रामदेव ने अदालत का दरवाजा खटखटाया

शिमला| भाषा| पुनः संशोधित सोमवार, 25 फ़रवरी 2013 (23:46 IST)
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शिमला। के ने द्वारा 28 एकड़ भूमि का पट्टा रद्द करने के खिलाफ सोमवार को का दरवाजा खटखटाया।


ट्रस्ट ने अपनी रिट याचिका में पूर्ववर्ती द्वारा उसे 99 साल के पट्टे पर दी गई जमीन का कब्जा मांगा है। मामले को 27 फरवरी को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है और राज्य सरकार ने पहले ही एक कैवियट दायर किया हुआ है।

सोलन जिले में साधुपुल के पास स्थित 28 एकड़ भूमि पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने वर्ष 2010 में 99 वर्ष के लिए एक रुपए प्रतिवर्ष के टोकन पट्टे पर दी थी। कांग्रेस ने सत्ता में आने के बाद गत 19 फरवरी को भूमि का पट्टा रद्द कर दिया। 22 फरवरी को हिमाचल प्रदेश के अधिकारियों ने त्वरित लेकिन शांतिपूर्ण ढंग से जमीन रामदेव के ट्रस्ट से वापस ले ली।

योगपीठ ने अपनी याचिका में इस बात का उल्लेख किया है कि राज्य सरकार ने स्वास्थ्य पर्यटन, जड़ी-बूटियां उगाने और चिकित्सा विज्ञान के विकास के लिए भूमि को पट्टे पर देने का समझौता किया था। भूमि ट्रस्ट को एक वैध बैनामा के माध्यम से दी गई तथा भूमि के विकास और अन्य बुनियादी ढांचे पर करीब 11 करोड़ रुपए का खर्च हुआ।

याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार ने भूमि का कब्जा ‘अवैध तरीके’ से लिया है। पट्टे पर दिए जाने के बाद उसे पट्टे की शर्तों या कानूनी प्रक्रिया के जरिए ही रद्द किया जा सकता है। (भाषा)



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