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Last Updated: बुधवार, 14 सितम्बर 2022 (17:02 IST)

राहुल ने किया पीएम से सवाल, चीन के साथ अप्रैल 2020 की स्थिति बहाल क्यों नहीं हुई?

नई दिल्ली। कांग्रेस ने भारत और चीन की सेनाओं द्वारा पूर्वी लद्दाख के गोगरा-हॉटस्प्रिंग्स क्षेत्र में गश्त चौकी (पेट्रोलिंग प्वॉइंट) 15 पर सैनिकों की वापसी प्रक्रिया का संयुक्त सत्यापन किए जाने की पृष्ठभूमि में बुधवार को आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने चीन के साथ समझौता किया है तथा 1,000 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र उसे सौंप दिया गया है तथा चीन के साथ अप्रैल 2020 की स्थिति बहाल क्यों नहीं हुई?
 
मुख्य विपक्षी दल ने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि अप्रैल, 2020 की स्थिति बहाल क्यों नहीं हुई तथा जहां पहले भारतीय सेना गश्त करती थी, उसे 'बफर जोन' क्यों बनाया गया? कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया कि चीन ने अप्रैल, 2020 की स्थिति बहाल करने की भारत की मांग को स्वीकार करने से मना कर दिया। प्रधानमंत्री ने लड़े बिना ही चीन को 1,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र सौंप दिया। उन्होंने सवाल किया कि क्या भारत सरकार बता सकती है कि यह क्षेत्र कब वापस लिया जाएगा?
 
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि पिछले 2 दिन में पूर्वी लद्दाख के हॉट-स्प्रिंग्स क्षेत्र में पेट्रोलिंग प्वॉइंट-15 में भारत और चीन की सैन्य वापसी (डिसइंगेजमेंट) पर चर्चा हो रही है। सरकार भी शोर मचा रही है, 'चरण चुम्बक' भी शोर मचा रहे हैं, लेकिन सच्चाई भयावह है।
 
उन्होंने दावा किया कि सच्चाई यह है कि ये डिसइंगेजमेंट नहीं है, ये कॉम्प्रोमाइज (समझौता) सरकार द्वारा किया जा रहा है। ये समझ से परे है कि ये कैसा समझौता हुआ जिसमें हम पेट्रोलिंग के अपने ही अधिकार को त्याग रहे हैं। सुप्रिया ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार सेना के मनोबल को गिरा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि हम 1,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र पर अपना नियंत्रण खो चुके हैं। यह सिर्फ मोदीजी की झूठी छवि को बचाने के लिए हुआ है।
 
सुप्रिया ने दावा किया कि देश की विदेश नीति आज पूरी तरह से सस्ती लोकप्रियता की शिकार है। मोदीजी अपने महिमामंडन और झूठी छवि में इतने मशगूल हैं कि उन्हें भारत की भूभागीय अखंडता की चिंता नहीं है। उन्होंने कहा कि ये सेना का पराक्रम था कि हम ब्लैकटॉप पर थे, मोदीजी ने सेना को वहां से पीछे हटा दिया। ये सेना का पराक्रम और शौर्य था कि हम पेंगोंग झील व गलवान तक गश्त करते थे, उनको पीछे हटा लिया गया।
 
सुप्रिया ने सवाल किया कि हम जानना चाहते हैं- क्या ये महज इत्तेफाक है कि ये डिसइंगेजमेंट शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की उस बैठक से महज 2 दिन पहले हो रहा है जिसमें नरेन्द्र मोदी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ 'गलबहियां' करेंगे? क्या झूठी छवि के लिए राष्ट्रहित को ताक पर रखा जा रहा है?
 
उन्होंने यह भी सवाल किया कि अप्रैल, 2020 की स्थिति की बहाली का क्या हुआ? जिस स्थान पर भारत की सेना पहले गश्त करती थी, उसे 'बफर जोन' क्यों बनाया गया? कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि अब मोदीजी को अपना चीन-प्रेम छोड़ना होगा और उन्हें देश को जवाब देना होगा। प्रधानमंत्री मोदी को एससीओ की बैठक के समय चीन के समक्ष यह विषय उठाना चाहिए, लेकिन उनकी कथनी और करनी में अंतर को देखकर लगता नहीं है कि वे ऐसा करेंगे।
 
उल्लेखनीय है कि भारत और चीन की सेनाओं ने पूर्वी लद्दाख में गोगरा-हॉटस्प्रिंग्स क्षेत्र में गश्त चौकी (पेट्रोलिंग प्वॉइंट) 15 पर सैनिकों की वापसी प्रक्रिया का संयुक्त सत्यापन किया है। इससे पहले दोनों देशों की सेनाओं ने वहां टकराव वाले बिंदु से अपने सैनिकों को वापस हटाने के साथ अस्थायी बुनियादी ढांचे को खत्म किया था। यह जानकारी अधिकारियों ने मंगलवार को दी। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने चरणबद्ध और समन्वित तरीके से सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया को पूरा किया।(भाषा)
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