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क्या है ‍बांकीपुर का जातीय गणित और किस जाति से आते हैं प्रशांत किशोर? कितने पढ़े-लिखे हैं PK

Bankipur Caste Equation
Bankipur Caste Equation: बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर जीत दर्ज करने वाले जनसुराज पार्टी के मुखिया प्रशांत किशोर अपनी राजनीतिक चर्चाओं और साक्षात्कारों में अक्सर यह कहते रहे हैं कि जाति एक सामाजिक सच्चाई है, लेकिन वे स्वयं जाति की राजनीति नहीं करते। उनका कहना है कि उनकी जाति न तो उनकी ताकत है और न ही उनकी कमजोरी। कायस्थ बहुल बांकी सीट पर प्रशांत किशोर की जीत कम चौंकाने वाली नहीं है क्योंकि भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा कायस्थ समुदाय से ही आते हैं। 
 
हालांकि प्रशांत किशोर का जन्म एक कान्यकुब्ज ब्राह्मण परिवार में हुआ है। उनका पूरा नाम प्रशांत किशोर पांडे है। बांकीपुर उपचुनाव के नतीजों और राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, प्रशांत की जीत किसी एक जाति के भरोसे नहीं, बल्कि एक सर्वसमावेशी गठबंधन और बहु-जातीय समर्थन के कारण संभव हुई। ALSO READ: बांकीपुर में क्यों हारी भाजपा? प्रशांत किशोर की जीत के 5 बड़े कारण

सवर्ण मतदाताओं का प्रशांत की ओर झुकाव

चूंकि प्रशांत स्वयं ब्राह्मण समाज से आते हैं। इसलिए बांकीपुर में ब्राह्मण मतदाताओं ने एकजुट होकर जन सुराज का समर्थन किया। बांकीपुर में बीजेपी ने कायस्थ उम्मीदवार (नीरज कुमार सिन्हा) को उतारा था। ऐसे में बीजेपी के पारंपरिक सवर्ण वोट बैंक माने जाने वाले भूमिहार और राजपूत मतदाताओं के एक बड़े हिस्से ने विकल्प के रूप में प्रशांत किशोर को चुना।

आरजेडी से टूटा मुस्लिम मतदाता

राजद (RJD) की प्रत्याशी के कमजोर स्थिति में होने के कारण, मुस्लिम मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा आरजेडी से छिटककर प्रशांत किशोर की तरफ शिफ्ट हो गया। उन्हें लगा कि भाजपा को हराने में प्रशांत किशोर ही मुख्य दावेदार हैं। आरजेडी के प्रति उदासीनता और स्थानीय मुद्दों की वजह से यादव और अति पिछड़ा वर्ग के वोट भी विभाजित हुए और इसका एक हिस्सा प्रशांत किशोर की झोली में गया। शहरी बस्तियों और वार्डों में दलित और महादलित मतदाताओं ने भी व्यवस्था परिवर्तन, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर जन सुराज के पक्ष में मतदान किया। ALSO READ: JDU विधायक अनंत सिंह ने बताया बांकीपुर में भाजपा की हार का असली कारण

कितने पढ़े-लिखे हैं प्रशांत किशोर? 

प्रशांत किशोर की स्कूली शिक्षा बिहार के बक्सर (MP हाई स्कूल) और पटना (पटना साइंस कॉलेज) से हुई है। इसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा हासिल की। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय के बिजनेस स्टडीज विभाग से बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन यानी BBA की डिग्री ली। हैदराबाद स्थित Administrative Staff College of India (ASCI) से मास्टर ऑफ हेल्थकेयर एडमिनिस्ट्रेशन (MHA) की डिग्री प्राप्त की। यह कोर्स जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी (अमेरिका) और हिंदुजा अस्पताल के सहयोग से तैयार किया गया था। इसके अलावा, उन्होंने साल 2010 में फ्रांस की क्लैमों-फेरां यूनिवर्सिटी और CAVILAM (विशी, फ्रांस) से फ्रेंच भाषा का इंटेंसिव कोर्स भी किया है।

प्रशांत किशोर की आय के मुख्य साधन?

राजनीति में जन सुराज अभियान शुरू करने से पहले, प्रशांत किशोर देश के सबसे बड़े और महंगे राजनीतिक रणनीतिकार थे।  उन्होंने भारत के विभिन्न राजनीतिक दलों- भाजपा, टीएमसी, वाईएसआर कांग्रेस, आप, डीएमके आदि के लिए चुनावी अभियान डिजाइन किए। स्वयं प्रशांत ने सार्वजनिक खुलासा किया है कि उन्होंने अपनी कंसल्टेंसी कंपनियों (जैसे I-PAC/सिटिजन्स फॉर एकाउंटेबल गवर्नेंस) और व्यक्तिगत परामर्श शुल्क से 3 वर्षों में करीब 241 करोड़ रुपए की कमाई की थी, जिस पर उन्होंने टैक्स चुकाया।
 
भारतीय राजनीति और चुनावी रणनीति के क्षेत्र में कदम रखने से पहले (वर्ष 2011 से पूर्व) प्रशांत किशोर लगभग 8 वर्षों तक संयुक्त राष्ट्र (UN) समर्थित सार्वजनिक स्वास्थ्य (Public Health) कार्यक्रमों में उच्च पदों पर कार्यरत थे। वे अफ्रीका के चाड (Chad) देश में यूनिसेफ (UNICEF) के 'हेड ऑफ सोशल पॉलिसी एंड प्लानिंग' रहे थे। चुनावी हलफनामे के अनुसार उनके पास बैंकों में करोड़ों की एफडी (FD), शेयर बाजार में निवेश और म्यूचुअल फंड्स से मिलने वाला रिटर्न है।
 
उनके पास रोहतास (बिहार) में एक राइस मिल, कृषि योग्य भूमि, पैतृक संपत्ति के अलावा पटना, दिल्ली और गाजियाबाद में अचल संपत्तियां हैं। उनकी पत्नी डॉ. जाह्नवी दास पेशे से चिकित्सक हैं और सीनियर एडवाइजर के तौर पर कार्य करती हैं। उनके पास भी निजी कंपनियों के शेयर और अन्य वित्तीय निवेश हैं।
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