...तो 2 साल तक हिरासत में रहेंगे पूर्व मुख्‍यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, केंद्र सरकार ने लगाया है सेफ्टी एक्ट

Last Updated: सोमवार, 16 सितम्बर 2019 (12:48 IST)
नई दिल्ली। अनुच्छेद से जुड़ी एक याचिका की सुनवाई के दौरान तमिलनाडु के नेता और एमडीएमके के संस्थापक वाइको के वकील ने में कहा कि के पूर्व मुख्‍यमंत्री फारूक अब्दुल्ला की नजरबंदी पर केंद्र सरकार अलग-अलग बातें कर रही है। सुप्रीम कोर्ट में अब्दुल्ला की हिरासत को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा कि फारूक अब्दुल्ला पर लगाया गया है।
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वाइको के वकील ने कहा कि ऐसे में तो किसी भी व्यक्ति को बिना सुनवाई 2 साल तक हिरासत में रखा जा सकता है। वाइको की याचिका पर प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एसए बोबड़े एवं न्यायमूर्ति एसए नजीर की पीठ ने केंद्र और राज्य को नोटिस जारी किया है।
5 अगस्त से फारूक अपने घर में क्यों नजरबंद हैं, इस सवाल पर केंद्र के वकील ने सुप्रीम कोर्ट को कहा कि उन्हें पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत हिरासत में रखा है।

वाइको ने अब्दुल्ला के लिए याचिका (हैबियस कार्पस) दायर की है। याचिका में कहा गया है कि फारूक उनके निमंत्रण पर 15 सितंबर को चेन्नई में होने वाले अन्नादुरई के 111वीं जन्मशताब्दी समारोह में शामिल होने के लिए तैयार हो गए थे, लेकिन अभी उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। वाइको का कहना है कि अब्दुल्ला को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया है।

उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर को विशेषाधिकार देने वाले अनुच्छेद 370 हटाने के बाद पूर्व मुख्‍यमंत्री फारूक अब्दुल्ला समेत कश्मीर के कई नेताओं को नजरबंद रखा गया है। इनमें पूर्व मुख्‍यमंत्री महबूबा मुफ्ती एवं उमर अब्दुल्ला भी शामिल हैं।

 

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