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Last Updated : शनिवार, 10 फ़रवरी 2018 (15:16 IST)

पूर्वोत्तर राज्यों पर चुनावी रंग चढ़ा

पूर्वोत्तर राज्यों पर चुनावी रंग चढ़ा - Assenblies election in north-eastern states
नई दिल्ली। जैसाकि सभी जानते हैं कि पूर्वोत्तर के तीन राज्यों, मेघालय, नगालैंड और त्रिपुरा में चुनावी रंग चढ़ने लगा है और इन राज्यों में चुनावी गतिविधियां तेज हो गई हैं। विदित हो कि कुछेक दिमों पहले ही प्रधान मंत्री मोदी ने त्रिपुरा में दो चुनाव सभाएं की थीं और पांचवीं बार बनी माणिक सरकार को उखाड़ फेंकने की बात कही।
 
 
इन चुनावों में मुख्य रूप से कांग्रेस- वाम दल (माकपा) की प्रतिष्ठा दांव पर हैं क्योंकि उन पर अपने-अपने गढ़ों को बचाने की जिम्मेदारी है जबकि भाजपा दोनों दलों को लेकर हमलावर है क्योंकि उसके पास खोने के लिए कुछ भी नहीं है।
 
मेघालय विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों का नामांकन खत्म हो हो चुका है और चुनावी गहमा गहमी के बीच एक ऐसा उम्मीदवार भी सामने आया है जिसकी बेहिसाब संपत्ति ने सबको हैरान कर दिया है। उमरोई निर्वाचन क्षेत्र से उद्योगपति और नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के उम्मीदवार एनगलेट धार ने मेघालय की आगामी विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन भरा है। मेघालय चुनाव के लिए अब तक नामांकन भर चुके उम्‍मीदवारों में से वह सबसे अमीर उम्मीदवार हैं। 
 
मुकुल संगमा ने भरा नामांकन
 
मेघालय के मुख्यमंत्री मुकुल संगमा ने 27 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अपने गृह निर्वाचन क्षेत्र अमपाटी से नामांकन दाखिल किया। इसी तरह पूर्व केंद्रीय मंत्री और एनपीपी की नेता अगाथा के. संगमा ने दक्षिण तूरा सीट से पर्चा भरा। विदित हो कि तूरा पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पी.ए. संगमा की सीट हैँ, अब उनके न रहने पर उनकी बेटी चुनाव लड़ रही हैं।  
 
मुख्‍यमंत्री मुकुल संगमा के सामने भाजपा ने बाकुल हजोंग को चुनाव मैदान में उतारा है। उन्‍होंने भी अमपाटी से अपना नामांकन दाखिल किया है। इस बार यहां पर भाजपा नेता नलिन कोहली, राम माधव भी सक्रिय हैं और वे पार्टी प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने के लिए पसीना बहा रहे हैं।
 
इससे पहले राज्य में कांग्रेस को एक बड़ा झटका लग चुका है क्योंकि इसके 5 विधायक नेशनल पीपुल्स पार्टी में शामिल हो गए हैं। एनगलेट धार के शपथपत्र के अनुसार, उनके पास 144 वाहन हैं और उनकी पारिवारिक संपत्ति लगभग 290 करोड़ है। 
 
हालांकि इसमें उनके पुत्र की संपत्ति शामिल नहीं है जोकि स्वयं भी एनपीपी के उम्मीदवार हैं। स्कूल की पढ़ाई भी पूरी नहीं करने वाले धार के पास 219.04 करोड़ रुपए की कृषि भूमि और लगभग 71.23 करोड़ रुपए की अस्थायी संपत्तियां हैं। इस 49 वर्षीय विधायक के पास बीएमडब्ल्यू और टोयोटा एसयूवी सहित 144 वाहनों के अलावा पत्थर और कोयले के परिवहन के लिए ट्रकों का काफिला भी शामिल है।
 
धार के 25 वर्षीय पुत्र दशाखीत लमारे ने भी 40 करोड़ रुपए से अधिक की कुल संपत्ति घोषित की है। अपने पिता और भाइयों के स्वामित्व वाली एक निर्माण कंपनी के प्रबंध निदेशक लमारे भी 13 अन्य वाहनों के अलावा एक बीएमडब्ल्यू और टोयोटा एसयूवी के मालिक हैं और इसमें ज्यादातर ट्रक हैं। लमारे की 36 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति और 4 करोड़ रुपए की अन्‍य संपत्तियां हैं।
 
त्रिपुरा में माकपा और भाजपा में कड़ी टक्कर
 
त्रिपुरा में करीब तीस सालों से माकपा की सरकार है, लेकिन अब की बार उनकी स्थिति कुछ कमजोर लग रही है। उनकी कमजोर कड़ी राज्य में विकास का न होना माना जा रहा है। इस मुद्दे को भाजपा वहां हवा दे रही है। मेघालय और नगालैंड में मौजूदा सरकारों की स्थिति उतनी अच्छी नहीं है जितनी होनी चाहिए। 
 
भाजपा इस बार तीनों राज्यों के किले को भेदना चाहती है। कांग्रेस के अलावा वाम दल ने भी अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। त्रिपुरा में 18 फरवरी और नगालैंड व मेघालय में 27 फरवरी को मतदान होंगे और नतीजे एक साथ होली के दूसरे दिन यानी तीन मार्च को आएंगे।
 
प्रमुख राजनीतिक दलों के लिए मेघालय और नगालैंड के अलावा त्रिपुरा काफी खास है। विशेषकर माकपा के लिए त्रिपुरा बहुत खास है क्योंकि त्रिपुरा में तीन दशकों से उसकी सरकार है जिसे बरकरार रखने की कोशिश होगी। वहीं भारतीय जनता पार्टी के लिए उत्तर-पूर्व के चुनाव राजनीतिक रूप से बहुत अहम माने जा रहे हैं।  
 
भाजपा ने असम, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में सत्ता पर काबिज होकर सभी को चकित कर दिया है। इसलिए स्थानीय पार्टियां यह भांप चुकी हैं कि उनका अगला लक्ष्य पूर्वोत्तर के राज्य ही हैं।
 
कांग्रेस की अग्निपरीक्षा
 
वामदल के लिए अलावा कांग्रेस के लिए भी इन राज्यों के चुनाव बहुत महत्वपूर्ण हैं। अभी तक त्रिपुरा में मुख्य मुकाबला कांग्रेस और माकपा के बीच रहा है और माकपा हमेशा बढ़त बनाने में सफल रही है। यही नहीं, माणिक सरकार के शासन के दौरान माकपा की सीटों की संख्या भी बढ़ती रही है। 
 
मगर माकपा की जीत के इन आंकड़ों के पीछे ही उसकी कमजोरियों भी दिख रही हैं। दरअसल इन तीनों छोटे राज्यों के विधानसभा चुनाव को 2019 के आम चुनाव की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि तीनों राज्यों में चुनाव की कमान खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संभालेंगे और सभी जगहों पर चुनावी रैली भी करेंगे।
 
चुनाव आयोग भी इस बार सर्तकता से काम कर रहा है। आयोग इन राज्यों में पर्ची वाली इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम से चुनाव कराएगा। चुनाव आयोग की तरफ से कुछ और भी बदलाव किए गए हैं जैसे उम्मीदवारों के लिए चुनाव में खर्च की सीमा भी घटाकर इस बार कम की गई है। 
 
इस बदलाव पर कुछ विपक्षी पार्टियों ने चुनाव आयोग पर केंद्र के इशारे पर काम करने के आरोप लगाए हैं। चुनाव की तारीखों पर भी विपक्ष ने एतराज जताया है। उसका मानना है कि होली के बाद अगर चुनाव होते तो और अच्छा होता। कई दशकों से त्रिपुरा में माकपा सरकार काबिज रही है, लेकिन इस बार की परिस्थितियां पहले से अलग हैं क्योंकि इस बार उसका मुकाबला भाजपा से होने वाला है।