suvichar

पानी नहीं नहानी में

Updated: बुधवार, 1 अक्टूबर 2014 (18:08 IST)
जरा ठीक से देखो बेटे
पानी नहीं नहानी में
तुमको आज नहाना होगा
एक लोटे भर पानी में।

नहीं बचा धरती पर पानी
बहा व्यर्थ बेईमानी में
खूब मिटाया हमने-तुमने
पानी यूं नादानी में।

बीस बाल्टी पानी सिर पर
डाला भरी जवानी में
पानी को जी भर के फेंका
बिना बचारे पानी में।

ढेर-ढेर पानी मिलता था
सबको कौड़ी-कानी में
अब तो पानी मोल बिक रहा
पैसा बहता पानी में ‍

कितना घाटा उठा चुके हैं
हम अपनी मनमानी में
नहीं जबलपुर में है पानी
न ही अब बड़वानी में ।
लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512).... और पढ़ें
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