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मनोरंजक बाल कविता : टन टन बज गई घंटी...

Updated: गुरुवार, 15 जून 2017 (10:21 IST)
टन टन टन बज गई घंटी,
गुरुजी की उठ गई शंटी।
 
गर्मी की छुट्टी फुर्र हो गई,
गुरुजी की गुर्र शुरू हो गई।
 
गोलू-भोलू खेलना बंद,
पढ़ना इनको नहीं पसंद।
 
मम्मी ऊपर से चिल्लाए,
पापा गुस्से में आंख दिखाए।
 
सारी मस्ती भई छूमंतर,
पढ़ाई का डंडा है सिर पर।
 
सुबह-सुबह स्कूल को जाना,
होमवर्क फिर करके लाना।
 
धमा-धम्म सब कूदें खिड़की से,
डर गए सब मैडम की झिड़की से।
 
लंच में हम सब लूट मचाएं,
आलू-रोटी हम क्यों खाएं।
 
मोहन की लूटी थी मिठाई,
कक्षा में पड़ गई पिटाई।
 
छुट्टी के दिन बीते रे भाई,
अब मन लगाकर करो पढ़ाई।
 
भोलू, गोलू, बिट्टो, बंटी,
टन टन टन बज गई घंटी।
 
लेखक के बारे में
सुशील कुमार शर्मा
वरिष्ठ अध्यापक, गाडरवारा.... और पढ़ें
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