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poem on yoga day : सदा निरोगी काया जिसकी

मंगलवार,जून 15, 2021
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चि‍ड़िया चहक-चहक कहती, सुबह-शाम मैं गगन में रहती
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बहुत लुभाता है गर्मी में, अगर कहीं हो बड़ का पेड़। निकट बुलाता पास बिठाता, ठंडी छाया वाला पेड़।
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मार-मार कर लगा नचाने, पर भालू न नाचा। जड़ा मदारी ने गुस्से में, उसके गाल तमाचा।
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दो के एकम दो होते हैं, दो के दूनी चार। काम शुरू करने से पहले, करना सोच विचार।
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बड़ा हो गया फिर भी रेल की सीटी बजते, मन डोल-डोल जाता, रेलगाड़ी देखना अपनापन-सा लगता
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धोती हैं, कुरता, गमछे हैं, हम दादाजी के चमचे हैं। जब छड़ी कहीं गुम जाती है, वे छड़ी छड़ी चिल्लाते हैं।
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एक-एक कर गिर गए सारे, नहीं बचे दद्दू के दांत। चार गिर गए तीस साल में, पूड़ी साग चबाने में।
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गुड़ का ढेला देख छबीली, चींटी मन ही मन मुस्काई। अभी चढ़ूंगी इस पर्वत पर,कोई मुझे न रोके भाई।
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एक में जोड़ा एक तो बच्चों, हो जाते हैं दो। हाथ नहीं गंदे रखना है, हैंड वॉश से कर धो।
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महाराणा प्रताप पर पंडित नरेन्द्र मिश्र की कविता की कुछ पंक्तियां इस प्रकार है -
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आमतौर पर एक माह में 4 सप्ताह आते हैं...और एक सप्ताह में सात दिन होते हैं.... आइए पढ़ते हैं एक मजेदार कविता
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जय हनुमान बजरंग बली अंजनी के लाल पवन सुत नाम तुम्हारा। जय महावीर हे महाबली
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अप्रैल फूल कहीं नहीं खिलता मगर खिल जाता एक अप्रैल को क्या, क्यों, कैसे ? अफवाओं की खाद से और
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हाथ चलाया जोरों से तो, फूट गई पिचकारी। रम्मू के मुंह पर ही आई, ठेल रंगों की सारी।
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holi ki kavita : होली के रंग

शनिवार,मार्च 27, 2021
वोट बैंक की आड़ में, लोग राजनेता बन रहे हैं। नाम राम का हो, या रहीम का, चलता हुआ भारत का पथ, लोगों को डरा रहा है।
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लाल-लाल खिला पलाश सृष्टि की छवि मन हरती। फिर अपने आंगन में आई बसंती होली। मन पुलकित, तन पुलकित
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बच्चों की हुड़दंग है, उड़ी अबीर-गुलाल, तन रंग में डूबा हुआ, मन है मालामाल। सिलबट्टे पर बैठकर, कक्कू घिसते भांग, दद्दू राजा नाचते, बना-बनाकर स्वांग।
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नाचो मगन, जरा रंग लो ये तन-मन, आया रे आया रंगों का त्योहार नाचो होके मगन। सखियों संग राधा पनघट पे आई
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हिन्दी कविता : लौट आओ गौरैया

गुरुवार,मार्च 18, 2021
याद आता है वो तेरे ठुमुक-ठुमुक कर चलना, फुदक-फुदककर साथियों से ठिठौली करना! पेड़ों से छत पर आना और चोंच में दाना,
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