JNU कांड : कन्हैया को जमानत के साथ कोर्ट ने दी नसीहत

नई दिल्ली| Last Updated: गुरुवार, 3 मार्च 2016 (00:58 IST)
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नई दिल्ली। ने बुधवार को जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष को छह महीने की अंतरिम मंजूर की लेकिन कहा कि परिसर के एक कार्यक्रम के संबंध में दर्ज प्राथमिकी से लगता है, ‘यह राष्ट्रविरोधी नारे लगाने का मामला है जिसका राष्ट्रीय एकता के लिए खतरा पैदा करने का प्रभाव है।’
कन्हैया को सशर्त राहत देने वाले उच्च न्यायालय ने कहा कि वह ‘ऐसी किसी गतिविधि में सक्रिय या निष्क्रिय रूप से हिस्सा नहीं लेंगे जिसे राष्ट्रविरोधी कहा जाए।’ उच्च न्यायालय ने उनके जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष होने के नाते आदेश दिया कि वह कैंपस में राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को रोकने के लिए अपने सभी अधिकार के तहत प्रयास करेंगे।
 
अदालत ने अन्य आरोपियों सहित छात्रों द्वारा कथित रूप से की गई नारेबाजी के बारे में कड़ी टिप्पणियां कीं और कहा कि वे अभिव्यक्ति की मौलिक आजादी के तहत संरक्षण का दावा नहीं कर सकते, खासकर इस तथ्य को देखते हुए कि इस मामले की जांच शुरुआती चरण में है।
 
न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी ने संसद पर हमले के अभियुक्त अफजल गुरू और एक यात्री विमान हाईजैक करने के मास्टरमाइंड मकबूल भट्ट की तस्वीरों और पोस्टरों के साथ कैंपस में छात्रों द्वारा हुए विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी के तरीके पर भी तीखी आपत्ति व्यक्त की। भट्ट को 1984 में फांसी दी गई थी।
 
कन्हैया की अंतरिम जमानत के लिए शर्तें निर्धारित करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा कि 10,000 रूपए की जमानत राशि और जमानतदार देना होगा और इस शर्त से संतुष्ट करना होगा कि वह अदालत की अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेंगे।
 
न्यायाधीश ने कहा, ‘नारेबाजी में जिस तरह का विरोध हुआ या भावनाएं जाहिर की गई उस पर छात्र समुदाय को आत्म अवलोकन करने की जरूरत है, जिनकी अफजल गुरू और मकबूल भट्ट की तस्वीरें और पोस्टर थामे तस्वीरें रिकार्ड पर उपलब्ध हैं।’ न्यायाधीश ने कन्हैया की पारिवारिक पृष्ठभूमि पर भी विचार किया। उनकी मां आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के तौर पर महज 3000 रुपए कमाती हैं और परिवार में अकेली कमाने वाली हैं।
 
न्यायाधीश ने निर्देश दिया कि आरोपी के जमानतदार संकाय के सदस्य या उनसे जुड़े हुए ऐसे व्यक्ति होने चाहिए जो उन पर न सिर्फ अदालत में पेशी के मामले में नियंत्रण रखता हो, बल्कि यह भी सुनिश्चित करने वाला होना चाहिए जो उनकी सोच और ऊर्जा सकारात्मक चीजों में लगाना सुनिश्चित करे।
 
जमानत के लिए राशि जमा करने में वित्तीय छूट देते हुए उच्च न्यायालय ने कहा कि कन्हैया को इस संबंध में एक शपथ पत्र देना होगा कि वह सक्रिय या निष्क्रिय रूप से ऐसी किसी भी गतिविधि में हिस्सा नहीं लेंगे, जिसे राष्ट्रविरोधी कहा जाए। 
 
सुनवाई के दौरान अदालत ने हिन्दी फिल्म ‘उपकार’ के देशभक्ति गीत का हवाला देते हुए यह बात रखी कि परिसर में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। न्यायाधीश ने जमानत आदेश की शुरुआत में कहा, ‘रंग हरा हरिसिंह नलवे से, रंग लाल है लाल बहादुर से, रंग बना बसंती भगत सिंह, रंग अमन का वीर जवाहर से, मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती, मेरे देश की धरती।’
 
इस बीच अदालत ने कहा कि कन्हैया ने उस जगह पर अपनी उपस्थिति स्वीकार की है जहां राष्ट्रविरोधी नारे लगाए गए थे लेकिन ‘सीमित विवाद’ को लेकर इस बात की जांच की जानी है कि वह कथित देश विरोधी क्रियाकलापों में ‘सक्रिय रूप से शामिल’ था या नहीं। (भाषा)



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