suvichar

जानिए कैसे, आइंस्टीन से कम नहीं है यह महिला...

Updated: शनिवार, 25 मार्च 2017 (12:20 IST)
कहते हैं कि पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं और अगर आप इस कहावत को सच मानते हैं तो आपके लिए यह जानना जरूरी होगा कि सबरीना गोंजालेज पेस्तरस्की मात्र 23 वर्ष की हैं और वे अपनी उपलब्धियों से अल्बर्ट आइंस्टीन की बराबरी करती हैं। जब वे मात्र 14 वर्ष की थीं तो अपने सिंगल इंजन वाले प्लेन की एयरक्रॉफ्ट वर्दी का प्रमाणपत्र पाने के लिए विश्वप्रसिद्ध एमआईटी (मैसाचुसेट्‍स इंस्टीट्‍यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) कैम्पस में घूम रही  थीं। विदित हो कि इस सिंगल इंजन वाले विमान को खुद उन्होंने बनाया था। उन्होंने खुद अपने प्रयासों से इस विमान को उड़ाया भी था। उस समय  कैम्पस में मौजूद लोगों के लिए वे कौतूहल का विषय थीं।
 
तब से नौ वर्ष बीत चुके हैं और सबरीना एमआईटी से ग्रेजुएशन करने के बाद हार्वर्ड से पीएच-डी कर रही हैं। फिजिक्स की इस विद्यार्थी की उम्र मात्र 23  वर्ष है। पेस्तरस्की का सारा जोर क्वांटम ग्रेविटी को समझने पर है और वे क्वाटंम मैकेनिक्स के संदर्भ में गुरुत्वाकर्षण (ग्रेविटी) की व्याख्या करती हैं।  उनकी रुचि ब्लैक होल्स और स्पेसटाइम को समझने में भी है। आपको आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि उन्हें नासा के वैज्ञानिक जानते हैं और उनके लिए जेफ  बेजोस और ब्ल्यू ओरिजिन जैसी कंपनियां और लोग रोजगार का एक स्थायी प्रस्ताव लिए तैयार रहते हैं। सबरीना कई मामलों में असाधारण हैं लेकिन वे  अमेरिका में बढ़ रही ऐसी प्रवृति की अगुआ हैं जिसके तहत देश में लड़कियों में फिजिक्स पढ़ने की ललक बढ़ रही है।
 
वर्ष 2015 के दौरान फिजिक्स में ग्रेजुएशन करने वाले छात्रों की संख्या 8081 थी और इसी वर्ष 2015 में फिजिक्स में शोध करने वालों की संख्‍या 1860  थी। फिजिक्स और एस्ट्रोनॉमी में पढ़ने वालों की संख्या कम ही है और अभी भी महिला विद्यार्थियों को तरह-तरह की मुसीबतों से जूझना पड़ता है। लेकिन  वे असाधारण महिला वैज्ञानिक और आधुनिक फिजिक्स की जन्मदाता मैरी एस. क्यूरी की परम्परा को आगे बढ़ाने वाली हैं जिन्होंने विज्ञान के इतिहास में  पहला नोबेल पुरस्कार जीता था। मैरी, पैरिस यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट हासिल करने वाली पहली यूरोपीय महिला थीं। उन्होंने ही सबसे पहले विकिरण शब्द,  विचार को जन्म दिया था।
 
बाद में, मैरी क्यूरी, सौरबोन यूनिवर्सिटी पैरिस की पहली महिला लेक्चरर और प्रोफेसर बनीं। उन्होंने दुनिया में लोगों की प्राकृतिक जगत की समझ का पूरी  तरह से कायाकल्प किया। उनकी तुलना में कम प्रसिद्ध वैज्ञानिकों जैसे एडा लवलैस ने चार्ल्स बैबैज के 'एनालिटिकल इंजिन' के गणना करने की मशीन पर  प्रश्न चिन्ह लगाते हुए एक ऐसी एल्गोरिथम विकसित की जिसकी मदद से बर्नोली नंबर्स की गणना करने के अनुक्रम का मार्ग प्रशस्त हुआ। इसे कई तरह  से प्रयोग में लाया जा सकता था।

Show comments

अभिजीत दीपके का कंगना पर तीखा तंज, उन्हें गंभीरता से लेता ही कौन है?

Paper Leak Law 2026 : लोकसभा से पास हुआ नया एंटी पेपर लीक बिल, अब 10 साल की जेल और 10 रुपए करोड़ तक जुर्माना, क्या-क्या बदला

Audi Q9 : Audi की अब तक की सबसे बड़ी SUV से उठा पर्दा, 7-सीटर लग्जरी, Hands-Free Driving और V8 इंजन से होगी लैस

Rahul Gandhi : राहुल गांधी के आरोपों से लोकसभा में हंगामा, अमित शाह पर छात्रों पर गोली चलवाने का आरोप, सरकार ने मांगा सबूत, पेपर लीक बिल पर तीखी बहस

WhatsApp का मेगा अपडेट, 5 नए फीचर्स बदल देंगे कॉलिंग का पूरा एक्सपीरियंस

सभी देखें

Donald Trump : ट्रंप की ईरान को कड़ी चेतावनी, जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमले के बाद बोले- 'करारा जवाब देंगे'

एमपी सरकार का बड़ा निर्णय, 25 की जगह 60% किया जाएगा मूंग का उपार्जन, ई-टोकन से खाद वितरण व्यवस्था भी खत्म

अमित शाह को जाना होगा, छात्रों पर चलवाईं गोलियां, गृह मंत्री को हटाए सरकार, प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले राहुल गांधी

CM योगी का बड़ा बयान, सनातन संस्कृति को खत्म करना चाहती हैं कुछ ताकतें, भारत विरोधी साजिशों से किया आगाह

योगी सरकार का बड़ा तोहफा, यूपी की 110 ग्राम पंचायतों में शुरू हुई आधार सेवाएं, 6 जिलों के ग्रामीणों को मिलेगी सुविधा

अगला लेख