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इसलिए पेट्रोल को जीएसटी में शामिल नहीं करना चाहती मप्र सरकार

Updated: शनिवार, 12 अगस्त 2017 (19:18 IST)
इंदौर। पेट्रोलियम पदार्थों को माल और सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाए जाने की जरूरत पर जारी बहस के बीच मध्यप्रदेश सरकार इन वस्तुओं को नई कर प्रणाली में शामिल नहीं किए जाने के अपने पुराने रुख पर कायम है। प्रदेश के वित्त मंत्री जयंत मलैया ने राज्य सरकार की यह मंशा जताई है।
 
प्रदेश के वित्त मंत्री जयंत मलैया ने शनिवार को यहां एक बैठक के बाद कहा कि पेट्रोलियम पदार्थों पर वाणिज्यिक करों की वसूली से हमें जो राजस्व मिलता है, वह हमारे कुल वाणिज्यिक कर का करीब 35 प्रतिशत है, इसलिए हमें इन पदार्थों पर वाणिज्यिक कर वसूली रोकने में परेशानी है। 
 
उन्होंने कहा कि हमें सरकार चलाने, विकास और सामाजिक सरोकारों के कामों के लिए जाहिर तौर पर काफी धन की आवश्यकता पड़ती है। लिहाजा हम पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी के दायरे में लाए जाने के पक्ष में नहीं हैं। 
 
वित्त मंत्री ने हालांकि माना कि प्रदेश सरकार द्वारा पेट्रोलियम पदार्थों पर वसूले जाने वाले करों (वैट और प्रवेश कर) की दरें ऊंची हैं. लेकिन उन्होंने इस सिलसिले में सफाई भी दी. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर औद्योगिक उत्पादन गतिविधियां होने से इन सूबों को कई मदों में मोटा कर राजस्व हासिल होता है, लेकिन मध्यप्रदेश में दूसरे राज्यों के मुकाबले इस तरह की गतिविधियां कम हैं। इसलिए हमें पर्याप्त राजस्व हासिल करने के लिए पेट्रोलियम पदार्थों पर कर वसूली करनी पड़ती है। 
 
मलैया ने बताया कि प्रदेश में वित्तीय वर्ष 2016-17 में वाणिज्यिक करों की वसूली करीब 29,500 करोड़ रुपए रही थी। इसमें कर राजस्व में 14.5 प्रतिशत की दर से इजाफा हुआ है। 
 
वित्त मंत्री ने कहा कि वह प्रदेश में जीएसटी के क्रियान्वयन से काफी संतुष्ट हैं। जीएसटी परिषद इस प्रणाली में राज्यों की राय के आधार पर सर्वसम्मति से लगातार सुधार कर रही है। उन्होंने कहा कि देश के बीचों-बीच स्थित होने के कारण जीएसटी से मध्यप्रदेश को काफी फायदा होगा। जीएसटी के फायदों की वजह से सूबे में वस्तुओं के भंडारण और परिवहन की कारोबारी गतिविधियों में आने वाले दिनों में तेजी से इजाफा होगा।
 
प्रदेश के कारोबारी तबके में जीएसटी के विरोध के बारे में पूछे जाने पर वित्त मंत्री ने कहा कि माफ कीजिए, लेकिन नोटबंदी और जीएसटी जैसे कदमों से उन बहुत थोड़े से लोगों को तकलीफ हो रही है, जो ईमानदारी से धंधा नहीं करना चाहते हैं।
 
उन्होंने कांग्रेस के इस आरोप का जवाब भी दिया कि सत्तारूढ़ भाजपा प्रदेश पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ाती जा रही है। वित्त मंत्री ने कहा कि विकास और सामाजिक सरोकारों की योजनाओं के लिए हमें कर्ज लेने में कोई संकोच नहीं है, लेकिन इस बात को भी समझा जाना चाहिए कि भाजपा के मौजूदा राज में सूबे की विकास दर कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों के मुकाबले कहीं अधिक है। (भाषा) 

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