0

होली पर दोहे : बच्चों की हुड़दंग है

शुक्रवार,मार्च 5, 2021
0
1
अक्कड़ मक्कड़ धूल में धक्कड़ दोनों मूरख दोनों अक्खड़ गर्जन गूंजी, रुकना पड़ा, सही बात पर झुकना पड़ा।
1
2
कुछ तो बोलो बैगन भैया, तुम पढ़ते हो कक्षा कौन? क्यों गुमसुम चुपचाप खड़े हो, साध रखा है बिल्कुल मौन।
2
3
पास हो गए पहले नंबर, ठोको ताली। जाएंगे नाना के घर कल, ठोको ताली।
3
4
तीन छछूंदर चढ़े रेल में, बिना टिकिट पकड़ाए। टी टी ने जुर्माना ठोका, रुपए साठ मंगाए।
4
4
5

बाल कविता : बारह मासा

मंगलवार,मार्च 2, 2021
प्रथम महीना चैत से गिन राम जनम का जिसमें दिन।। द्वितीय माह आया वैशाख। वैसाखी पंचनद की साख।।
5
6
अम्मा ने तो धरो कलेबा, रोटी-साग एक डिब्बा में, लडुआ-बेसन के धर दये हैं, जो आये तोरे हिस्सा में।
6
7
बसंती रंग का जादू धरा फूली न समाई पीली पत्ते पेड़ों ने उतारे
7
8

बाल कविता : कैसे दिखते गांव

मंगलवार,फ़रवरी 9, 2021
ऊपर से कैसी दिखती है, प्यारी धरती सारी। कैसे दिखते नदी, झील सब, खेत, बाग, फुलवारी।। गहरा सागर, ऊंचे पर्वत, कैसे दिखते होंगे?
8
8
9
पेट की कविता में, कांधे पर बीवी का शव, रखे दाना मांझी है। अस्पताल में, मौत से लड़ता, आम आदमी है।
9
10

फनी कविता : कोयल की छिपा छाई

शुक्रवार,फ़रवरी 5, 2021
कोयल खेले छिपा छाई, देती नहीं हमें दिखाई। शर्त उसने एक लगाई, दूं मैं अगर तुम्हें दिखाई।
10
11

फनी बाल कविता : लोरी

मंगलवार,फ़रवरी 2, 2021
अक्कड़-बक्कड़ बबे बो, सो जा कन्नू अब ना रो। देऊंगी री ऐसी गुड़िया,
11
12
तोता बोला टें टें टें पेड़ शुद्ध वायु दें कौआ बोला कांव-कांव पेड़ लगाओ देंगे छांव
12
13
फुरसत नहीं है अब, करना देश निर्माण है। हर पल देश विकास में, देना मुझे प्रमाण है।
13
14

बापू पर कविता: सत्य की राह

सोमवार,जनवरी 25, 2021
बम से बंदूकों से नहीं, बापू जैसा लडूंगा मैं। जब भी कांटे घेरेंगे,
14
15
गणतंत्र दिवस फिर आया है, भीड़ बढ़ी स्वागत करने को बादल झड़ी लगाते हैं। रंग-बिरंगे फूलों में ऋतुराज खड़े मुस्काते हैं।
15
16
सेवा, समर्पण और, त्याग भरी भावना, तन मन, धन वारना, सिखाता गणतंत्र है।
16
17
देखो दिवस गणतंत्र आया है, हमारा संविधान पूरी दुनिया को भाया है, देखो दिवस गणतंत्र आया है...
17
18
रण में हाहाकार मचो तब, राणा की निकली तलवार मौत बरस रही रणभूमि में, राणा जले हृदय अंगार।
18
19
शाम हुई थका सूरज पहाड़ों की ओट में, करता विश्राम। गुलाबी, पीली चादर बादल की ओढ़े
19