डेंगू से लोग हलकान, आप-भाजपा में जुबानी जंग

नई दिल्ली| पुनः संशोधित शनिवार, 19 सितम्बर 2015 (18:36 IST)
नई दिल्ली। राजधानी में डेंगू पीड़ितों के इलाज के लिए उनके परिजन अस्पतालों के  चक्कर लगाने के लिए मजबूर हो रहे हैं, वहीं दिल्ली में सरकार चला रही आम आदमी पार्टी (आप) और दिल्ली नगर निगम में काबिज भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं के बीच जुबानी जंग थमती नजर नहीं आ रही।
 
दिल्ली में शुक्रवार शाम से हुई छिटपुट वर्षा ने पिछले पांच साल के बाद विकराल रूप धारण करने वाले डेंगू के खतरे को और बढ़ाने की आशंका पैदा कर दी है। 
 
राजधानी में डेंगू के संबंध में मीडिया में आ रही खबरों के अनुसार 21 लोगों की जान जा चुकी है जबकि 2500 से अधिक लोग इस जानलेवा बुखार से दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं।
 
उधर, दिल्ली के तीन नगर निगमों के आधिकारिक आंकड़ों में डेंगू से मरने वालों की संख्या पांच ही है और 1872 लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। निगमों की तरफ से सोमवार को साप्ताहिक आंकड़े जारी किए जाते हैं और ये 21 सितंबर को जारी किए जाएंगे। 
 
निगमों का यह आरोप है कि दिल्ली सरकार ने डेंगू से निपटने के उपाय करने के लिए जो धन आवंटित करना था, उसमें भारी कटौती कर दी गई, लेकिन वह राशि भी अभी तक मुहैया नहीं कराई गई है।
 
सुलतानपुर माजरा से के विधायक और दिल्ली के अनुसूचित जाति, जनजाति और महिला एवं विकास मंत्री संजीव कुमार ने कल दलित मुस्लिम एकता सम्मेलन को संबोधित करते हुए डेंगू को लेकर  भाजपा  नेताओं को  तो निशाना बनाया ही, डॉक्टरों को भी नहीं बख्शा।  कुमार ने धमकी तक दे डाली,   हॉस्पिटल वालों की औकात नहीं है कि आपको मना करें, उनके लाइसेंस जब्त करवा लेंगे अगर वह ऐसा काम करेंगे।
 
उन्होंने भाजपा नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि दिल्ली सरकार डेंगू से राजधानी के लोगों को बचाने से जूझ रही है  भाजपा के मंत्री कहां हैं।  उन्होंने दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग द्वारा जारी परिपत्र का भी उल्लेख किया और कहा कि दिल्ली डेंगू से बुरी तरह जूझ रही है और भाजपा के मंत्री हनीमून  मना रहे हैं।  
 
हालांकि उनके बयान पर दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री और स्वयं  कुमार ने बाद में माफी मांगी।  कुमार ने कहा,  मुझे याद नहीं, मैंने क्या कहा, यदि मैंने इस लहजे में कहा है और इससे किसी को चोट पहुंची है तो मैं माफी मांगता हूं। मेरा इरादा किसी को चोट पहुंचाने का नहीं था, मैंने सभी डॉक्टरों के बारे में टिप्पणी नहीं की थी।  मेरी टिप्पणी उन डॉक्टरों के प्रति थी, जो मरीजों से ठीक से व्यवहार नहीं कर रहे हैं।
 
भाजपा के दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने दिल्ली सरकार पर प्रहार करते हुए कहा कि डेंगू रोकने के मामले में सरकार पूरी तरह असफल रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने डेंगू रोकने के लिए समय से कदम नहीं उठाए और अब जब यह बीमारी विकराल रूप धारण करती जा रही है तो वह जुबानी जंग में व्यस्त है।
 
उपाध्याय ने  कुमार के विवादास्पद बयान पर कहा, आप के  मंत्रियों से इससे अधिक और क्या उम्मीद कर सकते हैं। सरकार ने डेंगू से निपटने के लिए कोई काम नहीं किया और वह इस बीमारी को रोकने में पूरी तरह नाकाम रही।
 
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर  जंग के परिपत्र का हवाला देते हुए अपील की थी कि राजधानी डेंगू के चपेट में है और इस समय इससे निपटने की जरूरत है। अन्य मसलों पर दो माह बाद भी लड़ाई की जा सकती है।
 
डेंगू मरीजों का इलाज नहीं करने वाले निजी अस्पतालों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी के बावजूद दक्षिणी दिल्ली के देवली गांव के निवासी 38 वर्षीय हरीश चौहान के परिवार ने आरोप लगाया है कि पौने चार लाख रुपए खर्च कर दिए जाने के बावजूद उनकी (हरीश) की मौत हो गई।  
 
हरीश के भाई मुकेश चौहान ने कहा कि दो अस्पतालों में ले जाने के बावजूद डेंगू का समय से पता नहीं लग पाया और  तीसरे अस्पताल ने उनका लिवर इन्फेक्शन का इलाज किया। 
 
उन्होंने कहा कि पहले हरीश को बुखार आने पर 11 सितंबर को मदन मोहन मालवीय अस्पताल ले जाया गया और वहां उसका डेंगू का इलाज करने की बजाय एक टीका लगाया गया।  
 
अगले दिन हरीश की हालत बिगड़ने पर उसे सफदरगंज अस्पताल ले गए, जहां उसे दाखिल तो कर लिया गया लेकिन डेंगू का इलाज नहीं किया गया।  उन्होंने अस्पताल में एक एक बिस्तर पर चार-चार मरीज होने से उसे बत्रा अस्‍पताल ले गए, जहां उसका लीवर इन्फेक्शन का इलाज शुरू किया गया।  
 
पांच दिन तक इसी का इलाज चला और 17 सितंबर को परिवार को बताया गया कि उसे डेंगू हो गया है और इसके 24 घंटे के भीतर हरीश की मौत हो गई।  परिवार का दावा है कि अस्पताल ने करीब चार लाख रुपए वसूले। (वार्ता)



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