ramcharitmanas

एस्टेरॉयड एपोफिस से होगी महाप्रलय, नास्त्रेदमस ने भी की है भविष्‍यवाणी

Updated: गुरुवार, 26 दिसंबर 2019 (15:56 IST)
एस्टेरॉयड को हिन्दी में उल्कापिंड कहते हैं। हमारे सौरमंडल में ऐसी लाखों छोटी-बड़ी चट्टाने हैं, जो सूर्य की परिक्रमा करते हुए कई बार पृथ्वी के निकट आ जाती हैं, निकट से गुजर जाती है या उसके वायुमंडल में आकर जलकर टूकड़े-टूकड़े होकर धरती पर गिर जाती है। अतीत में इन उल्कापिंडों से कई बार जीवन लगभग समाप्त हो चुका है। एक बार फिर मंडरा रहा है डॉयनॉसोर के जमाने का खतरा। अंतरिक्ष में भटक रहा सबसे बड़ा उल्का पिंड '2005 वाय-यू 55' है लेकिन फिलहाल खतरा एस्टेरॉयड एपोफिस से है।
 
 
'2005 वाय-यू 55'- वराहमिहिर शोध संस्था उज्जैन के खगोल विज्ञानी संजय केथवास के अनुसार खगोल विज्ञान में एक शब्द है 'नियोज' जिसका अर्थ है 'नीयर टू अर्थ ऑब्जेक्ट्स' या पृथ्वी के पास अंतरिक्ष में भ्रमण करने वाली वस्तुएं। इनसे हमेशा खतरा बना रहता। इन्हीं नियोज में से एक सबसे बड़ा उल्का पिंड '2005 वाय-यू 55' है, जो 30 वर्षों बाद पृथ्वी के सबसे नजदीक से गुजरेगा।
 
 
उल्का पिंड 2005 वाय-यू 55 पहाड़ी आलू जैसी एक बड़ी एवं ठोस चट्टान है। इसकी लंबाई 1 हजार 300 फुट है। अगर यह पृथ्वी से टकराती है तो 50 अरब टन टीएनटी (ट्राइ नाइट्रो टाल्युइन) के बराबर ऊर्जा उत्पन्न होगी, जो आधी धरती को ध्वस्त करने के लिए पर्याप्त है। इसके पहले वर्ष 1981 में यह उल्का चंद्रमा के उस पार से गुजरा था, लिहाजा तब खतरे जैसी कोई बात नहीं थी। फिर यह 2011 में पृथ्वी और चंद्रमा के बीच से गुजजरा तब धरती बाल बाल बची थी। वैसे यह सूर्य के प्रचंड गुरुत्वाकर्षण में बंधा हुआ है। अतः इसके अपने पथ पर सीधे आगे निकल जाने की उम्मीद अधिक रहती है। उल्का पिंड 2005 वाय-यू 55 टेलीस्कोप के माध्यम से इस माह से दिखने लगेगा। इसके लिए दुनिया भर के खगोल विज्ञान क्लब, संस्थाएं तैयारी में जुटी हैं।
 
 
एपोफिस-कई बड़े वैज्ञानिकों को आशंका है कि एपोफिस या एक्स नाम का ग्रह धरती के काफी पास से गुजरेगा और अगर इस दौरान इसकी पृथ्वी से टक्कर हो गई तो पृथ्वी को कोई नहीं बचा सकता। हालांकि कुछ वैज्ञानिक ऐसी किसी भी आशंका से इनकार करते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि ब्रह्मांड में ऐसे हजारों ग्रह और उल्का पिंड हैं, जो कई बार धरती के नजदीक से गुजर ‍चुके हैं। 1994 में एक ऐसी ही घटना घटी थी। पृथ्वी के बराबर के 10-12 उल्का पिंड बृहस्पति ग्रह से टकरा गए थे जहां का नजारा महाप्रलय से कम नहीं था। आज तक उस ग्रह पर उनकी आग और तबाही शांत नहीं हुई है।
 
 
वैज्ञानिक मानते हैं कि यदि बृहस्पति ग्रह के साथ जो हुआ वह भविष्य में कभी पृथ्वी के साथ हुआ तो तबाही तय हैं, लेकिन यह सिर्फ आशंका है। आज वैज्ञानिकों के पास इतने तकनीकी साधन हैं कि इस तरह की किसी भी उल्का पिंड की मिसाइल द्वारा दिशा बदल दी जाएगी। इसके बावजूद फिर भी जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग तबाही का एक कारण बने हुए हैं।
 
कुछ महीनों पहले अमेरिका के खगोल वैज्ञानिकों ने भी घोषणा की थी कि 13 अप्रैल 2029 को पृथ्वी पर प्रलय हो सकता है। उनके अनुसार अंतरिक्ष में घूमने वाला एक ग्रह एपोफिस 37014.91 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से पृथ्वी से टकरा सकता है। यदि ऐसा हुआ तो लाखों लोगों की जान चली जाएगी और धरती के वातारण बदल जाएगा।
 
 
एपोफिस से खतरा- हालांकि वैज्ञानिक कहते हैं कि ढाई सौ मीटर बड़ा यह क्षुद्रग्रह एपोफिस पृथ्वी के बहुत पास आने वाला है। हिसाब लगाया गया है कि शुक्रवार 13 अप्रैल 2029 को वह पृथ्वी से केवल 36 हजार किलोमीटर की दूरी पर से गुजरेगा। यदि इसने थोड़ी भी अपनी दिशा धरती की ओर और मोड़ी तो इसके धरती से टकराने की आशंका बड़ जाएगी। इससे उपग्रहों को भी खतरा हो सकता है।
 
यदि एपोफिस पृथ्वी से नहीं टकराया तो वह दुबारा लौटेगा। तब यह निश्चित ही पृथ्‍वी से टकराएगा। वैज्ञानिक मानते हैं कि 2036 में  उसका पृथ्वी से टकराना लगभग निश्चित है। यदि यह टक्कर हुई, तो उसकी विस्फोटक शक्ति हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से भी दस लाख गुना अधिक होगी।
 
हाल ही में NASA प्रमुख जिम ब्रेडेस्टाइन ने चेतावनी दी है कि अब किलर एस्टेरॉयड की कल्पना किसी साइंस फिक्शन फिल्म तक सीमित नहीं है। अब असल जिंदगी में भी ऐसा हो सकता है। ऐसा कोई एस्टेरॉयड पृथ्वी पर भी तबाही मचा सकता है।
 
अपनी बात के समर्थन में जिम ब्रेडेस्टाइन कहा कि साल 2013 में चेलियाबिंस्क में एक एस्टेरॉयड टकराया था, जिसके कारण 66 फुट गड्ढा हो गया था। दक्षिणी यूराल क्षेत्र में हुए इस टकराव के कारण संपत्तियों को काफी नुकसान पहुंचा था और करीब 1500 लोग घायल हो गए थे।
 
 
20 लाख एस्ट्रेरॉयड घूम रहे हैं- NASA के पास पृथ्वी के आसपास 140 मीटर या उससे बड़े करीब 90 प्रतिशत एस्टेरॉयड को ट्रैक करने का प्लान है। सामान्य रूप से एस्टेरॉयड पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करते वक्त उनका द्रव्यमान कम हो जाता है। खास बात यह है कि NASA जिस एस्टेरॉयड को ट्रैक करने की कोशिश कर रहा है वह चेलियाबिंस्क में टकराए एस्टेरॉयड की तुलना में सात गुना ज्यादा बड़ा है। अनुमान है कि इस तरह के कोई बीस लाख क्षुद्र ग्रह पृथ्वी के निकटवर्ती अंतरिक्ष में घूम रहे हैं। औसतन हर हफ्ते इस तरह का एक क्षुद्र पिंड पृथ्वी से चंद्रमा तक की दूरी दूरी के बीच से निकल जाता है।
 
 
ज्यादातर वैज्ञानिक मानते हैं कि पृथ्वी पर प्रलय अर्थात जीवन का विनाश तो सिर्फ सूर्य, उल्कापिंड या फिर सुपर वॉल्कैनो (महाज्वालामुखी) ही कर सकते हैं। हालांकि कुछ वैज्ञनिक कहते हैं कि सुपर वॉल्कैनो पृथ्वी से संपूर्ण जीवन का विनाश करने में सक्षम नहीं हैं क्योंकि कितना भी बड़ा ज्वालामुखी होगा वह अधिकतम 70 फीसदी पृथ्वी को ही नुकसान पहुंचा सकता है। अब जहां तक सवाल उल्कापिंड का है तो अभी तक खगोलशास्त्रियों को पृथ्वी के घूर्णन कक्षा में ऐसा कोई उल्कापिंड नहीं दिखा है, जो पृथ्वी को प्रलय के मुहाने पर ला दे। फिर भी इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता कि यदि कोई भयानक विशालकाय उल्कापिंड पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के चंगुल में फंस जाए तो तबाही निश्चित है।
 
 
पहले हो चुका है महाविनाश- अमेरिका में खगोल भौतिकी के हारवर्ड-स्मिथसोनियन सेंटर के डॉ. अर्विंग शापिरो बताते हैं कि पृथ्वी को अतीत में कई बार इस तरह के पिंडों के साथ टक्कर झेलनी पड़ी है। वे कहते हैं, 'इस तरह का सबसे पिछला प्रलयंकारी पिंड साढ़े छह करोड़ साल पहले टकराया था। उसने न जाने कितने जीव-जंतुओं की प्रजातियों का पृथ्वी पर से अंत कर दिया। डायनासॉर इस टक्कर से लुप्त होने वाली सबसे प्रसिद्ध प्रजाति हैं। समस्या यह है कि हम नहीं जानते कि कब फिर ऐसा ही हो सकता है।' वह लघु ग्रह सन फ्रांसिस्को की खाड़ी जितना बड़ा था और आज के मेक्सिको में गिरा था। इस टक्कर से जो विस्फोट हुआ, वह दस करोड़ मेगाटन टीएनटी के बराबर था। पृथ्वी पर वर्षों तक अंधेरा छाया रहा।
 
 
नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी- नास्त्रेदमस अनुसार तृतीय विश्व युद्ध चल रहा होगा तब आकाश से एक उल्कापिंड हिंद महासागर में गिरेगा और समुद्र का सारा पानी धरती पर फैल जाएगा जिसके कारण धरती के अधिकांश राष्ट्र डूब जाएंगे।...हालांकि यह भी हो सकता है कि इस भयानक टक्कर के कारण धरती अपनी धूरी से ही हट जाए और अंधकार में समा जाए। नास्त्रेदमस तृ‍‍तीय विश्व युद्ध के बारे में भी भविष्यवाणी करते हैं कि 'एक पनडुब्बी में तमाम हथियार और दस्तावेज लेकर 'वह व्यक्ति' इटली के तट पर पहुंचेगा और युद्ध शुरू करेगा। उसका काफिला बहुत दूर से इतालवी तट तक आएगा।'
 
 
''एक मील व्यास का एक गोलाकार पर्वत अं‍तरिक्ष से गिरेगा और महान देशों को समुद्री पानी में डूबो देगा। यह घटना तब होगी जब शांति को हटाकर युद्ध, महामारी और बाढ़ का दबदबा होगा। इस उल्का द्वारा कई प्राचीन अस्तित्व वाले महान राष्ट्र डूब जाएंगे।'' समीक्षक और व्याख्याकार इस उल्का के गिरने का केंद्र हिंद महासागर मानते हैं। ऐसे में मालद्वीप, बुनेई, न्यूगिना, फिलि‍पींस, कंबोडिया, थाईलैंड, बर्मा, श्रीलंका, बांग्लादेश, भारत, पाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका के तटवर्ती राष्ट्र तथा अरब सागर से लगे राष्ट्र डूब से प्रभावित होंगे।
 
 
 
लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

Show comments

Ather का सबसे सस्ता Electric Scooter, कीमत सुनकर रह जाएंगे हैरान, 120Km Range के साथ आएगा Konarc

Meta CEO Mark Zuckerberg ने भारत से मांगी माफी, 5-6 घंटे तक Facebook से हटाया गया था PM Modi का वीडियो

E20 Petrol : क्या सरकार ला रही है Flex-Fuel वाहनों के लिए नई पॉलिसी? सरकार ने दिया बड़ा अपडेट

CJP प्रोस्टेट पर बोले CJI- युवाओं की बात सुननी चाहिए, हिंसा का जवाब हिंसा नहीं हो सकता

No Insurance, No Fuel प्रोजेक्ट क्या है, सुप्रीम कोर्ट क्यों करना चाहता है लागू और आप पर कैसे पड़ेगा असर

सभी देखें

BSP के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का निधन

SpaceX Rocket Moon Crash : 8,700 Kmph की रफ्तार से चांद से टकराया SpaceX रॉकेट का हिस्सा, वैज्ञानिकों ने टेलीस्कोप से रखी नजर, देखें Video

Sheikh Hasina Return : शेख हसीना ने किया ऐलान- दिसंबर में बांग्लादेश लौटूंगी, बोलीं- गिरफ्तारी या मौत का भी डर नहीं, भारत ने कार्यक्रम से क्यों बनाई दूरी

E20 Petrol : क्या सरकार ला रही है Flex-Fuel वाहनों के लिए नई पॉलिसी? सरकार ने दिया बड़ा अपडेट

भारत आ रहा किम कार्दशियन का ब्रांड ‘स्किम्स’, दिल्ली-मुंबई में खुलेंगे पहले स्टोर

अगला लेख