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लाल किताब : कैसे पता चलेगा कि भाग्य सोया है? जानिए 3 कारण और 1 उपाय

Updated: गुरुवार, 14 नवंबर 2019 (14:50 IST)
लाल किताब की विद्या एक रहस्यमयी विद्या है। इसमें ज्योतिष की परंपरागत विद्या से थोड़ा हटकर विश्लेषण किया जाता है और समाधान बताया जाता है। जहां तक भाग्य का सवाल है तो यह कैसे पता चलेगा कि आपका भाग्य सोया हुआ है? यदि यह पता चल जाए की भाग्य सोया हुआ है तो फिर उसे कैसे जागाया जाए? तो जानिए लाल किताब का ज्ञान।
 
 
1.मेहनत का नहीं मिलता फल : कई बार ऐसा होता है कि बहुत मेहनत करने के बाद भी मनचाहा फल प्राप्त नहीं होता। हर बार किस्मत धोका दे जाती है। मतलब यह कि कर्म तो पूर्ण है लेकिन भाग्य ने साथ नहीं दिया। ऐसे में समझ जाएं कि आपका भाग्य सोया हुआ है और उसे जगाने की जरूर है।
 
2.सोया भाव : कुंडली के जिस भाव में कोई ग्रह नहीं है और जिस पर किसी ग्रह की दृष्टि भी नहीं पड़ रही है वह सोया भाव होता है। जैसे भाग्य के स्‍थान पर कोई ग्रह नहीं है और उस स्थान पर किसी ग्रह की दृष्टि भी नहीं पड़ रही है तो वह सोया हुआ भाव है। कुंडली का नवां भाव सोया है तो मतलब भाग्य भी सोया हुआ है।
 
 
3.सोया ग्रह : सोया भाग के अलाव सोया ग्रह से मतलब यह है कि उसका शुभ या अशुभ प्रभाव सिर्फ उसी भाव में होगा जिस भाव में वह बैठा यानी कि स्थित है। इसकी कई स्थितियां होती है।
 
1. पहली यह कि सोया ग्रह अर्थात कोई ग्रह यदि सूर्य के सपीप है तो उसे अस्त माना जाएगा।
2. दूसरा यह कि जब पहले भावों (1 से 6 तक के खाने) में कोई ग्रह न हो तो बाद के भावों ( 7 से 12 तक के खाने) के ग्रह सोये हुए माने जाएंगे।
3. तीसरा यह कि पहले भावों में कोई ग्रह न हो तो बाद के भावों के ग्रह सोये हुए माने जाएंगे।
4. चौथी स्थिति यह कि जब कोई ग्रह स्वयं की राशी, उच्च राशी या अपने पक्के घर में नहीं बैठा हो।
5. पांचवीं स्थिति भाव 10 में कोई ग्रह न हो तो भाव 2 के ग्रह सोये होंगे। भाव 2 में कोई ग्रह न हो तो भाव 9 व 10 के ग्रह सोये होंगे।

 
नोट : लाल किताब में भाव की प्रधानता है, ग्रह गौण होता है। ग्रह के सोने में दृष्टि का बहुत महत्व है। लाल किताब में जो दृष्टि का सिद्धान्त है, वह तय करता है कि कौनसा ग्रह सोया हुआ है। ग्रह के सोया होने का तात्पर्य यह है कि ग्रह शुभ परिणाम देने में कमजोर हो जाता है।

कैसे जागेंगे ग्रह या भाव?
1.जब कोई भी ग्रह सोया हुआ हो तो उसे बलवान बनाने या क्रियाशील करने के लिए उस ग्रह का उपाय किया जाता है जिससे वह ग्रह शुभ फलदायी बन जाता है। इसके लिए लाल किताब की कुंडली में अन्य विशेष ग्रह को भाव में बैठाना पड़ता है।

 
2.हर ग्रह उम्र के हिसाब से थोड़ा बहुत जाग जाता है। बृहस्पति 16 से 21 वर्ष की आयु के मध्य, चन्द्र 24वें वर्ष के बाद, शुक्र विवाह के बाद (अगर विवाह 25वें वर्ष के पश्चात् होतो), मंगल 28वें वर्ष के पश्चात्, बुध 34वें वर्ष के पश्चात्, शनि 36वें वर्ष के पश्चात, राहु 42वें वर्ष के पश्चात, केतु संतान के जन्म के पश्चात् या विशेषकर 48वें वर्ष के पश्चात् जाग्रह हो जाता है। जाग्रत होने पर शुभ या अशुभ फल देते हैं।

 
3.शुभ फल पाने के लिए ग्रह से संबंधित उपाय करने होते हैं। जैसे कुंडली का प्रथम भाव सोया हुआ हो उसे जाग्रत करने के लिए मंगल का उपाय करते हैं। अगर दूसरा घर सोया हुआ हो तो चन्द्रमा के, तीसरे घर को जगाने के लिए बुध के, चौथे घर के लिए चन्द्र के, पांचवें घर के लिए सूर्य के, छठे घर के लिए राहु के, सातवें के लिए शुक्र के, आठवें के लिए चन्द्रमा, नौवें के लिए गुरु, दशम के लिए शनिदेव के, एकादश भाव के लिए गुरु के और द्वादश अर्थात बारहवें भाव के लिए की गुरु या केतु के उपाय किए जाते हैं।

 
एक उपाय : यदि आपका भाग्य सोया हुआ है तो आप बृहस्पति से संबंधित उपाय करें। जैसे पीपल की जड़ में नित्य जल चढ़ाएं। गुरुवार का व्रत रखें। नाक साफ रखें। पीले वस्त्र पहनें। पीले फुल वाले पौधे गृहवाटिका में लगाएं। पवित्र और प्रसन्नचित्त रहें। झूठ ना बोलें। पिता और दादा से संबंध अच्छे रखें। माथे पर केसर या चंदन का तिलक लगाएं। मांस, मदिरा आदि व्यसन से दूर रहें।

लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

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