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सोशल मीडि‍या बनेगा चुनाव का ‘वर्चुअल’ अखाड़ा, राजनीति‍क पार्ट‍ियां झौंकेंगी अपनी ‘डि‍जिटल ताकत’

शुक्रवार,सितम्बर 25, 2020
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ये जो छोटी मछलियां-बड़ी मछलियां तड़पती दिखाई दे रही हैं दरअसल ये सब बॉलीवुड के गीले-सूखे कचरे हैं जिन्हें हमें खुद उठाकर सावधानी से कचरा गाड़ी में डालना है।
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1981 के आसपास लिखी गई इस किताब में एक संक्रमण का जिक्र है और इसे वुहान 400 का ही नाम दिया गया है। यानी आज से करीब 40 साल पहले उस वायरस के बारे में लिए किताब में जिक्र कर दिया गया था। एक अमेरिकी की यह कृति शुरु तो एक ऐसी मां से होती है जो अपने बच्चे ...
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बि‍लकिस बानो जिसे टाइम ने अपनी सूची में शामिल किया है।
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वे तमाम लोग जो नीतिपरक (एथिकल) पत्रकारिता की मौत और चैनलों द्वारा परोसी जा रही नशीली खबरों को लेकर अपने छाती-माथे कूट रहे हैं, उन्हें हाल में दूसरी बार राज्यसभा के उपसभापति चुने गए खाँटी सम्पादक-पत्रकार हरिवंश नारायण सिंह को लेकर मीडिया में चल रही ...
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ड्रग मामले में नारकोटि‍क्‍स ब्‍यूरो ने दीपि‍का पादुकोण, सारा अली खान, श्रद्धा कपूर और रकुलप्रीत सिंह को तलब किया है।
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एक जया संसद में बचाव के कमजोर तर्क रखती है और एक जया एनसीबी के सामने एक से बढ़कर एक नाम उगलती है... जया से लेकर जया तक हर किसी के दिल धड़क रहे हैं... हर कोई अपने-अपने विक्टिम कार्ड खोज रहा है, बचाव के गलियारे तलाश रहा है और आम जनता, मध्यम वर्गीय ...
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इन विधेयकों के द्वारा भारतीय जनता पार्टी की सरकार भले ही युगान्तरकारी तथा किसानों की समृद्धि का द्वार खोलने का दावा करती है
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टॉप मॉडल के साथ ही बड़े नेताओं के बेटों को लग चुकी है ड्रग्‍स की लत
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आखि‍र क्‍या हुआ था इन 10 लोगों के साथ, कोई नहीं जानता सच!
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नया संसद भवन समय के साथ प्रासंगिक है। हो भी क्यों न जब 2026 में संसदीय क्षेत्रों का नए सिरे से परिसीमन होगा
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जर्मनी की सड़कों पर साठ लाख यहूदियों के निस्‍तेज और ठंडे शव। करीब 15 लाख बच्‍चों की खून से सनी बे-हरकत लाशें। इसकी गंध कई दशकों तक पसरी रहेगी।
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इशकरण को सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्‍ध मौत के मामले में चर्चा करते हुए कई न्‍यूज चैनल्‍स पर ड‍िबेट करते देखा जा सकता है।
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सहज जिज्ञासा है कि लोग पूछ रहे हैं: 'अब क्या करना चाहिए?’ एक विशाल देश और उसके एक दूसरे से लगातार अलग किए जा रहे नागरिक जिस मुक़ाम पर आज खड़े हैं, वे जानना चाह रहे हैं कि उन्हें अब किस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए?
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प्रधानमंत्री मोदी के लिखे कुछ पन्‍नें बच गए जो अब किताब की शक्‍ल में आएंगे नजर
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सभी मनुष्यों की श्रद्धा उनके अंत:करण के अनुरूप होती है। अक्सर लोगों का कथन होता है कि, ‘हम लोग बहुत वर्षों से सत्संग करते आ रहे हैं और अपनी समझ तथा शक्ति के अनुसार साधना भी करते है,
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वो आपके दिमाग को रीड कर रहा है और उसी हिसाब से आपको अपने ट्रैप में फंसा रहा है।
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मध्यप्रदेश में कमलनाथ-दिग्विजयसिंह के बीच बढ़ती दूरी की खबरें निराधार हैं, हकीकत तो यह है कि दोनों में गजब का तालमेल है।
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भाषा व्यक्ति-व्यक्ति के मध्य अथवा दो समूहों के मध्य केवल संपर्क का ही माध्यम नहीं होती। वह संपर्क से आगे बढ़कर उनके मध्य स्नेह का सूत्र भी सुदृढ़ करती है,
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शिक्षा की व्यवस्था हो चाहे व्यवस्था की शिक्षा दोनों की स्थिति में भाषा का महत्व सर्वविदित है। व्यावहारिक जीवन शैली हो चाहे अध्ययनशीलता का ककहरा सीखना हो,
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