसभा सांसदों में से दो-तिहाई (कम से कम 19 सांसद) का समर्थन बागी गुट के पास होना अनिवार्य है। यदि ये तीन सांसद अलग राह चुनते हैं, तो लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष लंबित NCPI की अलग समूह के रूप में मान्यता खतरे में पड़ सकती है। 

बैठक से दूरी पर सांसद अबू ताहेर खान का बयान

संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से बात करते हुए मुर्शिदाबाद के सांसद अबू ताहेर खान ने गठबंधन और विकास कार्यों को लेकर स्थिति साफ की: 
 
अबू ताहेर खान : "हम भाजपा या एनडीए का हिस्सा नहीं हैं, इसलिए बैठक में जाने का सवाल ही नहीं उठता। हालांकि, यदि मेरे संसदीय क्षेत्र के विकास कार्यों से जुड़ी कोई बैठक राज्य या केंद्र स्तर पर बुलाई जाती है, तो हम अपने क्षेत्र की जनता के हित के लिए उसमें जरूर शामिल होंगे।" 

NCPI गुट के अंदर दरार के संकेत

 कारक  विवरण
 समूह की कुल संख्या  20 बागी सांसद (टीएमसी से अलग हुए)
 विरोध में आए सांसद  यूसुफ पठान, अबू ताहेर खान, खलीलुर रहमान
 मुख्य चिंता  क्षेत्रीय विकास बनाम एनडीए में औपचारिक विलय
 मौजूदा स्थिति  लोकसभा अध्यक्ष के पास अलग समूह की मान्यता लंबित

यूसुफ पठान और अन्य दो मुस्लिम सांसदों के इस कदम से स्पष्ट है कि वे अपने संसदीय क्षेत्रों के राजनीतिक समीकरणों को खतरे में नहीं डालना चाहते। जहां एक ओर NCPI के नेता सुदीप बंद्योपाध्याय पार्टी में एकजुटता का दावा कर रहे हैं, वहीं तीन मुख्य सांसदों की गैरमौजूदगी ने एनडीए के साथ बागी गुट के पूर्ण विलय की संभावनाओं पर फिलहाल सवालिया निशान लगा दिया है।
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