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सरकार ने शराब ठेकेदारों से वसूले 23 करोड़, कुर्की की तैयारी

Updated: गुरुवार, 7 सितम्बर 2017 (16:49 IST)
इंदौर। मध्यप्रदेश के इंदौर जिले में शराब ठेकेदारों द्वारा बैंकों में भरे जाने वाले चालानों में हेरफेर के जरिए सरकारी खजाने को करीब 41.40 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाने के घोटाले में संबंधित ठेकेदारों से लगभग 23 करोड़ रुपए की राशि वसूल ली गई है, जबकि शेष रकम की वसूली के लिए आरोपियों की संपत्ति कुर्क करने की तैयारी की जा रही है। इस घोटाले के खुलासे के बाद प्रदेश सरकार को जिले के आबकारी अमले में बड़ा फेरबदल करना पड़ा है।
 
प्रदेश के वित्त और वाणिज्यिक कर मंत्री जयंत मलैया ने गुरुवार को यहां एक कार्यक्रम के दौरान बताया कि हमने इस घोटाले के 23 करोड़ रुपए ठेकेदारों से वसूल लिए हैं, शेष रकम की वसूली के लिए आरोपी ठेकेदारों की संपत्ति की कुर्की और नीलामी की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। 
 
मलैया ने बताया कि घोटाले के मामले में कर्तव्य की सीधी अनदेखी के कारण इंदौर जिले के आबकारी विभाग में पदस्थ सहायक आयुक्त समेतल 6 कारिंदों को निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही उपायुक्त और 19 अन्य कर्मचारी-अधिकारियों को स्थानांतरित कर दिया गया है, जो 3 साल से ज्यादा समय से जिले में पदस्थ थे। 
 
मंत्री ने कहा कि वे वित्त विभाग के अधिकारियों को इंदौर आकर घोटाले के बारे में पूरी जानकारी लेने और उचित कदम उठाने का निर्देश पहले ही दे चुके हैं।
 
शराब ठेकेदारों द्वारा जालसाजी के जरिए प्रदेश सरकार को करीब 41.40 करोड़ रुपए के राजस्व का चूना लगाने के घोटाले का खुलासा हाल ही में हुआ है। इसके बाद प्रशासन ने 10 शराब ठेकेदारों और उनके 6 साथियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज कराए हैं। पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है।
 
पुलिस के एक जांचकर्ता अधिकारी ने बताया कि शराब ठेकेदारों को ठेका नीलामी की राशि की किस्तों के भुगतान और मदिरा का कोटा खरीदने के लिए आबकारी विभाग के खाते में निश्चित अवधि में रकम जमा करनी होती है। यह रकम बैंक चालानों के जरिए जमा कराई जाती है।
 
उन्होंने बताया कि पुलिस को जांच में पता चला कि आरोपी ठेकेदारों ने पिछले 2 वर्ष के दौरान बैंक में तय राशि से कम रकम के चालान जमा कराए। लेकिन इस चालान की प्रति में पेन से हेर-फेर कर आबकारी विभाग को गलत सूचना दी कि उन्होंने बैंकों में तय राशि के चालान जमा कराए हैं। सिलसिलेवार फर्जीवाड़े से सरकारी खजाने को 41.40 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचा।
 
आरोप है कि आबकारी विभाग के कारिंदों ने यह जांचना भी मुनासिब नहीं समझा कि शराब ठेकेदारों की ओर से सरकारी खजाने में तय रकम जमा कराई जा रही है या नहीं? पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है। (भाषा) 
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