किंग ऑफ पॉप के अँधेरे-उजाले

NDND
अगले अगस्त में 51 के हो जाते। अपनी उम्र के ढलते वर्षों में भी उनमें कितनी ऊर्जा, उमंग और उत्साह था इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे अपने 50 कंसर्ट की तैयारी में जुटे थे। 13 जुलाई 2009 से लेकर छह मार्च 2010 के बीच वे पचास कंसर्ट करने वाले थे। और खास बात तो यह है कि इन पचासों कंसर्ट के सारी टिकटें बिक चुकी थीं। यानी वे जिंदा होते तो इन कंसर्ट से उन्हें पचास करोड़ पौंड की आय होती।

ये आँकड़े क्या कहते हैं? यही न कि इस बूढ़े होते डांसर में अभी भी इतनी ताकत बची थी कि वे अपने जादुई डांस से एक बार फिर सबको चमत्कृत कर सके। हिस्ट्री गवाह है कि उनके सारे शोज हंगामाखेज और हैरतअंगेज रहे हैं। उसके तमाम वर्ल्ड टूर रिकॉर्डतोड़ रहे हैं।

एमटीवी से लेकर बिल बोर्ड तक के चार्ट में उसके एलबम टॉप पर रहे हैं। बिलबोर्ड- पर तो उनका एलबम हिस्ट्री लगातार अस्सी सप्ताहों तक टॉप पर रहा औऱ दुनियाभर में इसकी 109 मिलियन कॉपीज बिक गई। यह एक उदाहरण है। उनके तमाम सिंगल, युगल औऱ सामूहिक एलबम खूब बिके, खूब सराहे गए।

उनके एक गीत का फिल्मांकन बहुत ही दिलचस्प हैं जिसमें कम्युनिस्टों का हंसिया-हथौडे का झंडा बताया गया है, लाल सेना का मार्च बताया गया है, माओ की मूर्ति नीचे उतारी जाती बताई गई है और एक सैनिक की वेशभूषा में माइकल जैक्सन को ऊँचा और ऊँचा शिखर पर जाता बताया गया है। माओ की मूर्ति नीचे उतरती है और जैक्सन की मूर्ति ऊपर प्रतिष्ठित होती है।

निश्चित ही इसमें चीन के प्रति अमेरिकी राजनीति का लोकप्रिय विमर्श पढ़ा जा सकता है। लेकिन इसमें कोई दो मत नहीं कि वे किंग ऑफ पॉप हैं। ठीक इसी तरह से ब्राजील के रिओ डि जेनरो में उनका एक गीत फिल्माया गया था दे डोंट केअर अबाऊट अस। इसमें इस शहर की गलियाँ और गरीबी की सचाइयाँ फिल्माई गईं थी और साथ ही यह दर्शाया गया था कि कैसे मानवाधिकारों का हनन होता है।

इस वीडियो को लेकर उनकी आलोचना की गई थी कि यह उनका एंटी सेमेटिक रूख है। इससे उनके मित्र और हॉलीवुड के निर्देशक स्टीवन स्पिलबर्ग भी नाराज हुए। लेकिन माइकल जैक्सन समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए गरीबों से लेकर बच्चों, शरणार्थियों से लेकर युद्ध से आहत बच्चों के लिए चैरिटी करते रहे हैं।

उन्होंने नेल्सन मंडेला चिल्ड्रन फंड के लिए चैरिटी शो किए। यहाँ इस बात को रेखांकित किया ही जाना चाहिए कि माइकल जैक्सन ने जितनी डांस शैलियों का इस्तेमाल अपनी प्रस्तुतियों के लिए किया उतना किसी भी सिंगर-डांसर ने नहीं। आज ब्रिटनी स्पीयर्स और बियोंस नोल्स उसी जमीन पर इतराती फिरती हैं जो माइकल जैक्सन ने बनाई है।

लेकिन यह कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि उनका बचपन बदसूरत रहा है। वे अपने ही पिता के हाथों हिंसा औऱ यौनदुराचारों के शिकार हुए। इन दुराचारों के दुःस्वप्नों ने जिंदगी भर उनका पीछा नहीं छोड़ा। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि कभी कभी मैं आधी रात को नींद मे चौंककर उठ जाता हूँ कि कोई मेरा किडनैप कर लेगा।

उनके कैरियर को सबसे बड़ा झटका उस वक्त लगा जब 1993 में एक बच्चे जॉर्डन चैंडलर ने अपने पिता के साथ उन पर चाइल्ड एब्यूस का आरोप लगाया। कैलिफोर्नियों में इस केस को लेकर जो ट्रायल हुआ उस वक्त उनकी एक झलक पाने के लिए तैंतीस देशों के लाखों प्रशंसक मौजूद थे। जाहिर है उनकी लोकप्रियता में कतई कमी नहीं आई थी और लोग उनको लेकर उन्मादी होने की हद तक क्रेजी थे। और वे भी अपने प्रशंसकों से बेहद प्यार करते थे।

लेकिन मीडिया से उनके संबंध हमेशा खराब रहे। विशेषकर टेबलॉइड अखबारों से। इनमें उनके प्रति किए गए कुप्रचार लगातार सुर्खियाँ बनते रहे। एक स्टोरी यह छापी गई कि वे अपनी उम्र की गति को रोकने के लिए हाइपर बेरिक आक्सीजन चैम्बर में सोए।

एक खबर यह छापी गई कि उनके पास एलिफेंट मैन की हड्डियाँ हैं। एक बार तो मीडिया से चिढ़कर उन्होंने कहा था कि क्यों नहीं आप कहते कि कि मैं जिंदा मुर्गे खाता हूँ और आधी रात को वुडू डांस करता हूँ। आप क्यों नहीं कहते कि मैं मंगल ग्रह से आया एक एलियन हूँ। मैं जानता हूँ लोग आपकी बात पर सहज ही विश्वास कर लेंगे कि क्योंकि आप रिपोर्टर हैं। लेकिन मैं ये बातें कहूँगा तो लोग विश्वास नहीं करेंगे। वे कहेंगे कि माइकल जैक्सन झूठ बोलता है।

यह सही है कि अपनी उम्र को छुपाने के लिए उन्होंने चार-पाँच बार राइनोप्लास्टी करवाई। दो बार यह सर्जरी कराने के बाद उन्हें साँस की तकलीफ की शिकायत हुई थी और उन्होंने दूसरे एक्सपर्ट डॉक्टर से यह सर्जरी करवाई। उन्होंने फेसलिफ्ट सर्जरी करवाई। अपनी त्वचा के रंग को बदलने की ब्लीचिंग करवाई और नोजल सर्जरी भी। उन्हें विटिलिगो और लुपस जैसी बीमारियाँ हुईं यानी वे सनलाइट से भी प्रभावित होने लगे थे। अपने डांसर की फिजिक के लिए वे डाइटिंग करते थे और शुद्ध शाकाहारी हो गए थे। इसी कारण एनोरेक्सिया नर्वोसा के भी शिकार हुए। उनकी हालत लगातार नाजुक होती गई।

लंबी कानूनी लड़ाई से वे मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर हो गए थे। कहा जाता है कि इसी कारण उन्होंने कानूनी पचड़ों से बचने के लिए कोर्ट से बाहर कई बार समझौतों की कोशिशें भी कीं। अपनी ऑटोबायोग्राफी मूनवाक में उन्होंने अपने ऊपर लगे कई आरोपों को नकारा और अपने कटु अनुभवों का बाँटा ।

रवींद्र व्यास|
वे कई तरह एलर्जी के शिकार हो गए थे और उन्होंने एक नर्स से शादी की थी जो उनका इलाज कर रही थी। इसके पहले उन्होंने एल्विस प्रीस्ले की बेटी लिजा प्रीस्ले से शादी की थी । दो साल बाद उनका तलाक हो गया था। लेकिन आज यदि वे जिंदा होते तो अपने वर्ल्ड टूर के जरिये फिर से पॉप की दुनिया में अपना जलवा बिखरते। इस विलक्षण सिंगर-डांसर के अपने अंधेरे-उजाले हैं लेकिन इस के बावजूद वे हमेशा अपने इनोवेटिव डांस के लिए ही याद रखे जाएँगे।



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