biodatamaker

बाल कविता : ठंडा है मटके का पानी

Updated: गुरुवार, 20 अप्रैल 2017 (14:56 IST)
गरम धूप में शोर मचाएं
मुन्नू टिल्लू रोते आएं
मां नानी उनको पुचकारे
जोर-जोर से हंसती रानी
ठंडा है मटके का पानी
 
गई परीक्षा गर्मी आई
नानी ने मंगवाई मिठाई।
धमा चौकड़ी करते भाई।
नानी की न कोई सानी
ठंडा है मटके का पानी।
 
पुस्तक कॉपी कौन पढ़े अब।
बच्चों के पीछे हैं पड़े सब।
मौका ऐसा किसे मिले कब।
अब तो छुक-छुक रेल चलानी।
ठंडा है मटके का पानी।
 
शहर छोड़ नानी घर आए।
कूद नदी में खूब नहाए।
पत्थर मार आम गिराए।
नानी से सब सुनी कहानी।
ठंडा है मटके का पानी।
 
नानी का घर स्वर्ग के जैसा
मिलती मस्ती मिलता पैसा
नाना है तो अब डर कैसा।
नानी जैसा न कोई दानी।
ठंडा है मटके का पानी।

 
लेखक के बारे में
सुशील कुमार शर्मा
वरिष्ठ अध्यापक, गाडरवारा.... और पढ़ें
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

नॉर्वे के राजा हाराल्ड पंचम का निधन, 1991 में बने थे राजा

सीआईए और रूसी एजेंसी के दो देशों में तख्तापलट के ‘सीक्रेट मिशन’ से खलबली..!

संस्कृत दिवस 2026: दुनिया की प्राचीन भाषा के 5 रहस्य

Rajni Raman Sharma: सृजन का एक सुनहरा सितारा अस्त हुआ

एल्गोरिथम से अपना पर्सपेक्टिव मत बनाओ: तुम्हारे लिए जो 6 है वह मेरे लिए 9 है...

अगला लेख