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फेसबुक के विकल्प भी कम नहीं

डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी
# माय हैशटैग
 
जबसे यह खबर सुर्खियों में आई है कि फेसबुक के डाटा का उपयोग कुछ कंपनियां शोध के लिए कर रही हैं और वे राजनीतिक विज्ञापनों में उसे काम में लेती हैं, तब से फेसबुक पर आपत्तियां आने लगी हैं। अनेक लोग फेसबुक से अपना अकाउंट डिलीट कर रहे हैं। यह बात भी सामने आई है कि फेसबुक का अकाउंट डिलीट करने पर लोगों को कुछ परेशानियां भी आ रही हैं। इसका कारण यह है कि कई लोग अपने फेसबुक अकाउंट के माध्यम से ही दूसरे कई अकाउंट लॉग-इन और लॉग-आउट करते हैं।
 
 
अब सवाल यह है कि फेसबुक का विकल्प क्या है? फेसबुक का विकल्प फेसबुक के ही दूसरे प्रोडक्ट्स हैं। अब मैसेंजर को ही लीजिए। यह फेसबुक का ही प्रोडक्ट है। फेसबुक डिलीट करने का मतलब यह नहीं कि आपने मैसेंजर डिलीट कर दिया है। मैसेंजर का उपयोग कई लोग एसएमएस की तरह करते हैं। मैसेंजर के एफएक्यू के अनुसार आप अपना फेसबुक डी-एक्टिवेट करने के बाद भी वे मैसेंजर का उपयोग तो कर ही सकते हैं।
 
ट्विटर को भी कई लोग फेसबुक की ही तरह उपयोगी सोशल मीडिया साइट मानते हैं। ट्विटर के साथ खास बात यह है कि यह माइक्रोब्लॉगिंग साइट है और यहां आप 280 कैरेक्टर और 4 फोटो से अधिक एकसाथ शेयर नहीं कर सकते। फेसबुक से अलग ट्विटर की एक खूबी यह है कि यहां आप कितने भी लोगों को फॉलो कर सकते हैं और कितने भी लोग आपको फॉलो कर सकते हैं।
 
कुछ ट्विटर अकाउंट वालों के फॉलोअर्स तो करोड़ों में हैं। ट्विटर को फेसबुक की तुलना में ज्यादा परिपक्व माना जाता है। यह बात और है कि ट्विटर पर भी लगभग वैसे ही आरोप लग चुके हैं, जैसे फेसबुक पर लगे हैं, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति बनने के बाद तो व्हाइट हाउस के मीडिया प्रवक्ता की जगह ट्विटर को ही दायित्व सौंप दिया लगता है। कई लोग ट्रंप को 'ट्विटर इन चीफ' भी कहते हैं।
 
पाथ (Path) : फेसबुक और इंस्टाग्राम का मिला-जुला रूप है पाथ। कई लोग मानते हैं कि फेसबुक से तलाक लेने वाले अब पाथ के साथ जुड़ सकते हैं। यह एक ऐप आधारित प्लेटफॉर्म है, जो अधिकांश मोबाइल पर तो काम करता है, लेकिन डेस्कटॉप पर काम नहीं करता। ग्रुप बनाकर संदेश देने वालों के लिए यह आदर्श माना जाता है, क्योंकि यह आपके फोटो और पोस्ट के अलावा शॉपिंग, किताबें, सिनेमा, म्यूजिक, टीवी शो आदि के बारे में भी बातें शेयर करना पसंद करता है।
 
राफ्ट्र (Rafra) : जो लोग अपने विचार शेयर करना चाहते हैं, उनके लिए यह एक अच्छा विकल्प है। जिस तरह फेसबुक की शुरुआत कॉलेज के विद्यार्थियों को आपस में कनेक्ट करने के लिए हुई थी, वैसे ही इसकी शुरुआत हुई। इसकी सेवाएं मोबाइल और डेस्कटॉप दोनों पर हैं। इसके साथ ही ये आईओएस विंडोज पर भी उपलब्ध है। इस वेबसाइट की खूबी यह है कि यह अपने यूजर से न्यूनतम जानकारी पूछती है और उस पर भी दावा करती है कि यह केवल इंटरनल कंपनी उद्देश्य से की जा रही है। ऐसी कोई जानकारी नहीं पूछी जाती जिससे कि व्यक्ति की पहचान सार्वजनिक होती हो।
 
वेरो (Vero) : सोशल मीडिया की यह दिलचस्प साइट है, लेकिन यह मुफ्त उपलब्ध नहीं है। यह विज्ञापन के बजाय अपने यूजर्स से चंदा लेकर काम करती है। इस कंपनी का दावा है कि यह डाटा माइनिंग नहीं करती और अलगोरिथम का उपयोग भी नहीं करती। इसका मतलब यह हुआ कि जब आप यहां कुछ भी सर्च करते हैं, तो वह अपने आप सेव नहीं किया जाता और भविष्य में उससे जुड़ी जानकारी नहीं दी जाती। कंपनी का यह भी दावा है कि वह केवल वहीं जानकारी लेती है, जो कानूनी रूप से लेना जरूरी है। इसने सबसे पहले अपने प्रचार के लिए 10 लाख यूजर को मुफ्त में सदस्यता दी। यह सदस्यता आजीवन थी। 10 लाख के बाद उसने फीस लेना शुरू कर दिया।
 
डिग (Digg) : सोशल मीडिया की यह एक ऐसी वेबसाइट है जिसमें अनेक विषयों से जुड़े लेख आदि पढ़े जा सकते हैं। आई-फोन और आई-पैड के यूजर यहां से समाचार प्राप्त कर सकते हैं। फेसबुक के न्यूज फीड की तुलना में यह ज्यादा गंभीर विकल्प है।
 
सिग्नल (Signal) : यह एक ऐसा मैसेजिंग ऐप है, जो मुफ्त है और सुरक्षा की चिंता करते हुए संदेशों का आदान-प्रदान करता है। यहां आप एनिमेटेड स्टीकर नहीं भेज सकते, लेकिन अपनी बात सामने वाले तक आसानी से पहुंचा सकते हैं। जो लोग साफ-सुथरे संदेश देना चाहते हैं, उनके लिए यह एक अच्छा विकल्प है। यह डेस्कटॉप पर भी उपलब्ध है। यहां से आप ऑडियो और वीडियो कॉल भी कर सकते हैं। यहां विज्ञापन भी आपको परेशान नहीं करते।
 
फेसबुक अपने अकाउंट को डी-एक्टिवेट करने वालों को हतोत्साहित करने के लिए तरह-तरह के प्रयास भी कर रहा है। जब कोई व्यक्ति अपना अकाउंट डी-एक्टिवेट करने जाता है, तब उसे बताया जाता है कि वह फेसबुक छोड़ने के बाद कौन-कौन सी चीजों से महरुम रह जाएगा। उसे न्यूज फीड नहीं मिलेगी, फेसबुक अकाउंट से वह कई खातों में जुड़ नहीं पाएगा, जरूरत के विज्ञापन भी उसे नहीं मिल पाएंगे आदि।
 
फेसबुक अपना अकाउंट डी-एक्टिवेट करने वालों को यह सुविधा भी देता है कि वे अकाउंट डी-एक्टिवेट करते वक्त फेसबुक अकाउंट में दिए गए इवेंट को एक्सपोर्ट कर सकें। आप अपने ई-मेल पर वह जानकारी सेव करके रख सकते हैं। फेसबुक पर लॉगइन करने के बाद बाईं तरफ इवेंट्स लिखा नजर आता है। वहां जाकर आप आपको क्या करना है, वह फेसबुक खुद ही बता देता है।
 
कई डेटिंग ऐप ऐसे हैं, जो फेसबुक से सीधे जुड़े हुए हैं। अगर आप फेसबुक अकाउंट डिलीट करते हैं, तब भी टिंडर पर जाकर अकाउंट तो खोल ही सकते हैं। टिंडर भी इसी तरह की सुविधाएं देता है। अगर आप फेसबुक अकाउंट पूरी तरह डी-एक्टिवेट नहीं करना चाहें, तब भी आपके पास यह विकल्प है ही कि आप अपनी प्राइवेसी को कड़ा कर दें।

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