dharma sangrah

Ramayan : जामवंत और रावण का वार्तालाप कोसों दूर बैठे लक्ष्मण ने कैसे सुन लिया?

Updated: गुरुवार, 16 मई 2024 (19:39 IST)
jambavan vs ravana
jambavan vs ravana: तमिल भाषा में लिखी महर्षि कम्बन की रामायण 'इरामावतारम्' में एक कथा का उल्लेख मिलता है। 'इरामावतारम्' रामायण की कथा अनुसार भगवान श्रीराम ने तमिलनाडु के एक विशेष स्थान पहुंचकर युद्ध की तैयारी की और रावण से युद्ध करने के पूर्व वहां पर भगवान शिव के 'शिवलिंग' की स्थापना करने का विचार किया। रामेश्वरम में शिवलिंग की स्थापना करने हेतु किसी योग्य आचार्य या पुरोहित की आवश्यकता था। ऐसे में विद्वानों ने श्रीराम को रावण को बुलाने के लिए कहा, क्योंकि रावण विद्वान पंडित और पुरोहित था और वह शिवभक्त भी था।
ALSO READ: रावण का अहंकार तोड़ेंगे हनुमान, श्रीमद् रामायण में शुरू होने जा रहा लंका दहन अध्याय
अंत में श्रीराम ने जामवंतजी को रावण को आचार्यत्व का निमंत्रण देने के लिए लंका भेजा। जामवंतजी भी कुंभकर्ण की तरह आकार में बहुत बड़े थे। वे जब लंका पहुंचे तो लंका के प्रहरी भी हाथ जोड़कर उनको रावण के महल की ओर जाने वाला मार्ग दिखा रहे थे। महल के द्वार पर स्वयं रावण उनके अभिनंदन के लिए पहुंचा।
 
तब जामवंत जी ने मुस्कुराते हुए कहा कि मैं इस अभिनंदन का पात्र नहीं हूं। मैं वनवासी श्री राम का दूत बनकर आया हूं। उन्होंने तुम्हें सादर प्रणाम कहा है। यह सुनकर रावण ने कहा, 'आप हमारे पितामह के भाई हैं। इस नाते आप हमारे पूज्य हैं। आप कृपया आसन ग्रहण करें। यदि आप मेरा निवेदन स्वीकार कर लेंगे, तभी संभवतः मैं भी आपका संदेश सावधानी से सुन सकूंगा।'
ALSO READ: Mahabharat : महाभारत में जिन योद्धाओं ने नहीं लड़ा था कुरुक्षेत्र का युद्ध, वे अब लड़ेंगे चौथा महायुद्ध
जामवन्त ने आसन ग्रहण करने के बाद पुनः कहा, 'हे रावण! वनवासी प्रभु श्री राम ने सागर सेतु निर्माण के उपरांत अब यथाशीघ्र महेश्वर लिंग विग्रह की स्थापना करने का विचार प्रकट किया है। इस अनुष्ठान को सम्पन्न कराने के लिए उन्होंने ब्राह्मण, वेदज्ञ और शैव रावण को आचार्या पद पर वरण करने की इच्छा प्रकट की है। मैं उनकी ओर से आपको आमंत्रित करने आया हूं।'
 
रावण ने जामवंत की यह बात सुनकर हंसते हुए पूछा, 'क्या राम द्वारा शिवलिंग स्थापना लंका विजय की कामना से किया जा रहा है?
 
जामवंत ने कहा, 'आपका अनुमान सही है। श्रीराम की महेश्वर के चरणों में पूर्ण भक्ति है। जीवन में प्रथम बार किसी ने रावण को आचार्य बनने योग्य जाना है। क्या रावण इतना अधिक मूर्ख कहलाना चाहेगा कि वह भारतवर्ष के प्रथम प्रशंसित महर्षि पुलस्त्य के सगे भाई महर्षि वशिष्ठ के यजमान का आमंत्रण और अपने आराध्य की स्थापना हेतु आचार्य पद अस्वीकार कर दे?..कुछ देर रुकने के बाद जामवंत जी ने कहा, लेकिन हां। यह जांच तो नितांत आवश्यक है ही कि जब वनवासी श्री राम ने इतना बड़े आचार्य पद पर पदस्थ होने हेतु आमंत्रित किया है तब वह भी यजमान पद हेतु उचित अधिकारी हैं भी अथवा नहीं।
ALSO READ: महाभारत काल के टीले लाक्षागृह पर आया बड़ा फैसला, 53 वर्ष से चल रहा था वाद
जामवंतजी के इस तरह बात पर रावण थोड़ा क्रुद्ध हो गया और उसने कहा, 'जामवंत जी। आप जानते ही हैं कि त्रिभुवन विजयी अपने इस शत्रु की लंकापुरी में आप पधारे हैं। यदि हम आपको यहां बंदी बना लें और आपको यहां से लौटने न दें तो आप क्या करेंगे?
 
रावण के ये वचन सुनकर जामवंत खुलकर हंसे और कहा, 'मुझे निरुद्ध करने की शक्ति समस्त लंका के दानवों के संयुक्त प्रयास में नहीं है, किन्तु मुझे किसी भी प्रकार की कोई विद्वत्ता प्रकट करने की न तो अनुमति है और न ही आवश्यकता।' 
 
कुछ देर रुकने के बाद जामवंत जी बोले, हे रावण! ध्यान रहे, मैं अभी एक ऐसे उपकरण के साथ यहां उपस्थित हूं, जिसके माध्यम से धनुर्धारी लक्ष्मण यह हम दोनों की यह वार्ता देख और सुन रहे हैं। जब मैं वहां से चलने लगा था तभी से धनुर्वीर लक्ष्मण वीरासन में बैठे हुए हैं। उन्होंने आचमन करके अपने तूणीर से पाशुपतास्त्र निकाल कर संधान कर लिया है और मुझसे कहा है कि जामवन्तजी! रावण से कह देना कि यदि आप में से किसी ने भी मेरा विरोध प्रकट करने की चेष्टा की तो यह पाशुपतास्त्र समस्त दानव कुल के संहार का संकल्प लेकर तुरन्त छूट जाएगा। इस कारण भलाई इसी में है कि आप मुझे अविलम्ब वांछित प्रत्युत्तर के साथ सकुशल और आदर सहित धनुर्धर लक्ष्मण के दृष्टिपथ तक वापस पहुंचने की व्यवस्था करें।'
ALSO READ: एकश्लोकी रामायण : मात्र एक श्लोक में संपूर्ण रामायण, राम कथा
लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

गुप्त नवरात्रि में ये मंत्र जप लिया तो तुरंत ही दूर होंगे संकट और माता का मिलेगा आशीर्वाद

गुंडिचा मंदिर क्यों है जगन्नाथ रथयात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव? जानिए 5 खास बातें

भगवान जगन्नाथ की मौसी कौन हैं? जानिए रथयात्रा से जुड़ी यह रोचक परंपरा

गीता के छठे अध्याय के 10वें श्लोक की सही व्याख्या क्या है? मौलाना जरजिस अंसारी के दावे की पड़ताल

पुरी के जगन्नाथ मंदिर और रथयात्रा का इतिहास: कब, कैसे और क्यों हुई शुरुआत?

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश, 5 राशियों के शुरू होंगे अच्छे दिन; धन-करियर में मिल सकता है बड़ा लाभ

Vijaya Parvati Vrat 2026: विजया पार्वती व्रत कब से होगा प्रारंभ, क्या है इस व्रत का महत्व

Asha Dashami Vrat 2026: आशा दशमी का महत्व और कथा

Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (23 जुलाई, 2026)

23 July Birthday: आपको 23 जुलाई, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

अगला लेख