0

Again Ramayan and Mahabharat : रामायण बनाम महाभारत, दो ग्रंथों की भिन्नता और समानताएं

सोमवार,मार्च 30, 2020
ramayan and mahabharat
0
1
भगवान श्री कृष्ण की 8 ही पत्नियां थीं यथा- रुक्मणि, जाम्बवन्ती, सत्यभामा, कालिन्दी, मित्रबिन्दा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा। आओ जानते हैं सत्यभामा के संबंध में 7 खास बातें।
1
2
भगवान श्रीकृष्ण को हर समय एक देवी साथ देती थी। महाभारत के युद्ध के पूर्व भी श्रीकृष्ण ने माता की पूजा की थी। आओ जानते हैं कि वे कौनसी देवी थी।
2
3
महाभारत की गाथा में कौरवों के मामाश्री शकुनि को अपनी कुटिल बुद्धि के लिए विख्‍यात माना जाता है। छल, कपट और दुष्कृत्यों में माहिर शकुनि ने युद्ध तक पांडवों के विनाश के लिए कई चालें चली। कहते हैं कि इन्हीं चालों के कारण पांडवों के जीवन में उथल पुथल ...
3
4
कुंती एक अद्भुत महिला थीं। पति की मृत्यु के बाद कैसे उन्होंने अपने पुत्रों को हस्तिनापुर में दालिख करवाकर गुरु द्रोणाचार्य से शिक्षा दिलवाई और अंत में उन्हें राज्य का अधिकार दिलवाने के लिए प्रेरित किया यह सब जानना अद्भुत है। आओ जानते हैं कुंती के 6 ...
4
4
5
महाभारत की घटनाओं और ज्ञान का रहस्य अभी भी बरकरार है। ऐसे में एक आश्चर्य और रहस्य आज भी बरकरार है कि आखिर महाभारत के युद्ध में जहां कृष्ण के साथ 8 अंक जुड़ा रहा वहीं इस युद्ध में 18 का अंक की समानता का रहस्य क्यों है?
5
6
युद्ध का अंत हो चुका था और पांडु पुत्र भीम ने धृतराष्ट्र के पुत्र दुर्योधन का वध कर दिया था। इसको लेकर धृतराष्ट्र के मन में क्रोध और बदले की भावना प्रबल हो उठी थी। अत: मौका पाकर धृतराष्ट्र भीम को मार डालना चाहते थे।
6
7
धृतराष्ट्र आंखों से ही नहीं मन और बुद्धि से भी अंधे थे। उन्होंने अपने जीवन में वैसे तो कई पाप किए थे लेकिन यहां जानिए उनके द्वारा किए गए 5 पापों के बारे में।
7
8
पांडु के पांच में से दूसरे पुत्र का नाम भीम था जिन्हें भीमसेन भी कहते थे। कहते हैं कि भीम में दस हजार हाथियों का बल था और वह गदा युद्ध में पारंगत था। एक बार उन्होंने अपनी भुजाओं से नर्मदा का प्रवाह रोक दिया था। लेकिन वे हनुमानजी की पूंछ को नहीं उठा ...
8
8
9
भगवान श्रीकृष्ण का धर्म महिलाओं का ही धर्म है। श्रीकृष्ण के माध्यम से हजारों महिलाओं ने मोक्ष को पाया था। आओ जानते हैं कि उन्होंने अपने जीवन में किन किन महिलाओं के सम्मान की रक्षा की, उनकी इच्छाओं की पूर्ति की और उनके जीवन को सुरक्षित बनाया।
9
10
कर्ण में अच्छाइयां भी थी तो बुराइयां भी। यदि कर्ण थोड़ा बहुत सोचते तो कौरव पक्ष महाभारत का युद्ध जीत सकते थे। कर्ण के पास अर्जुन से ज्यादा शक्तिशाली धनुष और बाण थे और सबसे ज्यादा उसमें शक्तियां थीं। कर्ण के विजय धनुष में ऐसी खूबियां थीं, जो अर्जुन ...
10
11
कर्ण एक महान योद्धा थे। वे चाहते तो युद्ध के पहले दिन ही पांडवों को मार देते लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सकता। इसका कारण दुर्योधन द्वारा घटोत्चक पर कर्ण को अमोघ अस्त्र चलाने का कहना, दूसरा कुंती का वचन और तीसरा कृष्ण की नीति। आओ जानते हैं संक्षिप्त में।
11
12
इस युद्ध में कौरवों ने 11 अक्षौहिणी तथा पांडवों ने 7 अक्षौहिणी सेना एकत्रित कर लड़ाई लड़ी थी। कुल अनुमानित 45 लाख की सेना के बीच महाभारत का युद्ध 18 दिनों तक चला और इस युद्ध में कुल 18 योद्धा ही जीवित बचे थे। महाभारत के युद्ध के पश्चात कौरवों की तरफ ...
12
13
यह कहानी ऐसे कर्मों के फल भी है जिसे आपने कभी नहीं किया। फिर भी आपको कैसे यह दोष लगा? जानिए महाभारत की दिलचस्प कहानी।
13
14
महाभारत में कुं‍ती पुत्र युधिष्ठिर, अर्जुन और भीम एवं माद्री पुत्र नकुल और सहदेव की पत्नी द्रौपदी थीं। राजा द्रुपद की बेटी द्रौपदी को पांचाली भी कहा जाता है। कृष्ण और द्रौपदी में क्या रिश्ता था? आओ जानते हैं।
14
15
भारत में चाणक्य से पूर्व कई महान नीतिज्ञ हुए। जैसे भीष्म, विदुर, मनु, चर्वाक, शुक्राचार्य, बृहस्पति, परशुराम, गर्ग आदि अनेकों नीतिज्ञ हुए हैं। चाणक्य के बाद भी कई महान नीतिज्ञ हुए हैं जैसे भर्तृहरि, हर्षवर्धन, बाणभट्ट आदि। विदुर धृतराष्ट्र के सौतेले ...
15
16
गांधारी गांधार देश के 'सुबल' नामक राजा की कन्या थीं। गांधार की होने के कारण उसे गांधारी कहा जाता था। गांधार आज के अफगानिस्तान का एक क्षेत्र था जिसे आज कंधार कहा जाता है। गांधारी के भाई का नाम शकुनि था। शकुनि दुर्योधन का मामा था। वह यह हस्तिनापुर के ...
16
17
शांतनु के गंगा से देवव्रत (भीष्म) हुए। भीष्म ने ब्रह्मचर्य की प्रतिज्ञा ली थी इसलिए यह वंश आगे नहीं चल सका। भीष्म अंतिम कौरव थे। आओ जानते हैं भीष्म की मृत्यु के 5 रहस्य।
17
18
धर्म युद्ध को क्रूसेड या जिहाद की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। विश्व इतिहास में महाभारत के युद्ध को धर्मयुद्ध के नाम से जाना जाता है।
18
19
पुत्र की कामना से शांतनु के पिता प्रतीप गंगा के किनारे तपस्या कर रहे थे। उनके तप, रूप और सौन्दर्य पर मोहित होकर गंगा उनकी दाहिनी जंघा पर आकर बैठ गईं और कहने लगीं, 'राजन! मैं आपसे विवाह करना चाहती हूं। मैं जह्नु ऋषि की पुत्री गंगा हूं।'
19