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फनी बाल कविता : पेड़ नीम का

सोमवार,जून 20, 2022
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मैं तुमसे बातें करने, मोबाइल रोज मिलाता हूं, टन-टन घंटी रोज है बजती, बात नहीं कर पाता हूं
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पिता-सा न कोई जग में महान, पिता से मिलता हमें सच्चा प्यार। पिता विचारों को उज्ज्वल करते, हमारे मन को प्यार से भरते। Father Poem
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मैं मम्मा से पूछता हूं, पापा कब मेरे संग खेलेंगे, मम्मा धीरे से समझाती वो तो संडे को मिल पाएंगे...
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आसान नहीं है बनना सागर, सागर बनने के लिए चाहिए, विशालता, गहराई और सबको आत्मसात करने का गुण।
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21 June 2022, Yoga Day हर साल 21 जून को अंतरराष्ट्रीय या विश्व योग दिवस (World yoga day 2022) मनाया जाता है। योग दिवस मनाने की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी। पढ़ें योग दिवस पर शिक्षाप्रद कविता... Poem on Yoga Day
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ग्रीष्म ऋतु है कितनी अच्छी, लंबी छुट्टी लाती है, पढ़ने लिखने होमवर्क से, राहत हमें दिलाती है।
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ब्रदर्स डे पर कविता- चल मेरे भाई, मेरे साथ, तुझको खिलाऊं दाल और भात। मिला के उसमें चटनी न्यारी, तुझको जो लगती है प्यारी।
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रेल चली भई रेल चली, धुक्कम-पुक्कम रेल चली। टीना, मीना, चुन्नू, मुन्नू, डिब्बे बनकर आएं। मोहन कक्कू इंजिन बनकर,
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जूते बैठे दरवाजे पर, झांक रहे बैठक खाने में। कहते हैं क्यों- हमें मनाही ? हरदम ही भीतर आने में।
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डाली से मुझको मत तोड़ो, फूल कर रहा नम्र निवेदन, डाली से मुझको मत तोड़ो। मुझको दर्द बहुत होता है, ऐसे न अब कान मरोड़ो।
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पेड़ ने जीवन दिया है, पेड़ ने दी जिंदगी। पेड़ को शत-शत नमन है, पेड़ को है बंदगी। पेड़ हैं तो प्राणवायु, पेड़ हैं तो अन्न जल।
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टोप नहीं साहब के सिर पर, सिर नंगा है साहब का। नंगा सिर देखा तो देखा, सिर गंजा है साहब का।
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Poem on Jalebi करना नहीं बहाना बापू। आज जलेबी लाना बापू।। रोज सुबह कह कर जाते हैं, आज जलेबी ले आएंगे।
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Poem on Summer Vacation भोर हुई, दिन चढ़ा बांस भर, बजे नगाड़े गरमी के। गरमी है गरमी है की रट,दादा खूब लगाते। सभी लोग उनकी हां में हां... Summer poem
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Funny Poem घोड़े पर है आसमान में, मुन्नी रानी बड़ी शान में। गुड्डी ने गुड्डे को कूका, बड़ी जोर से दिया कान में। मम्मी बहुत ध्यान रखती हैं...
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नदी नाचती रेत उछलती, पानी झर-झर गाता है। एक बुलबुला बहते-बहते,बन-बन कर मिट जाता है।
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इसको कहते लोग समोसा, उसको कहते लोग कचौड़ी। लेकिन जिसमें मजा बहुत है, वह कहलाती गरम पकौड़ी।
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बचपन गीत सुनाता चल। हंसता और मुस्कुराता चल। मिले राह में जो निर्मल, उनको गले लगाता चल। जीवन कांटों का जंगल,
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Ram Navami Poem राम नवमी पर भगवान श्री राम को समर्पित कविता- राम जन्म जिस नवमी होता, उस नवमी की महिमा अद्भुत, सृष्टि भी होती मतवाली, दिन में होली रात दिवाली।
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