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हिन्दी कविता : तिरंगा ध्वज

शुक्रवार,जुलाई 22, 2022
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हिंदू-मुस्लिम मिल कर रहते, ईसाई भी यार। अलग नहीं है किसी तरह भी, सिखों का संसार। तीजों त्योहारों पर सब हैं, आपस में मिलते, खुशियों के मेले सजते तो, मस्ती के बाजार। ऐसी भारत भरत भूमि को, शत-नत वंदन है।।
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अम्मा यह है कैसा मेला, धक्कम-मुक्की रेलम-पेला, अम्मा यह कैसा है मेला। ऊंचे-ऊंचे लगे हिंडोले, एक तरफ हैं चकरी-झूले।
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क्यों अब बनी पहेली है। नानी आज अकेली है। बात नहीं अब करता कोई, घर में नाना-नानी से, गुड़िया रानी को अब मतलब...
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मच्छर और मक्खी पर पढ़ें छोटी फनी बाल कविता- एक पुस्तक पर बैठा मच्छर, सीख रहा था पाठ। तभी वहां पर मक्खी आकर,
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निरंतर बढ़ते समय पर जीवन जीने की सीख देती फनी बाल कविता। चिड़िया बोली, राम-राम जी। उठो करो कुछ, काम धाम जी।
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Poem on Neem Tree पेड़ नीम का घर के बाहर छाता बनकर, खड़ा हुआ है एक हकीम सा। पेड़ नीम का। हवा चली तो डाली पत्ते Hindi Poem
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मैं तुमसे बातें करने, मोबाइल रोज मिलाता हूं, टन-टन घंटी रोज है बजती, बात नहीं कर पाता हूं
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पिता-सा न कोई जग में महान, पिता से मिलता हमें सच्चा प्यार। पिता विचारों को उज्ज्वल करते, हमारे मन को प्यार से भरते। Father Poem
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मैं मम्मा से पूछता हूं, पापा कब मेरे संग खेलेंगे, मम्मा धीरे से समझाती वो तो संडे को मिल पाएंगे...
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आसान नहीं है बनना सागर, सागर बनने के लिए चाहिए, विशालता, गहराई और सबको आत्मसात करने का गुण।
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21 June 2022, Yoga Day हर साल 21 जून को अंतरराष्ट्रीय या विश्व योग दिवस (World yoga day 2022) मनाया जाता है। योग दिवस मनाने की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी। पढ़ें योग दिवस पर शिक्षाप्रद कविता... Poem on Yoga Day
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ग्रीष्म ऋतु है कितनी अच्छी, लंबी छुट्टी लाती है, पढ़ने लिखने होमवर्क से, राहत हमें दिलाती है।
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ब्रदर्स डे पर कविता- चल मेरे भाई, मेरे साथ, तुझको खिलाऊं दाल और भात। मिला के उसमें चटनी न्यारी, तुझको जो लगती है प्यारी।
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रेल चली भई रेल चली, धुक्कम-पुक्कम रेल चली। टीना, मीना, चुन्नू, मुन्नू, डिब्बे बनकर आएं। मोहन कक्कू इंजिन बनकर,
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जूते बैठे दरवाजे पर, झांक रहे बैठक खाने में। कहते हैं क्यों- हमें मनाही ? हरदम ही भीतर आने में।
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डाली से मुझको मत तोड़ो, फूल कर रहा नम्र निवेदन, डाली से मुझको मत तोड़ो। मुझको दर्द बहुत होता है, ऐसे न अब कान मरोड़ो।
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पेड़ ने जीवन दिया है, पेड़ ने दी जिंदगी। पेड़ को शत-शत नमन है, पेड़ को है बंदगी। पेड़ हैं तो प्राणवायु, पेड़ हैं तो अन्न जल।
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टोप नहीं साहब के सिर पर, सिर नंगा है साहब का। नंगा सिर देखा तो देखा, सिर गंजा है साहब का।
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Poem on Jalebi करना नहीं बहाना बापू। आज जलेबी लाना बापू।। रोज सुबह कह कर जाते हैं, आज जलेबी ले आएंगे।
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