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  4. loan moratorium : supreme court verdict refuses to interfere with the government and rbi loan policy
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पुनः संशोधित मंगलवार, 23 मार्च 2021 (13:18 IST)

मोराटोरियम अवधि में नहीं होगी दंडात्मक ब्याज की वसूली, और राहत से भी इंकार

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को निर्देश दिया कि 6 महीने की ऋण किस्त स्थगन अवधि के लिए उधारकर्ताओं से कोई चक्रवृद्धि या दंडात्मक ब्याज नहीं लिया जाएगा और यदि पहले ही कोई राशि ली जा चुकी है, तो उसे वापस जमा या समायोजित किया जाएगा। हालांकि शीर्ष अदालत ने मोराटोरियम अवधि बढ़ाने से भी मना कर दिया।
 
कोरोनावायरस (Coronavirus) महामारी के मद्देनजर पिछले साल ऋण किस्त स्थगन की घोषणा की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने ने 31 अगस्त 2020 से आगे ऋण किस्त स्थगन का विस्तार नहीं करने के केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कहा कि यह एक नीतिगत निर्णय है।
 
न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि शीर्ष न्यायालय केंद्र की राजकोषीय नीति संबंधी फैसले की न्यायिक समीक्षा तब तक नहीं कर सकता है, जब तक कि यह दुर्भावनापूर्ण और मनमाना न हो। लेकिन, शीर्ष अदालत ने ट्रेडर एसोसिएशन और अपील को ठुकराते हुए मोराटोरियम अवधि बढ़ाने से भी मना कर दिया।

शीर्ष न्यायालय ने कहा कि वह पूरे देश को प्रभावित करने वाली महामारी के दौरान राहत देने के संबंध में प्राथमिकताओं को तय करने के सरकार के फैसले में हस्तक्षेप नहीं कर सकती है।
 
पीठ ने रियल एस्टेट और बिजली क्षेत्रों के विभिन्न उद्योग संगठनों द्वारा दायर की गई याचिकाओं पर अपने फैसले में यह बात कही। इन याचिकाओं में महामारी को देखते हुए ऋण किस्त स्थगन की अवधि और अन्य राहत उपायों को बढ़ाने की मांग की गई थी।
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