sawan somwar

मां, तुझको गले लगाना है

- रोहित जैन

Written By WD
Updated: शुक्रवार, 6 मई 2011 (15:03 IST)
मैं रोया यहां दूर देस वहां भीग गया तेरा आंचल
तू रात को सोती उठ बैठी हुई तेरे दिल में हलचल

ND


जो इतनी दूर चला आया ये कैसा प्यार तेरा है मां
सब ग़म ऐसे दूर हुए तेरा सर पर हाथ फिरा है मां

जीवन का कैसा खेल है ये मां तुझसे दूर हुआ हूं मैं
वक़्त के हाथों की कठपुतली कैसा मजबूर हुआ हूं मैं

जब भी मैं तन्हा होता हूं, मां तुझको गले लगाना है
भीड़ बहुत है दुनिया में तेरी बांहों में आना है

जब भी मैं ठोकर खाता था मां तूने मुझे उठाया है
थक कर हार नहीं मानूं ये तूने ही समझाया है

मैं आज जहां भी पहुंचा हूं मां तेरे प्यार की शक्ति है
पर पहुंचा मैं कितना दूर तू मेरी राहें तकती है

छोती-छोटी बातों पर मां मुझको ध्यान तू करती है
चौखट की हर आहट पर मुझको पहचान तू करती है

कैसे बंधन में जकड़ा हूं दो-चार दिनों आ पाता हूं
बस देखती रहती है मुझको आंखों में नहीं समाता हूं

तू चाहती है मुझको रोके मुझे सदा पास रखे अपने
पर भेजती है तू ये कह के जा पूरे कर अपने सपने

अपने सपने भूल के मां तू मेरे सपने जीती है
होठों से मुस्काती है दूरी के आंसू पीती है

बस एक बार तू कह दे मां मैं पास तेरे रुक जाऊंगा
गोद में तेरी सर होगा मै वापस कभी ना जाऊंगा।

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