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राहु यदि है नौवें भाव में तो रखें ये 5 सावधानियां, करें ये 5 कार्य और जानिए भविष्य

अनिरुद्ध जोशी
शनिवार, 27 जून 2020 (10:05 IST)
कुण्डली में राहु-केतु परस्पर 6 राशि और 180 अंश की दूरी पर दृष्टिगोचर होते हैं जो सामान्यतः आमने-सामने की राशियों में स्थित प्रतीत होते हैं। कुण्डली में राहु यदि कन्या राशि में है तो राहु अपनी स्वराशि का माना जाता है। यदि राहु कर्क राशि में है तब वह अपनी मूलत्रिकोण राशि में माना जाता है। कुण्डली में राहु यदि वृष राशि मे स्थित है तब यह राहु की उच्च स्थिति होगी। मतान्तर से राहु को मिथुन राशि में भी उच्च का माना जाता है। कुण्डली में राहु वृश्चिक राशि में स्थित है तब वह अपनी नीच राशि में कहलाएगा। मतान्तर से राहु को धनु राशि में नीच का माना जाता है। लेकिन यहां राहु के नौवें घर में होने या मंदा होने पर क्या सावधानी रखें, जानिए।
 
कैसा होगा जातक : पागलों का हकीम। फकीर या साधु से संगत और पागलों की फिकर रखें तो उन पर फिजूर खर्च होगा। नौवां घर बृहस्पति से प्रभावित होता है। यदि जातक का अपने भाइयों और बहनों के साथ अच्छा संबंध है तो यह यह फायदेमंद होगा। शनि से संबंधित व्यापार में लाभ होगा। यदि बृहस्पति पांचवें या ग्यारहवें घर में हो तो यह निष्प्रभावी होगा। यदि राहु अशुभ होकर नौवें भाव में हो तो पुत्र प्राप्ति की संभावनाएं कम रहती हैं, खासकर तब और जब जातक अपने किसी सगे रिश्तेदार कि खिलाफ कोई अदालती मामला दायर करता है। पहला भाव खाली हो तो जातक का स्वास्थ्य पीड़ित होता है और जातक उम्र में बडे लोगों के द्वारा अपमानित होता है और मानसिक रूप से प्रताड़ित होता है।
 
5 सावधानियां :
1. अपने से बड़े लोगों से विवाद न करें।
2. ससुराल पक्ष से संबंध न बिगाड़े।
3. दहलीज के नीचे से गंदे पानी की निकासी न करें।
4. घर में भट्टी न लगाएं।
5. ईमानदार बने रहें।
 
क्या करें : 
1. संयुक्त परिवार में ही रहें।
2. सोने के आभूषण धारण करें।
3. कुत्ते को प्रतिदिन रोटी खिलाएं।
4. केसर या चंदन का तिलक लगाएं।
5. धर्म कर्म के काम करते रहें।

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