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महाभारत युद्ध जीत कर भी हार गए थे पांडव और श्रीकृष्ण?

सोमवार,फ़रवरी 24, 2020
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यह कहानी ऐसे कर्मों के फल भी है जिसे आपने कभी नहीं किया। फिर भी आपको कैसे यह दोष लगा? जानिए महाभारत की दिलचस्प कहानी।
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महाभारत में कुं‍ती पुत्र युधिष्ठिर, अर्जुन और भीम एवं माद्री पुत्र नकुल और सहदेव की पत्नी द्रौपदी थीं। राजा द्रुपद की बेटी द्रौपदी को पांचाली भी कहा जाता है। कृष्ण और द्रौपदी में क्या रिश्ता था? आओ जानते हैं।
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भारत में चाणक्य से पूर्व कई महान नीतिज्ञ हुए। जैसे भीष्म, विदुर, मनु, चर्वाक, शुक्राचार्य, बृहस्पति, परशुराम, गर्ग आदि अनेकों नीतिज्ञ हुए हैं। चाणक्य के बाद भी कई महान नीतिज्ञ हुए हैं जैसे भर्तृहरि, हर्षवर्धन, बाणभट्ट आदि। विदुर धृतराष्ट्र के सौतेले ...
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गांधारी गांधार देश के 'सुबल' नामक राजा की कन्या थीं। गांधार की होने के कारण उसे गांधारी कहा जाता था। गांधार आज के अफगानिस्तान का एक क्षेत्र था जिसे आज कंधार कहा जाता है। गांधारी के भाई का नाम शकुनि था। शकुनि दुर्योधन का मामा था। वह यह हस्तिनापुर के ...
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शांतनु के गंगा से देवव्रत (भीष्म) हुए। भीष्म ने ब्रह्मचर्य की प्रतिज्ञा ली थी इसलिए यह वंश आगे नहीं चल सका। भीष्म अंतिम कौरव थे। आओ जानते हैं भीष्म की मृत्यु के 5 रहस्य।
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धर्म युद्ध को क्रूसेड या जिहाद की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। विश्व इतिहास में महाभारत के युद्ध को धर्मयुद्ध के नाम से जाना जाता है।
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पुत्र की कामना से शांतनु के पिता प्रतीप गंगा के किनारे तपस्या कर रहे थे। उनके तप, रूप और सौन्दर्य पर मोहित होकर गंगा उनकी दाहिनी जंघा पर आकर बैठ गईं और कहने लगीं, 'राजन! मैं आपसे विवाह करना चाहती हूं। मैं जह्नु ऋषि की पुत्री गंगा हूं।'
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महाभारत और पुराणों में यवनों का उल्लेख मिलता है। ये यवन कौन थे इस संबंध में पुराण, महाभारत में कुछ और ही उल्लेख मिलता है जबकि भारतीय इतिहास के जानकार कुछ और ही कहते हैं। यहां प्रस्तुत है पुराण और महाभारत के अनुसार यवन के बारे में संक्षिप्त जानकारी।
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महाभारत काल में यहा युद्ध में कौरव, पांडव या अन्य के कुछ पुत्र बहुत चर्चा में रहे हैं। आज भी उन पुत्रों की चर्चा होती है। आओ जानते हैं उन्हीं में से 8 पुत्रों का परिचय।
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महाभारत काल में ऐसे कई लोग रहे हैं जिनको हम मजेदार, रोचक या रोमांचक कह सकते हैं, लेकिन जब हम मात्र 5 का चयन करते हैं तो आपको भी जानकर हैरानी होगी और आप भी इससे सहमत होंगे। हालांकि हर व्यक्ति की नजर में अलग अलग किरदार हो सकते हैं। यहां हमने सबसे रोचक ...
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भगवान श्रीकृष्ण का महिलाओं के प्रति विशेष अनुराग था और महिलाएं भी उनके प्रति विशेष अनुराग रखती थीं। इसके पीछे कई कारण हैं। पहला यह कि वे महिलाओं की संवेदना और उनकी भावनाओं को समझते थे, दूसरा यह कि वे उनका विशेष सम्मान करते थे, तीसरा यह कि वे उनकी ...
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हिन्दू धर्म के एकमात्र धर्मग्रंथ है वेद। वेदों के चार भाग हैं- ऋग, यजु, साम और अथर्व। वेदों के सार को उपनिषद कहते हैं और उपनिषदों का सार या निचोड़ गीता में हैं। उपनिषदों की संख्या 1000 से अधिक है उसमें भी 108 प्रमुख हैं। किसी के पास इतना समय नहीं है ...
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महाभारत में कौरव और पांडवों के बीच लड़ाई हुई थी, लेकिन कौरव और पांडव दोनों ही कुरुवंश से नहीं थे। वैसे देखा जाए तो कुरुवंश का अंतिम व्यक्ति भीष्म पितामह ही थे। लेकिन पुराणों के अनुसार उस काल का अंतिम शासक निचक्षु था। पुराणों के अनुसार हस्तिनापुर ...
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गांधारी जब गर्भवती थी तब धृतराष्ट्र की सेवा आदि कार्य करने के लिए एक वणिक वर्ग की दासी रखी गई थी। धृतराष्ट्र ने उस दासी से ही सहवास कर लिया। सहवास के कारण दासी भी गर्भवती हो गई। उस दासी से एक पुत्र उत्पन्न हुआ जिसका नाम युयुत्सु रखा गया। उल्लेखनीय ...
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भगवान श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व बहुत ही रहस्यमयी है। उन्होंने गीता के रूप में संसार को जो ज्ञान दिया है उसमें धर्म, दर्शन और अध्यात्म की सभी धाराएं समाहित है। आओ जानते हैं उनकी 3 माताओं के बारे में संक्षिप्त जानकारी।
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अर्जुन के 3 पुत्र थे। द्रौपदी से जन्मे अर्जुन के पुत्र का नाम श्रुतकर्मा था। द्रौपदी के अलावा अर्जुन की सुभद्रा, उलूपी और चित्रांगदा नामक 3 और पत्नियां थीं। सुभद्रा से अभिमन्यु, उलूपी से इरावन, चित्रांगदा से बभ्रुवाहन नामक पुत्रों का जन्म हुआ। कहते ...
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कलियुग कार्तिक मास की शुक्ल पंचमी तिथि को पांडव पंचमी पर्व के रूप में मनाया जाता है। पांडु के पुत्र होने के कारण महाभारत के पांचों योद्धाओं को पांडव कहा जाता था। आज इनके जन्म के संबंध में जानते हैं रोचक कथा।
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महाभारत में धृतराष्ट्र की भूमिका बहुत ही अजब थी। कई पाप किए जिसका परिणाम भी छेलना पड़ा। सबसे बड़ा परिणामय यह कि प्रारब्ध के चलते अंधा पैदा होना पड़ा। दरअसल धृतराष्ट्र ऋषि वेद व्यास के पुत्र थे। आप सोच रहे होंगे ऐसा कैसे? तो आओ जाने हैं धृतराष्ट्र के ...
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रामायण काल में दीपोत्सव मनाए जाने का जिक्र मिलता है। राम के अयोध्या आगमन के दौरान दीपोत्सव मनाया गया था। लेकिन क्या महाभारत काल में भी दिवाली मनाई जाती थी? इस संबंध में दो घटनाएं जुड़ी हुई है।
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