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कोरोना पर कविता : मुझसे डरो ना...

शनिवार,मार्च 21, 2020
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होली की मजेदार कविता- रम्मू जी ने पिचकारी में, रंग लबालब ठूंसा। दौड़े गम्मू के पीछे यूं, मार रहे हों घूंसा।
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हम भी पढ़े लिखे हैं भैया, हम भी पढ़े लिखे हैं। एक सुदूर गांव में रहते, करते रोज किसानी।
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पूछ रहे बिल्ली के बच्चे, डूबे गहन विचार में। चूहे क्यों न बिकते हैं मां, मेलों या बाज़ार में।
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परीक्षा के होते हैं, कितने ही रूप-रंग। कभी लिखित कभी मौखिक, तो कभी प्रकृति के संग।
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शीत लहर के पंछी आ गए, रुई के पंखे लगा-लगा कर। चारों तरफ धुंध दिन में भी, कुछ भी पड़ता नहीं दिखाई।
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कड़क ठंड है कहीं न जाएं। घर में रहकर मौज मनाएं। सूरज जब हड़ताल पर बैठा, पाएं न हम भी क्यों छुट्टी।
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बाल कविता : समय का मूल्य

बुधवार,फ़रवरी 12, 2020
रोज सुबह तड़के उठकर अब, सैर-सपाटे करना है। बड़े लगन से मेहनत करके,
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न से नफरत झ से झगड़ा कभी न पढ़ना भाई।
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मुन्ना हंसता मुन्नी हंसती, रोज लगाते खूब ठहाके। लगता खुशियों के सरवर में, अभी आए हैं नहा-नहाके।
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रज्जो ने सज्जो के दोनों, सज्जो ने रज्जो के दोनों, पकड़े कान।
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दीना इस कक्षा में पहली श्रेणी तो लेकर ही आए, साथ में नेक कर्म से अपने वो तो सबका आदर पाए।
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ऋतु आई है फिर बसंत की। हवा हंस रही दिक दिगंत की। सरसों के पीले फूलों ने, मटक-मटक कर शीश हिलाएं।
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शेर सिंह को ठंड लगी तो, लाए एक रजाई। ओढ़ तानकर खूब सोए वे,
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दाढ़ी के डिब्बे से बंदर, भाग गया लेकर सामान। दाढ़ी उसकी बहुत बड़ी है, अभी-अभी आया है ध्यान।
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सूपा लेकर भागे फूफा, फुप्पी हो गईं गुस्सा। दौड़ी फूफाजी के पीछे,
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कौआ बोला कांव-कांव जी बार-बार बस कांव-कांव जी। बोली मुन्नी, छत पर चलना, मुझे अभी कौए से मिलना।
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New Year 2020 Poem- स्वागत को तैयार रहो तुम। मै जल्द ही आने वाला हूं। बारह महीने साथ रहूंगा। खुशियां भी लाने वाला हूं।
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नववर्ष पर कविता- दीवारों पर लगेंगे। नए कैलेंडर। पुराने हटाएं जाएंगे।
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स्कूल जाते बच्चों की मां, उठ जाती है बड़ा पछिलहरा में, कर देती है बच्चों का टिफिन तैयार , उन्हें नहा-धुला और दुलार कर बिठा देती हैं उन्हें बस रिक्शे और ठेले पर
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