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‘कृष्ण बलदेव वैद’ का ‘अविनाश’ को कभी न लिखा गया एक ‘ख़त’

मंगलवार,जुलाई 27, 2021
Krishna baldev vaid
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1995 में डिंपल कैप्‍टन विक्रम बत्रा से मि‍लीं, 1996 में विक्रम सेना में चले गए। 1999 में वि‍क्रम कारगिल वॉर में शहीद हो गए। इन पांच सालों में कुछ ही वक्‍त डिंपल और विक्रम साथ में रहे। लेकिन विक्रम ने जहां देश की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराकर देश ...
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रिश्तों में स्पष्ट संचार और वार्तलाप बेहद आवश्यक है, मस्ती-मजाक, रूठना-मनाना भी रिश्तों को मजबूती देता है, एक-दूसरे को समय देना और एक-दूसरे की निजता का भी सम्मान करना ज़रूरी है... लेकिन क्या इसकी आड़ में हर बात पर ‘अबोला’ सही है?
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1971 का साल था। भारत की पाकिस्‍तान के साथ ऐतिहासिक जंग हो रही थी, इस जंग में पाकिस्‍तान ने इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) के बेस पर लगातार करीब 14 दिनों तक बम बरसाए थे। इस आपॅरेशन को पाकिस्‍तान ने ऑपरेशन चंगेज खां नाम दिया था। लेकिन भारतीय वायु सेना के ...
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बम के धमाकों के बीच उस समय जो नाम देश में सबसे ज्‍यादा गूंज रहा था वो नाम था कैप्‍टन विक्रम बत्रा का।
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इसे आधुनिक दासता के रूप में भी जाना जाता है। बच्चे और महिलाएं इसका सबसे ज्यादा शिकार होते हैं। कोरोनाकाल में बाल दुर्व्यापार बढ़ा है। आशंका जताई जा रही है कि लॉकडाउन से उपजे आर्थिक संकट के चलते भविष्य में जबरिया बाल मजदूरी, यौन व्यापार, भिखमंगी, बाल ...
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कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा एक बार फिर अपनी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को चुनौती देने की तैयारी में हैं। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि वे अपनी उम्र के आधार पर मुख्यमंत्री पद छोड दे, लेकिन येदियुरप्पा ऐसा करने को तैयार नहीं दिखते। हालांकि ...
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टेक्‍नालॉजी ने आदमी और प्रजातंत्र दोनों को ही ख़त्म कर देने की कोशिशों को आसान कर दिया है। दुनिया के कुछ मुल्कों, जिनमें अमेरिका आदि के साथ भारत भी शामिल हो रहा है, ने स्थापित कर दिया है कि सत्ता में बने रहने के लिए करोड़ों नागरिकों का विश्वास जीतने ...
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गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर प्रस्तुत है संत कबीर के गुरु पर रचे दोहे
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कोरोना ने अभी गति को विराम दे दिया है। विशेषतौर पर मनुष्‍य को एवं मनुष्‍य द्वारा नियंत्रित गतिविधियों, उपकरणों, यंत्रों, मशीनों साधनों को भी। कुछ वर्षों से मनुष्‍य की गति बहुत अधिक तीव्र हो गई थी। चारों तरफ भागमभाग, रेलपेल, हर काई तीव्र गति से भाग ...
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जन्मदिन के एक दिन पहले, रौनक रिद्धि को डिनर पर ले गया, जहाँ वह पूरे समय अपने फ़ोन पर ही लगा रहा। खाना हो गया और दोनों घर आ गए। 12 बजे रात को बड़े बेमन से रौनक ने रिद्धि से केक कटवाया, जिससे रिद्धि उदास हो गई।
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27 सफदरजंग, फिर ज्योतिरादित्य सिंधिया का निवास बन जाए तो चौंकिए मत। लुटियंस जोन की इस कोठी से सिंधिया परिवार का नाता बहुत पुराना है। माधवराव सिंधिया सालों इसी कोठी में रहे और सांसद बनने के बाद से 2019 का लोकसभा चुनाव हारने तक यही कोठी ज्योतिरादित्य ...
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‘सादगी’ के नाम पर दिखावा करने वाले ये पढ़े-लिखे आधुनिक परिवार के लोग क्या कभी अपने खुद के बेटे की ख़ुशी की कीमत पैसे से आंकना छोड़ सकेंगे? क्या ये पढ़े-लिखे बड़े कॉलेजों से पढ़ने वाले लड़के अपने घर में अपना मुंह खोल कर बदलते हुए समाज और परिदृश्य का सच अपने ...
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क्या कभी मर्द अपनी पत्नी को आगे बढ़ता हुआ नहीं देखना चाहते? या प्रोत्साहित करने का दिखावा कर उन्हें घर बैठाना चाहते हैं? क्या ‘सपोर्ट’ के नाम पर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत होते देखना उनके अहम् को ठेस पहुंचाता है? ये सभी ‘कही-अनकही’ बातें हैं और इसका ...
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जल्‍लादों का कहना था कि भले ही हमारा काम फांसी का फंदा लगाना है, लेकिन हम इस देशभक्‍त की मौत देने का पाप अपने हाथों से कतई नहीं करेंगे।
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किसी राष्ट्र के प्रधानमंत्री होने के सुख और उसकी अनुभूति का शब्दों में बखान नहीं किया जा सकता। वह राष्ट्र अगर दुनिया के करीब दो सौ मुल्कों में सबसे ज़्यादा आबादी वाला प्रजातांत्रिक देश भारत हो तो फिर उसके प्रधानमंत्री के मुंह से निकलने वाला प्रत्येक ...
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उत्तर प्रदेश में पिछले साढे चार साल से शासन कर रही भारतीय जनता पार्टी की सरकार और उसके मुखिया अजय सिंह बिष्ट उर्फ योगी आदित्यनाथ को अचानक इलहाम हुआ है कि प्रदेश की आबादी बेतहाशा बढ़ रही है जिसकी वजह से न तो सूबे का विकास हो पा रहा है और न ही ...
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उत्तर प्रदेश विधि आयोग ने जब जनसंख्या नियंत्रण नीति का दस्तावेज जारी किया था तभी सूक्ष्मदर्शी यंत्रों से दोष निकालने वालों ने एक-एक शब्द छान मारा। उसमें किसी तरह के मजहब का कोई जिक्र नहीं था और योगी आदित्यनाथ द्वारा जार नीति वही है। इसमें दो से ...
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इमोजी सबसे तेजी से बढ़ती भाषाओँ में से एक हो गया है। इमोजी को शुरू में जापान में उपयोग किया जाता था और अब इसका इस्तेमाल पूरे विश्व में होने लगा है इमोजिपिडिया के संस्थापक जेरेमी बर्ज ने 2014 में विश्व इमोजी दिवस मनाने का निर्णय लिया, उसके बाद 17 ...
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हुक्मरान जब नौजवानों के मुकाबले वृद्धावस्था में प्रवेश कर चुके अथवा उसे भी पार कर चुके नागरिकों से ज्यादा खतरा महसूस करने लगें तो क्या यह नहीं समझ लिया जाना चाहिए कि सल्तनत में सामान्य से कुछ अलग चल रहा है? जीवन भर आदिवासियों के हकों की लड़ाई लड़ने ...
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