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भारतीय रेल अब हर तरह के कोच बनाने में सक्षम, निर्यात पर नजर

Updated: बुधवार, 15 जनवरी 2020 (15:42 IST)
नई दिल्ली। भारतीय रेल ने हर तरह के कोच बनाने की क्षमता हासिल कर ली है और अब उसकी नजर घरेलू जरूरतें पूरी करने के साथ ही निर्यात बढ़ाने पर भी है।
 
रेलवे बोर्ड के सदस्य (चल परिसंपत्ति) राजेश अग्रवाल ने बताया कि पिछले साल भारतीय रेल ने वर्चुअल रियलिटी के माध्यम से यात्री कोच और माल ढुलाई वाले वैगनों की डिजाइनिंग क्षमता हासिल कर ली। अब वह किसी भी ग्राहक के अनुकूल कोच या वैगन डिजाइन करने में सक्षम है। इससे कोच निर्यात के बाजार में देश की हिस्सेदारी बढ़ाने की संभावना का द्वार खुल गया है। वर्तमान में कोच निर्यात का बाजार 100 अरब डॉलर से अधिक है जिसमें भारत की हिस्सेदारी 10 करोड़ डॉलर (0.1 प्रतिशत) है।
 
हर देश के कोच की डिजाइन अलग : अग्रवाल ने बताया कि हर देश में कोच की डिजाइनिंग अलग-अलग होती है। भारत के अलावा सिर्फ बांग्लादेश और पाकिस्तान में ही ब्रॉडगेज है। अफ्रीकी देशों में अलग तरह के गेज हैं, उत्तरी अमेरिका में अलग, दक्षिण अमेरिका में अलग और यूरोपीय देशों में अलग डिजाइन के कोच की जरूरत होती है।
 
उन्होंने बताया कि अभी भारत सीमित संख्या में बांग्लादेश और श्रीलंका को कोच निर्यात करता है। नई क्षमता हासिल करने के बाद भारतीय रेल की इकाई रिट्स लिमिटेड को मोजाम्बिक से कोच के ऑर्डर मिले हैं। वहां ‘केव’ गेज पर ट्रेनों का परिचालन होता है जिसके लिए कोच की डिजाइन अलग हो जाती है। इसके अलावा उत्तरी अमेरिका में ट्रेनों के पहिये और एक्सल निर्यात करने के विकल्प भी तलाशे जा रहे हैं। 
 
यात्री वाहनों के लिए अलग वैगन : हर प्रकार के वैगनों की डिजाइनिंग क्षमता हासिल करने का परिणाम यह हुआ है कि अब ट्रकों, ट्रैक्टरों और ज्यादा ऊँचाई वाले यात्री वाहनों के लिए भी वैगन बनाए जा सकते हैं। इनके प्रोटोटाइप तैयार हैं तथा कोई भी कंपनी इनके लिए रेलवे को ऑर्डर दे सकती है। यदि कोई कंपनी ऐसे वैगन चाहती है जिसमें नीचे दुपहिया वाहन और ऊपर कारें भेजी जा सकें तो उसके लिए भी प्रोटोटाइप तैयार कर लिया गया है। 
 
रेल कोच फैक्ट्रियों की उत्पादन क्षमता बढ़ी : अग्रवाल ने बताया कि रेलवे की चल परिसंपत्ति के लिहाज से पिछला साल क्रांतिकारी रहा। वित्त वर्ष 2017-18 के बाद से रेल कोच फैक्ट्रियों की उत्पादन क्षमता दुगुनी हो चुकी है। पिछले वित्त वर्ष में कोच का उत्पादन चार हजार से बढ़कर छह हजार पर पहुंच गई। इसमें चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्टरी (आईसीएफ) में तीन हजार कोच का उत्पादन हुआ जो दुनिया की किसी भी कोच फैक्ट्री के लिए रिकॉर्ड है। रायबरेली स्थित मॉर्डन कोच फैक्ट्री में भी पिछले वित्त वर्ष में उत्पादन शत-प्रतिशत बढ़कर दुगुना हो गया।
 
उन्होंने बताया कि चालू वित्त वर्ष में देश में कोच उत्पादन बढ़कर आठ हजार पर पहुंचने की संभावना है। इसमें आईसीएफ का योगदान चार हजार पर पहुंचने की उम्मीद है।

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