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आधी रात बीत गई

Updated: बुधवार, 1 अक्टूबर 2014 (18:10 IST)
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आठ लोरियां सुना चुकी हूं,
परियों वाली कथा सुनाई।

आधी रात बीत गई बीत भैया,
अब तक तुमको नींद न आई।

थपकी दे दे हाथ थक गए,
कंठ बोल बोल कर सूखा।

अब तो सोजा राजा बेटा,
तू है मेरा लाल अनोखा।

चूर-चूर मैं थकी हुई हूं,
सचमुच लल्ला राम दुहाई।

आधी रात बीत गई बीत भैया,
अब तक तुमको नींद न आई।

सोए पंख पखेरू सारे,
अलसाए हैं नभ के तारे।

करें अंधेरे पहरेदारी,
धरती सोई पैर पसारे।

बर्फ-बर्फ हो ठंड जम रही,
मार पैर मत फेंक रजाई।

आधी रात बीत गई बीत भैया,
अब तक तुमको नींद न आई।

झपकी नहीं लगी अब भी तो,
सुबह शीघ्र न उठ पाओगे।

यदि देर तक सोए रहे तो,
फिर कैसे शाला जाओगे।

समझा-समझा हार गई मैं,
बात तुम्हें पर समझ न आई।

आधी रात बीत गई भैया
अब तक तुमको नींद न आई।
लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512).... और पढ़ें
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