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डोमिसाइल कानून में बदलाव पर कहीं खुशी-कहीं गम, सभी ने नए आंदोलन का किया आगाज

सुरेश एस डुग्गर
शनिवार, 4 अप्रैल 2020 (17:58 IST)
जम्मू। केंद्र सरकार ने शुक्रवार रात को अपने 2 दिन पुराने आदेश में बदलाव किया और जम्मू कश्मीर में सारी नौकरियों को केंद्रशासित क्षेत्र के मूल निवासियों (डोमिसाइल) के लिए आरक्षित कर दिया जो राज्य में कम से कम 15 साल रह रहे हैं। बुधवार को डोमिसाइल के लिए नियम तय करते हुए सरकार ने केवल समूह 4 तक के लिए नौकरियां आरक्षित की थीं। केंद्र द्वारा किए गए इस संशोधन पर कहीं खुशी और कहीं गम का माहौल है। यही नहीं राजनीतिक दलों ने इसे आधी जीत बताते हुए आंदोलन को और आगे ले जाने की बात कही है।

दरअसल कश्मीर के राजनीतिक दल अब यह मांग कर रहे हैं कि डोमिसाइल कानून में उस श्रेणी को हटाया जाए जिसके अनुसार, 7 साल तक प्रदेश में पढ़ने वाले भी निवासी होने के हकदार होंगें। दरअसल स्थानीय राजनीतिक दलों की तीखी प्रतिक्रिया के बाद जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (राज्य कानूनों का अनुकूलन) आदेश-2020 लाते हुए केंद्र शासित प्रदेश के डोमिसाइल के लिए नौकरियां आरक्षित कर दी गई थीं।

संशोधित अधिसूचना में कहा गया है, कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के तहत किसी भी पद पर नियुक्ति के उद्देश्य के लिए उपयुक्त शर्तें पूरी करने वाला कोई भी व्यक्ति केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर का डोमिसाइल होगा। इससे पहले सरकार ने बुधवार को एक गजट अधिसूचना जारी की थी जिसमें जम्मू कश्मीर के 138 कानूनों में कुछ संशोधनों की घोषणा की गई थी।

इनमें केंद्र शासित प्रदेश के मूल निवासियों को ही समूह-4 तक की नौकरियां देने संबंधी संशोधन भी शामिल था, पर केंद्र के इस संशोधन ने सभी को खुशी नहीं दी है। सिवाय प्रदेश भाजपा के कोई भी पक्ष खुश नहीं है। यही कारण था कि जम्मू कश्मीर अपनी पार्टी के अध्यक्ष अल्ताफ बुखारी ने डोमिसाइल में संशोधन के बाद उन्होंने लोगों को यह विश्वास दिलाया कि जब तक डोमिसाइल में शामिल अन्य खामियों को दूर कर केंद्र यह कानून जम्मू कश्मीर के लोगों की आकांक्षाओं के मुताबिक नहीं बनाती, उनका प्रयास जारी रहेगा।

बुखारी ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके निजी हस्तक्षेप की वजह से ही इतने कम समय में कानून में संशोधन संभव हो पाया। उन्होंने कहा कि गृहमंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने जम्मू कश्मीर के युवाओं के आरक्षण की बात को समझा और नौकरियों में उनके अधिकारों को संरक्षित कर बहुत बड़ी राहत दी है। उन्होंने दोनों की सराहना करते हुए कहा कि समय पर उनके द्वारा किए गए हस्तक्षेप से ही यह संभव हो पाया।

बुखारी ने जम्मू कश्मीर के लोगों विशेषकर युवाओं के एक सांझा मुद्दे पर एकजुट होने के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता भी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह पहली बार था जब जम्मू और कश्मीर डिवीजन के लोग एक ही मुद्दे पर बात कर रहे थे। इससे यह स्पष्ट हो गया कि जम्मू कश्मीर के युवा भी नए कानून से खुश नहीं थे। वे नहीं चाहते थे कि जम्मू कश्मीर की नौकरियों, जिन पर उनका अधिकार है, कोई दूसरे राज्य का आदमी सांझा करे। बुखारी ने अपील की कि डोमिसाइल कानून में और भी कई कमियां हैं, जिसे दूर करने की जरूरत है, ऐसे में लोगों में एकता की भावना तब तक रहनी चाहिए जब तक इन सभी खामियों को दूर नहीं किया जाता।

अन्य राजनीतिक दलों की ही तरह अपनी पार्टी के अध्यक्ष ने इसके खिलाफ अपनी मुहिम जारी रखने का ऐलान किया। जम्मू कश्मीर में निवास करने के लिए बाहरी राज्यों के निवासियों के लिए अनिवार्य कार्यकाल, जम्मू कश्मीर में रह रहे गैर निवासियों के लिए निर्धारित मानदंड आदि कई मुद्दे हैं, जो यहां के स्‍थाई नागरिकों की मांग के अनुसार ठीक नहीं है। उन्होंने इसमें संशोधन करने के लिए अपनी पार्टी की ओर से जल्द मुहिम शुरू करने का ऐलान भी किया।

वैसे भी यह पहला मुद्दा था जिस पर प्रदेश के दोनों संभागों के लोग और राजनीतिक दल एकमत थे और उन्होंने संयुक्त प्रयासों के साथ नया आंदोलन छेड़ने का आगाज किया है। यह बात अलग है कि प्रदेश के लोगों का नेतृत्व करने का दावा करने वाली प्रदेश भाजपा की किरकिरी इसलिए हो रही थी क्योंकि वह केंद्र के कानूनों का पूर्ण समर्थन करते हुए प्रदेश के लोगों की आकांक्षाओं को नजरअंदाज करने की कोशिश में जुटी थी।

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