बसपा अपने बलबूते लड़ेगी उप्र में उपचुनाव, सपा से गठबंधन का भविष्य सवालों के घेरे में

Last Updated: सोमवार, 3 जून 2019 (23:56 IST)
नई दिल्ली। बसपा की अध्यक्ष मायावती ने लोकसभा चुनाव में सपा के साथ से पार्टी को कोई लाभ नहीं होने पर अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए उत्तरप्रदेश में विधानसभा की कुछ सीटों पर संभावित उपचुनाव अपने बलबूते चुनाव लड़ने की बात कहकर उत्तरप्रदेश में सपा-बसपा गठबंधन के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि बसपा अब गठबंधनों पर निर्भरता खत्म कर आगामी उपचुनाव खुद लड़ेगी।
लोकसभा चुनाव के परिणाम की समीक्षा के लिए सोमवार को उत्तरप्रदेश के पार्टी पदाधिकारियों और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की बैठक में मायावती ने बसपा का संगठनात्मक ढांचा मजबूत करने की जरूरत पर बल देते हुए पार्टी पदाधिकारियों को उपचुनाव की तैयारियां तेज करने को कहा है। इस बीच सपा की ओर से इस बारे में बसपा के रुख की आधिकारिक घोषणा होने तक कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की गई है।
उल्लेखनीय है कि उत्तरप्रदेश में भाजपा के 9 और सपा-बसपा के 1-1 विधायक के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद राज्य की 11 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होंगे। बसपा हालांकि अब तक उपचुनाव नहीं लड़ती थी। इसके मद्देनजर मायावती का यह निर्देश अहम माना जा रहा है। लोकसभा चुनाव में बसपा को 10 और सपा को महज 5 सीटें ही मिल सकीं। 16वीं लोकसभा के चुनाव में बसपा 1 भी सीट नहीं जीत सकी थी।

सूत्रों के अनुसार मायावती ने लोकसभा चुनाव में गठबंधन की सहयोगी सपा का यादव वोटबैंक बसपा के पक्ष में स्थानांतरित नहीं होने की दलील देते हुए बैठक में मौजूद पार्टी पदाधिकारियों से कहा कि अब गठबंधनों पर निर्भर रहने के बजाय पार्टी का संगठन मजबूत कर बसपा अपने बलबूते चुनाव लड़ेगी। लोकसभा चुनाव में बसपा को जिन सीटों पर कामयाबी मिली उसमें सिर्फ पार्टी के परंपरागत वोटबैंक का ही योगदान रहा।
सूत्रों के अनुसार उन्होंने गठबंधन का अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने के लिए सपा अध्यक्ष अखिलेख यादव की पारिवारिक कलह को भी प्रमुख वजह मानते हुए कहा कि इस कारण से अखिलेश के पारिवारिक सदस्य भी चुनाव नहीं जीत सके। ने यादवों के वोट सपा के पक्ष में एकजुट नहीं हो पाने को इसकी वजह बताया।
गौरतलब है कि कन्नौज में अखिलेश की पत्नी डिम्पल यादव और दोनों चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव बदायूं तथा अक्षय यादव फिरोजाबाद से भाजपा उम्मीदवारों से चुनाव हार गए।

समझा जाता है कि मायावती ने सपा से अलग हुए प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (प्रसपा) अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव की वजह से भी गठबंधन को चुनाव में नुकसान होने की बात कही। शिवपाल के अलग चुनाव लड़ने के कारण सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के परिवार के सदस्य भी चुनाव हार गए। उन्होंने माना कि चुनाव में पारिवारिक कलह का नुकसान गठबंधन को उठाना पड़ा।
बहरहाल, मायावती ने अखिलेश यादव की सपा के साथ गठबंधन के भविष्य को लेकर सीधे कोई बातचीत नहीं की और पार्टी कार्यकर्ताओं से महज इतना कहा कि जब तक उनका पारिवारिक विवाद समाप्त नहीं हो जाता, तब तक 'देखो एवं प्रतीक्षा करो' की नीति अपनाई जाए। बसपा के सूत्रों ने यह जानकारी दी। एक सूत्र ने कहा कि न तो उन्होंने सपा या अखिलेश की आलोचना की और न ही यह कहा कि गठबंधन खत्म हो गया या समाप्तप्राय है।
इस बीच सपा के प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने लखनऊ में कहा कि लोकसभा चुनाव परिणाम की समीक्षा और सपा से गठबंधन के बारे में बसपा के रुख की आधिकारिक जानकारी मिलने तक सपा कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं करेगी।

सूत्रों के अनुसार दिल्ली स्थित बसपा कार्यालय में हुई बैठक में पार्टी की उत्तरप्रदेश इकाई के अध्यक्ष आरएस कुशवाहा, राज्य में पार्टी के सभी विधायक, नवनिर्वाचित सांसद, प्रदेश के सभी जोनल को-ऑर्डिनेटर के अलावा सभी जिला अध्यक्षों को भी बुलाया गया था।
समीक्षा बैठक में मायावती ने लोकसभा चुनाव के दौरान लोकसभा चुनाव में गठबंधन को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने के लिए बसपा द्वारा गठित की गई भाईचारा समितियों का विस्तार प्रत्येक जिले में करने को कहा है। बैठक में शामिल पार्टी के एक नेता ने बताया कि बसपा की उत्तरप्रदेश इकाई के अध्यक्ष कुशवाहा को मध्यप्रदेश का प्रभारी बनाया गया है।

ज्ञात हो कि चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन से नाराज मायावती ने शनिवार की बैठक में 2 राज्यों- मध्यप्रदेश और दिल्ली के बसपा अध्यक्षों सहित 6 राज्यों के पार्टी प्रभारियों को पद से हटा दिया था। इनमें कुशवाहा भी शामिल थे। उन्हें उत्तराखंड के प्रभारी पद से हटाकर मायावती ने एएल तोमर को राज्य का नया प्रभारी बनाया था।



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