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कश्मीर के DGP ने किया जैश ए मोहम्मद के खुफिया प्लान का खुलासा, दिल्ली को दहलाने की रच रहा है साजिश

Updated: सोमवार, 15 फ़रवरी 2021 (09:05 IST)
जम्मू। जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक (DGP) दिलबाग सिंह ने रविवार को कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के कार्यालय का वीडियो बनाने वाले एक आतंकवादी की गिरफ्तारी के बाद यह पता चला है कि पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद दिल्ली में हमले की साजिश रच रहा है।

डीजीपी सिंह ने यह खुलासा भी किया कि कश्मीर में आतंकवादियों ने बिहार से हथियारों की खरीद शुरू कर दी है और कश्मीर के कुछ छात्र जो पढ़ाई के लिए पंजाब में रहते हैं, उनके जरिए घाटी में अवैध हथियारों की तस्करी की जा रही है।

डीजीपी ने आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-मुस्तफा (एलईएम) के आतंकवादी हिदायतुल्ला और रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) के आतंकवादी जहूर अहमद राथर की गिरफ्तारी के बाद संवाददाता सम्मेलन में ये खुलासे किए। मलिक को जम्मू जिले के कुंजवानी से छह फरवरी को अनंतनाग पुलिस ने गिरफ्तार किया था। राथर को सांबा जिले के ब्रह्माना इलाके से 13 फरवरी को पकड़ा गया था।

सिंह ने बताया कि एलईएम और टीआरएफ पाकिस्तान के जैश-ए-मोहम्मद तथा लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटा संगठन हैं जिनका उद्देश्य अपनी आतंकवादी गतिविधियों को कश्मीरी नाम देना है। उन्होंने कहा, पिछले वर्ष अगस्त में गठित एलईएम की अगुवाई मलिक कर रहा है, वह लंबे समय से सक्रिय आतंकवादी है। वह जैश के लिए काम करता रहा है और उस आतंकवादी संगठन के कहने पर ही उसने यह संगठन बनाया।

सिंह ने बताया कि मलिक जम्मू में ठिकाना बनाने की साजिश रच रहा था ताकि क्षेत्र में आतंकवादी गतिविधियों को संचालित कर सके, वे हथियार एवं गोलाबारूद हासिल कर सकें, जिन्हें सीमा पर भूमिगत सुरंगों के जरिए पाकिस्तान से तस्करी करके लाया गया या ड्रोन के जरिए गिराया गया, जहां से इन्हें तस्करी के जरिए कश्मीर ले जाया जाता।

सिंह ने कहा कि जैश 2018 में विभिन्न आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त रहा है। उन्होंने बताया कि मलिक से पूछताछ में पता चला कि वह जैश के कमांडर आशिक नेंगरू का करीबी है। नेंगरू अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भूमिगत सुरंग के जरिए अपने परिवार समेत पड़ोसी देश भाग गया था, हालांकि इससे पहले वह पाकिस्तान से जम्मू आने वाले हथियारों की खेप लेता था। बीएसएफ ने बीते छह माह में जम्मू क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर छह भूमिगत सुरंगों का पता लगाया है।

डीजीपी ने बताया कि पाकिस्तान भागने से पहले नेंगरू उर्फ डॉक्टर पाकिस्तानी एजेंसियों के इशारे पर कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियां चला रहा था। उन्होंने बताया कि मलिक नेंगरू के आदेश पर ही दिल्ली गया था और उसने एनएसए कार्यालय की रेकी करने के बाद उसे वह वीडियो भेजा था।

उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह है कि जैश दिल्ली में भी हमले की साजिश रच रहा था। उन्होंने कहा कि मलिक की गिरफ्तारी पुलिस के लिए बड़ी कामयाबी है और इससे आतंकवादी समूह की साजिश का पर्दाफाश हुआ है।
डीजीपी ने बताया कि दक्षिण कश्मीर के रहने वाले मलिक ने बिहार से हथियार पाने के लिए एक नेटवर्क बनाया था और वहां से उसने अब तक छह पिस्तौल मंगवाई, जिन्हें आतंकवादियों के बीच बांट दिया।
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सिंह ने कहा, उसने पंजाब में पढ़ने वाले कश्मीर के कुछ छात्रों को भी अपने साथ शामिल कर लिया। वह कश्मीर और जम्मू में किसी भी तरह की गतिविधि और बाहर से हथियारों को लाने के लिए उनका इस्तेमाल कर रहा था।
इस संदर्भ में डीजीपी ने चंडीगढ़ में अध्ययनरत नर्सिंग के कश्मीरी छात्र का जिक्र किया, जिसे जम्मू जनरल बस स्टैंड इलाके से सात किलो विस्फोटक के साथ गिरफ्तार किया गया था।

डीजीपी ने कहा कि मलिक बीते नवंबर में एक बैंक के नकदी ले जाने वाले वाहन से 60 लाख रुपए की लूट की घटना में भी लिप्त था। उन्होंने बताया कि इसका खुलासा उसकी पत्नी समेत लूट में शामिल उसके चार साथियों की गिरफ्तारी के बाद हुआ था।
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टीआरएफ के आतंकवादी राथर की गिरफ्तारी को एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए सिंह ने कहा कि वह पाकिस्तान में प्रशिक्षण प्राप्त आतंकवादी है और उसके साथी आतंकवादी उसे साहिल और खालिद कहकर भी संबोधित करते हैं।
पुलिस महानिदेशक ने बताया, 2002 में पाकिस्तान जाने से पहले वह सक्रिय आतंकवादी था। वहां उसने हथियारों का प्रशिक्षण लिया और फिर राजौरी के रास्ते पांच विदेशी आतंकवादियों के साथ लौटा।

उन्होंने कहा, हालांकि, उसने 2006 में आत्मसमर्पण कर दिया और 2019 में गतिविधियां फिर शुरू करने से पहले वर्षों तक निष्क्रिय बना रहा।उन्होंने बताया कि राथर ने कश्मीर में बहुत बड़ा नेटवर्क बना लिया था और उसके खुलासे पर अब तक समूह के आठ सदस्यों की पहचान कर ली गई है। कुछ को गिरफ्तार किया गया है, जिनसे कश्मीर में पूछताछ चल रही है।

सिंह ने कहा कि चूंकि राथर पहले आत्मसमर्पण कर चुका था इसलिए सुरक्षा एजेंसियों को उस पर संदेह नहीं हुआ। टीआरएफ प्रमुख कुलगाम में तीन भाजपा कार्यकर्ताओं और कोकेरनाग में एक पुलिसकर्मी की हत्या की घटना में सीधे तौर पर शामिल था। डीजीपी ने कहा कि राथर से अभी पूछताछ चल रही है, जिसमें कई नई बातें पता चल सकती हैं। सिंह ने तीन सफल अभियानों के लिए पुलिसकर्मियों की सराहना की।(भाषा)

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