कपिल शर्मा भड़के, धोनी को संन्यास की नसीहतें देने वालों को लताड़ा

देश के नंबर एक टीवी शो 'द कपिल शर्मा शो' के प्रस्तोता कपिल ने शनिवार को नेशनल टेलीवीजन पर उन लोगों को खासी लताड़
लगाई जो महेंद्र सिंह धोनी को संन्यास लेने की नसीहतें दे रहे हैं।

20 जुलाई को टीवी पर प्रसारित हुए एपिसोड में हास्य कलाकार कपिल शर्मा ने अपने शो की शुरुआत ही 'जजमेंट' से की। उन्होंने कहा कि जब महेंद्र सिंह धोनी दुर्भाग्य से रन आउट हो जाते हैं तो कई लोग कहने लग जाते हैं कि 'अब धोनी को संन्यास ले लेना चाहिए...अरे भाई धोनी संन्यास ले या न लें यह फैसला वो खुद करेंगे, आप उन्हें 'जज' करने वाले कौन होते है?'
'द कपिल शर्मा शो' काफी लोकप्रिय है और देश विदेश में करोड़ों लोग इस शो के दीवाने हैं। कपिल शर्मा ने धोनी को लेकर जो बात कहीं, वह कहां गलत थी। जब से विश्व कप के सेमीफाइनल मैच में धोनी रन आउट हुए हैं, तब से प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया हाथ धोकर उनके पीछे पड़ गया है कि 38 साल के इस खिलाड़ी को संन्यास ले लेना चाहिए।

कई पूर्व क्रिकेटर जिन्होंने धोनी के सामने अपना क्रिकेट कॅरियर शुरू किया था, वे भी उन्हें ससम्मान रिटायर होने के लिए लॉबिंग कर रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या धोनी के संन्यास लेने से सब चीजें दुरुस्त हो जाएंगी??

धोनी को मैदान पर खेलते हुए देखने वालों की संख्या करोड़ों में हैं जबकि कुछ 100 से भी कम लोग चाहते हैं कि माही अपना बल्ला टांग दें। दरअसल बहुत ही सुनियोजित ढ़ंग से एमएस धोनी को टीम इंडिया की वनडे टीम से बाहर किए जाने की जमीन तैयार की जा रही है ताकि माहौल बनाकर उन्हें संन्यास लेने की घोषणा पर मजबूर किया जा सके।

टीम इंडिया कोच रवि शास्त्री और कप्तान विराट कोहली जो चाहते हैं, वो हो रहा है। इनसे पूछा जाना चाहिए कि विश्व कप जैसे अहम सेमीफाइनल मुकाबले में न्यूजीलैंड के खिलाफ धोनी जैसे खिलाड़ी को नंबर 7 पर उतारना सही था?

नंबर 4 पर ऋषभ पंत, नंबर 5 पर हार्दिक पांड्या, नंबर 6 पर दिनेश कार्तिक और नंबर 7 पर धोनी मैदान पर आए। ऊपरी क्रम में आए तीनों बल्लेबाजों ने कुल मिलाकर जितने मैच खेले, उनसे कहीं ज्यादा अनुभवी धोनी थे। 240 रनों का लक्ष्य कोई बहुत बड़ा लक्ष्य नहीं था। यदि भारतीय टीम का थिंक टैंक धोनी को 4 नंबर पर उतारता तो इस मैच की तस्वीर ही कुछ अलग होती।

ऋषभ पंत, हार्दिक पांड्‍या और दिनेश कार्तिक तीनों ने गलत शॉट का चयन करके कैच आउट हुए थे। एक तरह से उन्होंने अपने विकेट थ्रो किए थे। दिनेश कार्तिक ने तो 18-20 गेंद का सामना करने के बाद खाता भी नहीं खोला था और जब 6 रन पर आउट हुए तब तक वे 25 गेंद बरबाद कर चुके थे।
घूम फिरकर वही सवाल सामने आता है कि धोनी को क्यों लगातार गलाया गया? जबकि 2019 के विश्व कप में उनका प्रदर्शन खराब नहीं था। उनकी खासियत यही है कि वे छोटी-छोटी पार्टनरशिप बिल्ट करते हैं। नजदीक के रन लेकर रोटेशन बनाए रखते हैं ताकि स्कोर बोर्ड चलता रहे। धोनी में वह कूवत भी है कि एक ओवर में 15 रन ठोंक दें।

यह सवाल अगले विश्व तक तक कायम रहेगा कि धोनी को क्यों 7वें नंबर पर उतारा गया? क्यों अनुभवहीन बल्लेबाजों को धोनी पर तरजीह दी गई? क्यों भारत के सबसे सफल कप्तान के साथ उस वक्त खिलवाड़ किया गया, जब वे अपना आखिरी विश्व कप खेल रहे थे?

धोनी की भारतीय क्रिकेट में क्या हैसियत है यह किसी से छुपी नहीं है। आईपीएल में माही की कप्तानी, माही का बल्ला और माही की रणनीति ने भारतीय क्रिकेटप्रेमियों को दीवाना बना रखा है। पूरा देश उन्हें खेलते हुए देखना चाहता है फिर क्यों चंद लोग उन्हें संन्यास लेने की सलाह दे रहे हैं?

धोनी ने 2019 के आईसीसी विश्व कप के 9 मैचों में 45.50 के औसत से 273 रन बनाए हैं, जिसमें 2 अर्धशतक शामिल हैं। धोनी ने 350 वनडे मैच खेले, और 50.58 के औसत से 10 हजार 773 रन बनाए, जिसमें 10 शतक और 73 अर्धशतक शामिल हैं। वनडे में उनके बल्ले से 826 चौके और 229 छक्के निकले। असल में धोनी भारतीय क्रिकेट के लीजेंड हैं और हमेशा बने रहेंगे...

 

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