बजट से सहकारिता में निराशा : चंद्रपॉल सिंह

- उमेश चतुर्वेदी

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नई दिल्ली। से सहकारिता का जिक्र तक नहीं किए जाने से सहकारिता से जुड़े 25 करोड़ से ज्यादा भारतीय को निराशा हाथ लगी है। देश के सहकारी संस्थाओं की सर्वोच्च इकाई के अध्यक्ष डॉ. चंद्रपॉल सिंह यादव ने कहा है कि से अंत्योदय के शुरुआत की उम्मीद थी।


सहकारिता जमीन पर मौजूद सबसे गरीब व्यक्ति के उत्थान का महत्वपूर्ण औजार है। किसानों के लिए सबसे ज्यादा मददगार है। सहकारिता को मजबूत आधार देने की जरूर है। इसके लिए बजट से मदद की उम्मीदें थी।

डॉ. यादव ने कहा कि इस बजट से सहकारी उपक्रमों को कर में मिलने वाली पुरानी रियायतों को पुर्नबहाल किए जाने की आस थी। 2006 तक सहकारी उपक्रमों को कर में छूट मिली हुई थी, जिसे 2007 में खत्म कर दिया गया।

उसके बाद से ज्यादातर सहकारी संस्थाएं सिसक रही हैं। सहकारी संस्थाओं के आंसू पोछने की बात तो दूर बजट में सहकारिता के बारे में रंच मात्र जिक्र तक नहीं कहा गया। इससे सहकारिता में बने निराशा के माहौल को मजबूत हुआ है।


उन्होंने बताया कि सहकारी उपक्रमों के जरिए देश के किसान, गरीब और विपन्नों की सेवा की जारी रही। यह समेकित विकास के लिए आपसी सहभागिता से काम कर रही है। सहकारिता की नींव देश के 97 फीसदी गांवों में मौजूद है।



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