आतंक के पर्याय काले पन्नों में सिमटे, काशी दे रही है अपने गौरव को नई भव्यता : मोदी

पुनः संशोधित मंगलवार, 14 दिसंबर 2021 (00:49 IST)
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वाराणसी। भारत की सभ्यतागत धरोहर की जीवटता की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां सोमवार को कहा कि औरंगजेब जैसे आततायियों ने काशी को ध्वस्त करने के प्रयास किए, लेकिन आतंक के वे पर्याय इतिहास के ‘काले पन्नों’ तक सिमटकर रह गए, जबकि प्राचीन नगरी काशी अपने गौरव को फिर से नई भव्यता दे रही है।

का करने के बाद मोदी ने अपने भाषण में कहा कि भारत सदियों की गुलामी से उत्पन्न हीनभावना से बाहर निकल रहा है। साथ ही उन्होंने विस्तृत एवं नये काशी गलियारा का उल्लेख करते हुए कहा कि काशी विश्वनाथ धाम का लोकार्पण, देश को एक निर्णायक दिशा देगा तथा इसे एक उज्ज्वल भविष्य की तरफ ले जाएगा।
पवित्र नगरी, जो उनका संसदीय क्षेत्र भी है, में पहुंचने के बाद मोदी ने काल भैरव मंदिर में पूजा-अर्चना की और फिर गंगा में डुबकी लगाई, जहां से उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए गंगाजल भरा। शाम को उन्होंने एक क्रूज नौका पर से भव्य गंगा आरती देखी। नौका पर भारतीय जनता पार्टी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी थे। आतिशबाजी से आसमान जगमगा गया।
औरंगजेब, सालार और हेस्टिंग्स का उल्लेख : मोदी ने भाषण में देश के एक नया इतिहास रचने का उल्लेख करते हुए मुगल शासक औरंगजेब, मुस्लिम आक्रांता सालार मसूद और ब्रिटिश गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्स का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कितनी ही सल्तनतें उठीं और मिट्टी में मिल गईं, लेकिन बनारस बना हुआ है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यहां अगर औरंगजेब आता है तो शिवाजी भी उठ खड़े होते हैं! अगर कोई सालार मसूद इधर बढ़ता है, तो राजा सुहेलदेव जैसे वीर योद्धा उसे हमारी एकता की ताकत का अहसास करा देते हैं। और अंग्रेजों के दौर में भी, वारेन हेस्टिंग्स का क्या हश्र काशी के लोगों ने किया था, ये तो काशी के लोग जानते ही हैं। आततायियों ने इस नगरी पर आक्रमण किए, इसे ध्वस्त करने के प्रयास किए!
मोदी ने कहा कि औरंगजेब के अत्याचार, उसके आतंक का इतिहास साक्षी है... जिसने सभ्यता को तलवार के बल पर बदलने की कोशिश की, जिसने संस्कृति को कट्टरता से कुचलने की कोशिश की! लेकिन इस देश की मिट्टी बाकी दुनिया से कुछ अलग है। प्रधानमंत्री ने कई बार ‘हर-हर महादेव’ का उद्‍घोष किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देखिए, कैसे समय बदल गया। आज, आंतक के पर्याय रहे लोग इतिहास के काले पन्नों तक सिमटकर रह गए, जबकि काशी आगे बढ़ रही है और वह अपने गौरव को फिर से नई भव्यता दे रही है। उन्होंने कहा कि जब कभी नगर किसी नई दिशा में बढ़ा है, देश का भाग्य भी बदल गया है।
कई इतिहासकारों का मानना है कि औरंगजेब ने मंदिर को ध्वस्त कर एक मस्जिद बनाने का आदेश दिया था। मोदी ने मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए रानी अहिल्याबाई होल्कर और मंदिर के शिखर पर स्वर्ण परत (प्लेटिंग) चढ़ाने को लेकर सिख शासक महाराजा रणजीत सिंह की सराहना की।
मोदी ने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम का पूरा परिसर महज एक भव्य भवन नहीं है, बल्कि भारत की सनातन संस्कृति, इसकी आध्यात्यिमक आत्मा और परंपरा का प्रतीक है।
मोदी ने भव्य मंदिर परिसर के निर्माण कार्य में शामिल श्रमिकों का भी आभार प्रकट करते हुए कहा कि कोविड-19 महामारी भी उन्हें काम करने से नहीं रोक सकी। उन्होंने उनसे मुलाकात की और उन पर फूल बरसाए और बाद में उनके साथ भोजन भी किया।

प्रधानमंत्री की इस यात्रा पर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने तंज किया, जिनकी समाजवादी पार्टी (सपा) उत्तर प्रदेश में मुख्य विपक्षी दल है, जहां तीन महीने से भी कम समय में विधानसभा चुनाव होना है। राज्य में अभी भाजपा सत्ता में है।
मंदिर परिसर में अपने भाषण में मोदी ने कहा कि यदि भारत राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम बना रहा है तो वह समुद्र में हजारों किमी लंबी ऑप्टिकल फाइबर भी बिछा रहा है, गरीबों के लिए लाखों मकान बना रहा है और लोगों को अंतरिक्ष में भेज रहा है। उन्होंने बौद्ध और सिख तीर्थयात्रा केंद्रों के लिए किए गए कार्य का भी उल्लेख किया।

मोदी ने काशी विश्वनाथ धाम का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्राचीन और नवीनता का समन्वय है। उन्होंने कहा कि यह परिसर, साक्षी है हमारे सामर्थ्य का, हमारे कर्तव्य का। अगर सोच लिया जाए, ठान लिया जाए, तो असंभव कुछ भी नहीं।
उन्होंने कहा कि विध्वंसकारियों की ताकत भारत की शक्ति और भक्ति से कभी बड़ी नहीं हो सकती। हम जिस तरह से खुद को देखेंगे, दुनिया भी हमें उसी तरह से देखेगी। प्रधानमंत्री ने लोगों से स्वच्छता, सृजन और आत्मनिर्भर भारत के लिए निरंतर प्रयास करने की भी अपील की।

उन्होंने कहा कि इस अमृत काल में, आजादी के 75वें वर्ष में, हमें देश की आजादी के 100 बरस पर दिखने वाले भारत के लिए काम करना होगा। प्रधानमंत्री ने इससे पहले कहा कि काशी विश्वनाथ मंदिर क्षेत्र सिर्फ 3,000 वर्ग फुट था जो अब बढ़कर करीब 5 लाख वर्गफुट हो गया है।
मोदी ने काशी के गौरव का उल्लेख करते हुए कहा कि यह नगर अविनाशी है और यह भगवान शिव के संरक्षण में है। उन्होंने भाषण के बीच में स्थानीय बोली का भी उपयोग किया। प्रधानमंत्री का काफिला जब शहर की गलियों से गुजर रहा था, तब लोगों ने ‘हर हर महादेव’ का उदघोष किया। मोदी अभिनंदन स्वीकार करने के लिए एक स्थान पर रुके भी।




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