biodatamaker

रामायण और महाभारत काल में थे महर्षि दुर्वासा ऋषि

Updated: मंगलवार, 6 अप्रैल 2021 (12:45 IST)
ब्रह्मा के पुत्र अत्रि ने कर्दम ऋषि की पुत्री अनुसूया से विवाह किया था। अनुसूया की माता का नाम देवहूति था। अत्रि-दंपति की तपस्या और त्रिदेवों की प्रसन्नता के फलस्वरूप विष्णु के अंश से महायोगी दत्तात्रेय, ब्रह्मा के अंश से चन्द्रमा तथा शंकर के अंश से महामुनि दुर्वासा, महर्षि अत्रि एवं देवी अनुसूया के पुत्र रूप में आविर्भूत हुए। इनके ब्रह्मावादिनी नाम की कन्या भी थी। महर्षि अत्रि सतयुग के ब्रह्मा के 10 पुत्रों में से थे तथा उनका आखिरी अस्तित्व चित्रकूट में सीता-अनुसूया संवाद के समय तक अस्तित्व में था। उन्हें सप्तऋषियों में से एक माना जाता है और ऋषि अत्रि पर अश्विनीकुमारों की भी कृपा थी। 
 
1. महर्षि दुर्वासा के बारे में सभी जानते हैं कि वे कितने क्रोधित ऋषि हैं। रामायण अनुसार महर्षि दुर्वासा राजा दशरथ के भविष्यवक्ता थे। इन्होंने रघुवंश के लिए बहुत भविष्यवाणियां भी की थी। 
 
2. एक कथा के अनुसार इन्द्र ने अंहकारवश वैजयंतीमाला का अपमान किया था, परिणामस्वरूप महालक्ष्मी उनसे रुष्ट हो गईं और उन्हें दर-दर भटकना पड़ा था। देवराज इन्द्र अपने हाथी ऐरावत पर भ्रमण कर रहे थे। मार्ग में उनकी भेंट महर्षि दुर्वासा से हुई। उन्होंने इन्द्र को अपने गले से पुष्पमाला उतारकर भेंटस्वरूप दे दी। इन्द्र ने अभिमानवश उस पुष्पमाला को ऐरावत के गले में डाल दिया और ऐरावत ने उसे गले से उतारकर अपने पैरों तले रौंद डाला। अपने द्वारा दी हुई भेंट का अपमान देखकर महर्षि दुर्वासा को बहुत क्रोध आया। उन्होंने इन्द्र को लक्ष्मीहीन होने का श्राप दे दिया।
 
3. कुंती का विवाह राजा पाण्डु से हुआ था। बाल्यावस्था में कुंती ने ऋषि दुर्वासा की सेवा की थी। इसी के फलस्वरूप दुर्वासा ने कुंती को एक मंत्र दिया जिससे वह किसी भी देवता का आह्वान कर उससे पुत्र प्राप्त कर सकती थी। विवाह से पूर्व इस मंत्र की शक्ति देखने के लिए एक दिन कुंती ने सूर्यदेव का आह्वान किया जिसके फलस्वरूप कर्ण का जन्म हुआ।
 
4. दूसरी ओर महाभारत में महर्षि दुर्वासा द्रौपदी की परीक्षा लेने के लिए अपने दस हजार शिष्यों के साथ उनकी कुटिया पहुंचे थे। दुर्योधन ने ही उन्हें वहां भेजा था और वह भी ऐसे समय जबकि द्रौपदी समेत सभी पांडव भोजन करने के बाद विश्राम कर रहे थे। युधिष्ठिर के पास उस वक्त सूर्यदेव से प्राप्त एक ऐसा चमत्कारिक अक्षय पात्र था जिसमें से जितना चाहो भोजन प्राप्त कर सकते थे। उस वक्त दुर्वासा ऋषि अपने 10 हजार शिष्यों के साथ भोजन करके बहुत प्रसन्न हुए थे।
 
5. दूसरी घटना में स्नान करते समय महर्षि दुर्वासा का वस्त्र नदी के प्रवाह में प्रवाहित हो गया। कुछ दूरी पर द्रौपदी भी स्नान कर रहीं थीं। उनकी यह स्थिति देखकर द्रौपदी ने तत्काल अपने अंचल का एक टुकड़ा फाड़ कर ऋषि को प्रदान किया। इससे प्रसन्न होकर महर्षि दुर्वासा ने उन्हें वर दिया कि यह वस्त्रखण्ड वृद्धि को प्राप्त कर तुम्हारी लज्जा का निवारण करेगा। 
 
6. श्रीकृष्ण और जामवंती के पुत्र साम्ब ने दुर्वासा मुनि का अपमान किया था जिसके चलते उन्होंने यदुवंश के नाश का श्राप दे दिया था। 
 
7. दुर्वासा मुनि सतयुग, त्रेता एवं द्वापर तीनों युगों में मौजूद थे। पुराणों के अध्ययन से पता चलता है कि वशिष्ठ, अत्रि, विश्वामित्र, दुर्वासा, अश्वत्थामा, राजा बलि, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम, मार्कण्डेय ऋषि, वेद व्यास और जामवन्त आदि कई ऋषि, मुनि और देवता हुए हैं जिनका जिक्र सभी युगों में पाया जाता है। कहते हैं कि ये आज सशरीर जीवित हैं।

लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

Show comments

सभी देखें

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान

Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म

मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव

Rakhi 2026: कब है रक्षा बंधन का त्योहार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त?

चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय

सभी देखें

07 August Birthday: आपको 7 अगस्त, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (7 अगस्‍त, 2026)

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 07 अगस्‍त 2026: शुक्रवार का पंचांग और शुभ समय

Kamika Ekadashi 2026 : सावन में कब है कामिका एकादशी? जानें क्यों खास है यह एकादशी, जानें पूजा विधि और कथा

बुधादित्य राजयोग से बदलेगी इन 5 राशियों की तकदीर, करियर और कारोबार में मिल सकती है बड़ी सफलता

अगला लेख