0

बाल कविता : नानी के घर धमा-चौकड़ी

मंगलवार,मई 26, 2020
Summer Season
0
1
कोल्ड ड्रिंक भले हो बिकता, भाता सबको पानी है, दादा-दादी ताऊ-ताई पानी पीती नानी है
1
2
लस्सी-शरबत-ठंडाई,पियो खूब, गर्मी आई! सड़कों पर है सन्नाटा-मारे लू सबको चांटा- दुबके रहे घरों में यार,
2
3
मीठा है खट्टा है, कुछ-कुछ नमकीन। पी लो तो तबियत, हो जाए रंगीन। आम का पना है यह, आम का पना।
3
4
हम बच्चे हिन्दुस्तान के। बच्चे हम संसार के।। कल-कल बहती नदियां हों, जल में पलता जीवन हो।
4
4
5
पानी बादल से आता है,पानी नल से आता है। अगर कहीं छत टूटी हो तो, छत से भी आ जाता है।
5
6
मैं नतमस्तक हो बाबा, श्रद्धा के फूल चढ़ाऊं, जय भीमा, जय भीमा, तेरे चरणों की धूल कहाऊं!! अर्थशास्त्री, कानून के ज्ञाता, भीमाबाई धर्मज्ञा माता,
6
7
सूरज शिक्षक सरकारों को, नहीं दया हम पर आती है। किरणों के चाबुक से हमको, भरी दुपहरिया पिटवाती है।
7
8
कल रात सपने में आया कोरोना.... उसे देख जो मैं डरातो मुस्कुरा के बोला मुझसे डरो ना... उसने कहा- कितनी अच्छी है तुम्हारी संस्कृति। न चूमते,न गले लगाते
8
8
9
होली की मजेदार कविता- रम्मू जी ने पिचकारी में, रंग लबालब ठूंसा। दौड़े गम्मू के पीछे यूं, मार रहे हों घूंसा।
9
10
हम भी पढ़े लिखे हैं भैया, हम भी पढ़े लिखे हैं। एक सुदूर गांव में रहते, करते रोज किसानी।
10
11
पूछ रहे बिल्ली के बच्चे, डूबे गहन विचार में। चूहे क्यों न बिकते हैं मां, मेलों या बाज़ार में।
11
12
परीक्षा के होते हैं, कितने ही रूप-रंग। कभी लिखित कभी मौखिक, तो कभी प्रकृति के संग।
12
13
शीत लहर के पंछी आ गए, रुई के पंखे लगा-लगा कर। चारों तरफ धुंध दिन में भी, कुछ भी पड़ता नहीं दिखाई।
13
14
कड़क ठंड है कहीं न जाएं। घर में रहकर मौज मनाएं। सूरज जब हड़ताल पर बैठा, पाएं न हम भी क्यों छुट्टी।
14
15

बाल कविता : समय का मूल्य

बुधवार,फ़रवरी 12, 2020
रोज सुबह तड़के उठकर अब, सैर-सपाटे करना है। बड़े लगन से मेहनत करके,
15
16
न से नफरत झ से झगड़ा कभी न पढ़ना भाई।
16
17
मुन्ना हंसता मुन्नी हंसती, रोज लगाते खूब ठहाके। लगता खुशियों के सरवर में, अभी आए हैं नहा-नहाके।
17
18
रज्जो ने सज्जो के दोनों, सज्जो ने रज्जो के दोनों, पकड़े कान।
18
19
दीना इस कक्षा में पहली श्रेणी तो लेकर ही आए, साथ में नेक कर्म से अपने वो तो सबका आदर पाए।
19