अग्निपथ योजना के विरोध प्रदर्शन के चलते रेलवे ने रद्द कीं 612 ट्रेनें

Last Updated: मंगलवार, 21 जून 2022 (12:39 IST)
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नई दिल्ली। अग्निपथ रक्षा भर्ती योजना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के चलते ट्रेन सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं तथा इसका संचालन फिर बाधित हुआ और सोमवार को 600 से अधिक ट्रेनों को रद्द करना पड़ा। रेलवे के एक बयान के अनुसार प्रभावित 612 ट्रेनों में से 602 ट्रेनें रद्द की गईं जिसमें 223 और एक्सप्रेस ट्रेनें तथा 379 यात्री ट्रेनें शामिल हैं। 4 मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों को आंशिक रूप से रद्द किया गया।

सबसे अधिक प्रभावित जोन पूर्व मध्य रेलवे था जिसका मुख्यालय हाजीपुर में है और इसमें सोनपुर, समस्तीपुर, दानापुर, पं. दीनदयाल उपाध्याय और धनबाद डिवीजन शामिल हैं। इस जोन में,लगभग 350 ट्रेनें रद्द रहीं जिनमें इससे गुजरने वाली ट्रेनें भी शामिल हैं। दिल्ली में भारतीय युवा कांग्रेस (आईवाईसी) के कार्यकर्ताओं ने कनॉट प्लेस के पास शिवाजी ब्रिज रेलवे स्टेशन पर अग्निपथ रक्षा भर्ती योजना को वापस लेने की अपनी मांग पर जोर देने के लिए एक ट्रेन को रोक दिया।
सूत्रों ने बताया कि पुलिस और सुरक्षाकर्मियों ने रेल पटरी को खाली कराया और करीब आधे घंटे के बाद ट्रेन की आवाजाही फिर से शुरू हुई। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पुलिसकर्मियों द्वारा प्रदर्शनकारियों को पटरी और स्टेशन से हटाने की कोशिश के दौरान कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। युवा कांग्रेस अध्यक्ष श्रीनिवास बी.वी. ने कहा कि सरकार को अग्निवीर योजना को वापस लेने की जरूरत है। युवा कांग्रेस उन बेरोजगार युवाओं के लिए लड़ेगी, जो देश की सेवा करना चाहते हैं।
आईवाईसी सदस्यों ने पास के कनॉट प्लेस में भी विरोध प्रदर्शन किया। एनएफआर के एक अधिकारी ने कहा कि पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) ने 'अग्निपथ' योजना के खिलाफ हिंसक आंदोलन और असम में कई जगहों पर आई बाढ़ के कारण कम से कम 26 ट्रेनों को रद्द कर दिया है या पुनर्निर्धारित किया है।

एनएफआर के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सब्यसाची डे ने कहा कि सोमवार को रद्द की गई ट्रेनों के अलावा मंगलवार के लिए 5 अन्य ट्रेनों को भी रद्द कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि बिहार में 'अग्निपथ' के खिलाफ हिंसक आंदोलन के कारण गुवाहाटी से उत्तर की ओर जाने वाली ट्रेनों को ज्यादातर रद्द कर दिया गया या उनके कार्यक्रम में बदलाव किया गया। बिहार में प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों द्वारा कोच जलाए गए और रेलवे संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया।



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