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moon and solar eclipse : 5 जून से 5 जुलाई के बीच तीन ग्रहण,जानिए देश-विदेश पर असर

Updated: गुरुवार, 4 जून 2020 (18:33 IST)
ज्योतिष अनुसार जब भी किसी महीने में दो से अधिक ग्रहण होते हैं और उन पर पाप ग्रहों का प्रभाव रहे तो वह समय जनता के लिए कष्टकारी साबित हुआ है। इस साल 5 जून से 5 जुलाई के बीच तीन ग्रहण लगने जा रहे हैं। जिनमें से दो ग्रहण भारत में दिखाई देंगे।
 
ज्योतिष अनुसार 21 जून को लगने वाला ग्रहण ज्यादा संवेदनशील होगा। जो मिथुन राशि और मृगशिरा नक्षत्र में लगेगा।
 
ग्रहण एक खगोलीय घटना है इसका जितना महत्व विज्ञान के लिए है उतना ही महत्व इसका ज्योतिष के नजरिए से भी है। मान्यता है कि जब भी ग्रहण लगता है तो उसका असर सभी राशि के जातकों पर पड़ता है। जून से जुलाई के महीने में तीन ग्रहण लगने जा रहे हैं। 5 जून को साल का दूसरा चंद्र ग्रहण लगेगा, 21 जून को सूर्य ग्रहण और फिर 05 जुलाई को फिर से चंद्र ग्रहण लगेगा। 
 
जानिए देश-विदेश पर असर 
 
ज्योतिष अनुसार जब भी किसी महीने में दो से अधिक ग्रहण आए और उन पर पाप ग्रहों का प्रभाव रहा तो वह समय जनता के लिए कष्टकारी साबित हुआ है। इस साल 5 जून से 5 जुलाई के बीच तीन ग्रहण लगने जा रहे हैं। जिनमें से दो ग्रहण भारत में दिखाई देंगे।

5 जून को लगने वाला ग्रहण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, अफ्रीका और भारत में भी दिखाई देगा। 21 जून को लगने वाला ग्रहण भारत समेत एशिया के कई अन्य इलाकों, यूरोप और अफ्रीका में भी दिखाई देगा। फिर 5 जुलाई को लगने वाला ग्रहण अफ्रीका और अमेरिका में भी नजर आएगा। ये ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा।
 
ज्योतिष अनुसार 21 जून को लगने वाला ग्रहण ज्यादा संवेदनशील होगा। जो मिथुन राशि और मृगशिरा नक्षत्र में लगेगा। इसलिए मिथुन राशि वालों पर इस ग्रहण का सबसे ज्यादा असर रहेगा। इस ग्रहण के दौरान कुल 6 ग्रह वक्री अवस्था में होंगे। मंगल जलीय राशि मीन में स्थित होकर सूर्य, बुध, चंद्रमा और राहु को देखेंगे जिससे अशुभ स्थिति का निर्माण होगा। जिस कारण संपूर्ण विश्व में बड़ी उथल पुथल मचेगी।
 
ज्योतिष अनुसार ग्रहों के वक्री होने से प्राकृतिक आपदाओं जैसे अत्याधिक वर्षा, समुद्री चक्रवात, तूफान, महामारी आदि से जन धन की हानि होने का खतरा है। भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश को जून के अंतिम माह और जुलाई में भयंकर वर्षा से जूझना पड़ सकता है। 
 
इस वर्ष मंगल जल तत्व की राशि मीन में पांच माह तक रहेंगे ऐसे में वर्षा काल में असामान्य रूप से अत्याधिक वर्षा और महामारी का भय रहेगा। शनि, मंगल और गुरु इन तीनों ग्रहों के प्रभाव से विश्व में आर्थिक मंदी का असर साल भर बना रहेगा। लेकिन भारत की कुंडली के ग्रह गोचर की स्थिति के मुताबिक भारत की अर्थव्यवस्था पटरी पर आ जाएगी। जिससे विश्व में भारत की साख बढ़ेगी।

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