sawan somwar

फादर्स डे स्पेशल : पहेली

Updated: मंगलवार, 21 जून 2016 (14:14 IST)
वे थे 
मैं था 
सब था 
वे थे वे 
मैं मैं था 
सब था अलग अलग
 
उनमें नहीं था मैं 
मुझमें तो कतई 
नहीं होते थे वे
 
अब मैं हूं  
नहीं हैं वे 
 
पढ़कर सुनाता हूं पत्नी को 
कुमार अम्बुज की कविताएं
सुनाने लगते हैं वे 
धर्मयुग से नईम के नवगीत
 
ओह! मैं हूं  
वे भी हैं 
 
उनके जैसा मैं 
मेरे जैसे वे 
सब कुछ पहले जैसा.
लेखक के बारे में
ब्रजेश कानूनगो
ब्रजेश कानूनगो जानेमाने कवि-साहित्यकार-व्यंग्यकार हैं। समाजसेवा से जुड़े हैं।.... और पढ़ें
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